इंदौर में कांग्रेस से बीजेपी में शामिल हुए तीन पार्षद, हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को दिए आदेश

Sanjay Gupta | Jun 17, 2026, 13:45 IST
इंदौर दलबदल मामला
इंदौर नगर निगम में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए तीन पार्षदों की सदस्यता पर फैसला न होने से मामला हाईकोर्ट पहुंचा है। अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव सहित संबंधित अधिकारियों को एक माह में निर्णय लेने के आदेश दिए हैं।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • इंदौर में कांग्रेस के टिकट पर जीते तीन पार्षद बाद में बीजेपी में शामिल हो गए हैं।
  • कांग्रेस ने 2024 में इनकी पार्षदी समाप्त करने की मांग शासन से की थी।
  • मामले में कार्रवाई नहीं होने पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है।
  • हाईकोर्ट पहले भी दो माह में फैसला लेने का आदेश दे चुका है।
  • अब अवमानना याचिका पर मुख्य सचिव सहित संबंधित अधिकारियों को एक माह में निर्णय लेने के निर्देश दिए गए हैं।

इंदौर नगर निगम में भी बीना की विधायक निर्मला सप्रे जैसी स्थिति बनी हुई है। जैसे सप्रे चुनाव तो कांग्रेस के टिकट पर जीतीं, लेकिन अब कथित तौर पर कांग्रेस में नहीं हैं। अभी तक उनकी स्थिति साफ नहीं है और न ही स्पीकर ने कोई फैसला लिया है। इसी तरह का मामला इंदौर में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े तीन पार्षदों को लेकर भी बन गया है। इस मामले में हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने अवमानना याचिका पर सीधे मुख्य सचिव अनुराग जैन को आदेश दिए हैं।



इन तीन पार्षदों का है विवाद

इंदौर में कांग्रेस के टिकट पर साल 2022 के निगम चुनाव में वार्ड 15 से ममता सुनेर, वार्ड 17 से शिवम यादव और वार्ड 23 से विनिता धर्मेंद्र मौर्य चुनाव जीतीं। वहीं, बाद में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी जॉइन कर ली। कांग्रेस की ओर से इसमें 20 मई 2024 को मध्यप्रदेश शासन को पत्र देकर इनकी पार्षदी खत्म करने की मांग की गई थी, लेकिन शासन ने कुछ नहीं किया।



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दो माह में दिए थे फैसला लेने के आदेश

मामले में कांग्रेस की सोनिला मिमरोट ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की और मांग करते हुए कहा कि शासन ने अभी तक पार्षदी पर फैसला नहीं लिया है। इस पर 26 अगस्त 2025 को हाईकोर्ट ने शासन को मिमरोट के रिप्रेजेंटेशन पर दो माह में फैसला लेने का आदेश दिया था। अधिवक्ता जयेश गुरनानी ने मिमरोट की ओर से पैरवी की, लेकिन इसमें शासन ने कोई कदम नहीं उठाया।



मुख्य सचिव को दिए गए यह आदेश

इस मामले में एक बार फिर मिमरोट हाईकोर्ट गईं। अधिवक्ता जयेश गुरनानी ने तर्क रखे कि हाईकोर्ट के अगस्त 2025 के आदेश की अवमानना की जा रही है। इसमें मुख्य सचिव अनुराग जैन के साथ ही पीएस राज्यपाल और पीएस नगरीय प्रशासन को पक्षकार बनाया गया है।



सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने आदेश दिए कि संबंधित पक्षकार इस फैसले से एक माह के भीतर याचिकाकर्ता के रिप्रेजेंटेशन पर निर्णय करें। ऐसा नहीं होने पर यदि याचिकाकर्ता दूसरी अवमानना याचिका दायर करती हैं, तो उसका पूरा खर्च मुख्य सचिव व अन्य पक्षकारों द्वारा उठाना होगा।



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