इंदौर में 'अली' बनकर किया 12 साल शोषण : रसूखदार कॉलोनाइजर पर कोर्ट का बड़ा फैसला
कहानी 2011 की है, जब उज्जैन की एक किराना दुकान में समरीन मंसूरी की मुलाकात अतुल पंवार से हुई। अतुल ने खुद को मुस्लिम अली बताकर समरीन को अपने जाल में फंसाया। उसने शादी का झांसा दिया और फिर लिव-इन में रहने के लिए इंदौर आ गए।
समरीन ने इस दौरान दो बच्चों को जन्म दिया, लेकिन उसे मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। अतुल ने समरीन का तीन बार अबॉर्शन कराया और आखिरकार बच्चों को छोड़कर चला गया। अब इंदौर फैमिली कोर्ट ने इस आरोपी पर कानूनी हंटर चलाया है। कोर्ट ने आरोपी पिता को बच्चों के खर्चे के लिए भारी जुर्माना भरने के आदेश दिए है।
लिव-इन रिलेशनशिप और तीन बार अबॉर्शन का दर्द
अतुल समरीन को लेकर इंदौर आ गया और विजय नगर में रहने लगा। वहां दोनों करीब 12 साल तक पति-पत्नी की तरह एक ही छत के नीचे रहे। इस दौरान समरीन दो बच्चों की मां बनी, जिसमें एक बेटी और एक बेटा है। लेकिन इस रिश्ते के पीछे शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का सच भी छिपा था। वकील के मुताबिक अतुल ने जबरदस्ती समरीन का तीन बार अबॉर्शन कराया था। ताज्जुब की बात यह है कि मेडिकल पेपर्स पर उसने खुद को 'पति' ही लिखा था। धीरे-धीरे समरीन की सेहत खराब होती गई और फिर अतुल उसे बेसहारा छोड़ गया।
कोर्ट में बिल्डर की ओछी दलील: पत्नी नहीं 'रखैल' है
जब मामला अदालत की चौखट पर पहुंचा, तो अतुल ने अपना असली रंग दिखाया। उसने कोर्ट में दलील दी कि वह हिंदू है और उसकी पहली पत्नी जीवित है। उसने बड़ी बेशर्मी से समरीन को अपनी पत्नी मानने से इनकार कर दिया। उसने महिला के लिए 'रखैल' जैसे घटिया शब्दों का इस्तेमाल किया जिसे कोर्ट ने फटकारा। जज ने कहा कि रसूखदार होने का मतलब यह नहीं कि आप किसी का सम्मान कुचल दें। अतुल पंवार 'अतुल इंफ्रास्ट्रक्चर' का मालिक है और करोड़ों का कारोबार संभालता है।
हाई कोर्ट में कबूलनामा और फैमिली कोर्ट में पलटी मारना
अतुल का दोहरा चरित्र तब खुला जब पुराने केस की फाइलें दोबारा खोली गईं। समरीन ने पहले विजय नगर थाने में रेप (धारा 376) की एफआईआर दर्ज कराई थी। तब गिरफ्तारी से बचने के लिए अतुल ने हाई कोर्ट में जमानत की अर्जी दी थी। उस वक्त उसने लिखकर दिया था कि समरीन उसकी पत्नी है और बच्चे उसके हैं। इसी आधार पर उसे जेल जाने से राहत मिली थी, लेकिन अब वह मुकर गया। फैमिली कोर्ट ने उसके पुराने कबूलनामे को आधार बनाकर उसे पूरी तरह से जिम्मेदार ठहराया।
करोड़ों का साम्राज्य और बच्चों को सड़क पर छोड़ने की नीयत
कोर्ट ने जब अतुल की संपत्ति की जांच की, तो उसकी विलासिता सामने आ गई। अतुल का अपना सगा बेटा विदेश में रहकर महंगी पढ़ाई कर रहा है। इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) से पता चला कि उसका टर्नओवर करोड़ों रुपयों में है। बैंक ट्रांजेक्शन और सीए की रिपोर्ट ने साबित किया कि वह पैसे वाला आदमी है। उसके पास करोड़ों की जमीनें, म्यूचुअल फंड और फिक्स्ड डिपॉजिट मौजूद हैं। कोर्ट ने साफ कहा कि जो पिता लाखों कमाता है, वह अपने बच्चों को भूखा नहीं रख सकता।
इंदौर फैमिली कोर्ट की सख्त टिप्पणी और आदेश
कोर्ट ने इस मामले में बहुत ही मार्मिक और जरूरी टिप्पणी की है। जज एके गोयल ने कहा कि माता-पिता के रिश्ते भले ही अवैध हों, पर बच्चे लावारिस नहीं छोड़े जा सकते। कोर्ट ने आरोपी अतुल पंवार को हर महीने 1 लाख रुपए भरण-पोषण देने का आदेश दिया है। इसके अलावा 25 लाख रुपए का पिछला बकाया भी तुरंत चुकाने को कहा गया है। यह फैसला उन लोगों के लिए सबक है जो रसूख के दम पर किसी की जिंदगी से खेलते हैं। महिला ने न्याय पाने के लिए 12 साल तक लंबी और थका देने वाली कानूनी लड़ाई लड़ी।
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