डेली कॉलेज में क्या बैठेगा रिसीवर? हाईकोर्ट ने सुनवाई में कहा- लग रहा है चुनाव में किसी का फेवर हुआ
समझें क्या है पूरा मामला
- हाईकोर्ट ने डेली कॉलेज बोर्ड के नीतिगत फैसलों पर अंतरिम रोक लगाई।
- चुनाव प्रक्रिया और संविधान संशोधन पर कोर्ट ने सवाल उठाए।
- चुनाव अधिकारी के अधिकार और गाइडलाइन जारी करने पर विवाद है।
- रजिस्ट्रार फर्म एंड सोसायटी व साइबर एसपी से रिपोर्ट मांगी गई है।
- चुनाव परिणाम प्रभावित होने पर रिसीवर नियुक्त करने की स्थिति बन सकती है।
डेली कॉलेज में रिसीवर बैठेगा या नहीं, इस सवाल ने सबका ध्यान खींच लिया है। डेली कॉलेज के बोर्ड चुनाव और संविधान को लेकर चल रहे विवाद के बीच कानूनी पेंच फंस गया है।
हाईकोर्ट इंदौर ने शुक्रवार को एक घंटे की सुनवाई के बाद इसमें आदेश जारी करते हुए बोर्ड के नीतिगत फैसले लेने पर रोक लगा दी है। लेकिन इस सुनवाई के दौरान जस्टिस जय कुमार पिल्लई ने काफी तीखी टिप्पणी भी की है। उन्होंने अपनी आशंकाएं जाहिर की हैं। इससे अब पूरी चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। साथ ही बोर्ड के अस्तित्व पर भी संकट मंडरा रहा है।
हाईकोर्ट ने जो अंतरिम आदेश दिया, इसमें यह अहम बिंदु
हाईकोर्ट (Indore News) ने याचिकाकर्ता नरेंद्र सिंह बिड़वाल की याचिका पर जो आदेश दिया है, उसमें कई अहम बिंदु उठाए हैं।
- हाईकोर्ट ने नरेंद्र सिंह बिड़वाल की याचिका पर कई अहम बातें उठाईं।
- सवाल यह है कि क्या चुनाव अधिकारी को 21 अप्रैल के चुनाव शेड्यूल के बाद 24 अप्रैल को हुए संविधान संशोधन को मान्य करना चाहिए था और क्या उसके पास इसके अधिकार हैं।
- याचिकाकर्ता का आरोप है कि नामांकन और अन्य गाइडलाइन बाद में जारी की गई, जबकि नामांकन पहले ही लिए जा चुके थे। बाद में गाइडलाइन के आधार पर नामांकन रद्द कर दिए गए।
- हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार फ़र्म एंड सोसायटी से 15 दिन में रिपोर्ट मांगी है।
- साथ ही साइबर एसपी से भी रिपोर्ट मांगी कि गाइडलाइन बाद में वेबसाइट पर अपलोड हुई या नहीं।
शिकायत के अन्य बिंदुओं की भी जांच कर सीलबंद लिफाफे में जानकारी देने को कहा गया। - विवादित मामलों को देखते हुए हाईकोर्ट ने चुनाव अधिकारी का 3 मई का आदेश रद्द कर दिया।
- इसके तहत नरेंद्र सिंह और अनिरुद्ध के फाउंडर कैटेगरी फॉर्म खारिज किए गए।
- इसके कारण विक्रम पंवार और प्रियवत खिलचीपुर निर्विरोध चुने गए।
क्या इंदौर का डेली कॉलेज बोर्ड भंग करके रिसीवर नियुक्त होगा
सुनवाई के दौरान जस्टिस ने याचिकाकर्ता के वरिष्ठ वकील वीके जैन और पियूष पाराशर से पूछा कि क्या ऐसे प्रावधान हैं कि डेली कॉलेज में रिसीवर नियुक्त किया जा सकता है। यह पूछने की अहम वजह है कि यदि फॉर्म रिजेक्ट होना, बाद में गाइडलाइन जारी होना और संविधान संशोधन बाद में लागू करना, यह सभी गलत पाया जाता है तो फिर ऐसी स्थिति में चुनाव परिणाम ही खतरे में आ जाएगा।
खासकर प्रियवत खिलचीपुर और विक्रम पंवार की जीत पर सबसे बड़ा सवाल होगा। क्योंकि यह फिर निर्विरोध मान्य नहीं होंगे। ऐसी स्थिति में बोर्ड के कामकाज को संभालने के लिए विकल्प के तौर पर रिसीवर नियुक्त करना पड़ेगा।
चुनाव में किसी के फेवर के लिए यह सब हुआ- बेंच
बेंच ने इस सुनवाई के दौरान साफ तौर पर कहा कि चुनाव से ऐसा लग रहा है कि आपने (डेली कॉलेज प्रबंधन विवाद) किसी के फ़ेवर के लिए यह सब किया है। आधार कार्ड में सरनेम नहीं होने का मामला तो कई लोगों के साथ होता है। इस आधार पर फॉर्म रिजेक्ट हुआ है। फिर एक जगह बेंच ने कहा कि कुछ तो गलत है। इसकी जांच रजिस्ट्रार से होना चाहिए। एसपी को भी जांच के लिए कहा है। अभी अंतरिम राहत दी है, मेरिट पर अंतिम फैसला नहीं लिया है, पहले रिपोर्ट आने दीजिए। यह भी बेंच ने कहा कि आप कुछ भी कानून के परे जाकर नहीं कर सकते हैं।
मेरे फैसले के खिलाफ अपील कर सकते हैं- बेंच
जब इसमें प्रतिवादी डेली कॉलेज प्रबंधन (Daly College Indore) और विक्रम पंवार की ओर से अधिवक्ता विजय आसुदानी और शांतनु शर्मा ने दलील दी। वहीं बेंच ने कहा कि आप फैसले के खिलाफ रिट अपील दायर कर सकते हैं। इनका मुख्य तर्क याचिका की मेंटेनेबिलिटी पर था। डेली कॉलेज बोर्ड के नीतिगत फैसले लेने पर रोक के विरोध में थे। इस पर जस्टिस ने कहा कि वे अपील में जा सकते हैं। स्कूल अभी खुला नहीं है और रूटीन काम करने से नहीं रोक रहे हैं। कोई ब्लंडर नहीं हो रहा है।
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