इंदौर डेली कॉलेज चुनाव 30 और 90 दिन के नोटिफिकेशन में उलझा, चुनाव अधिकारी ही करेंगे तय
5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला...
- डेली कॉलेज चुनाव का शेड्यूल जारी, लेकिन नियमों पर विवाद।
- दो संविधान में चुनाव 30 दिन या 90 दिन नोटिफिकेशन से विवाद।
- नया संविधान अभी मंजूर नहीं, पुराने से चुनाव की बात।
- ओडीए के सदस्यों ने प्रक्रिया पर कई आपत्तियां उठाईं।
- अंतिम फैसला अब चुनाव अधिकारी करेंगे।
इंदौर डेली कॉलेज में पहले चुनाव नहीं होने को लेकर विवाद था और अब चुनाव नोटिफिकेशन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मुख्य चुनाव अधिकारी हाईकोर्ट के रिटायर जस्टिस सुशील गुप्ता ने शेड्यूल जारी कर दिया है। चुनाव वोटिंग और रिजल्ट 21 मई को है। लेकिन अभी भी इस बात पर असमंजस है कि चुनाव नए संविधान से होगा या पुराने संविधान से।
हालांकि, फर्म एंड सोसायटी असिस्टेंट रजिस्ट्रार साफ कह चुके हैं कि नया संविधान अभी स्वीकृत नहीं किया है। वहीं जानकारों का साफ कहना है कि शेड्यूल जारी होने के बाद नए संविधान को लागू करना संभव ही नहीं है। लेकिन इस प्रक्रिया पर ओल्ड डेलियंस एसोसिएशन (ओडीए) के गुट ने विरोध दर्ज कराया है।
इन बातों को लेकर लगाई गई हैं आपत्तियां...
राजेश अग्रवाल, संदीप पारिख, डॉ. सुमित शुक्ला, जयेश पटेल, देवाशीष मजूमदार, पंकज गोयल, मधुकांत गर्ग, कमलेश कासलीवाल, नीरज देसाई आदि इसे लेकर विरोध दर्ज जता रहे हैं।
- इनका कहना है कि चुनाव नोटिफिकेशन में यह साफ नहीं है कि किस संविधान के तहत चुनाव हो रहा है।
- यदि पुराने संविधान से हो रहा है तो इसके तहत चुनाव नोटिफिकेशन 90 दिन पहले होता है, लेकिन यह नोटिफिकेशन 30 दिन पहले हुआ है, जो नए संविधान में प्रस्तावित है।
- वहीं यह साफ नहीं हुआ है कि ओडीए से सदस्य बोर्ड में किस तरह चुने जाएंगे। पुराने संविधान में ओडीए दो सदस्यों को चुनकर बोर्ड में भेजता है। नए संविधान में इसमें प्रेसीडेंट और सचिव को प्राथमिकता से लेने यानी निर्वाचन की जगह चयनित करने की प्रक्रिया रखी गई है। साथ ही एक और सदस्य को भी चयन करने का प्रावधान जोड़ा गया है।
- साथ ही जारी किए गए चुनाव शेड्यूल में जो बाहर के सदस्यों को डाक मतपत्र जाना है, उसके लिए कम समय है। यह फॉर्म 4 से 19 मई को जाएंगे और 20 मई को वापसी का समय रखा है, जबकि 21 को वोटिंग और रिजल्ट है।
- वहीं इसके बीते चुनाव के समय इसमें डिस्पैच और वापसी के समय में 45 दिन का समय दिया गया था।
यह भी आपत्ति ली गई है कि पहले चुनाव प्रक्रिया में नामांकन फॉर्म की स्क्रूटनी होती थी और इसके बाद नाम वापसी होती थी, लेकिन इस बार पहले नाम वापसी है और फिर स्क्रूटनी है।
नए संविधान से 10 और पुराने से 9 आएंगे बोर्ड में
नया संविधान जो बोर्ड ने मंजूर कर फर्म एंड सोसायटी के पास स्वीकृति के लिए भेजा है, इसके तहत बोर्ड में 10 सदस्य हो जाएंगे। इसमें पुराने दानदाता कैटेगरी से दो, नए दानदाता कैटेगरी से 1 निर्वाचित होंगे। साथ ही ओडीए से दो प्राथमिकता से प्रेसीडेंट और सचिव चयनित होंगे और एक प्रतिष्ठित छात्र चयनित होगा।
दो सदस्य पालक संघ से आएंगे और दो शासन से मनोनीत होंगे। वहीं अभी के संविधान से 9 सदस्य होते हैं। इसमें पालक संघ से दो आते हैं, दो शासन से मनोनीत होते हैं। पुराने दानदाता कैटेगरी से दो, नए दानदाता से 1 और ओडीए से दो सीधे निर्वाचित होकर आते हैं।
28 से पहले स्थिति होगी साफ
इस मामले में चुनाव अधिकारी को भी 28 अप्रैल से पहले स्थिति साफ करना होगी। कारण है कि 28 और 29 अप्रैल को नामाकंन हैं। नए संविधान में ओडीओ के चयन की प्रक्रिया ही नहीं है, ऐसे में चुनाव अधिकारी इनके लिए नामांकन फार्म देंगे या नहीं, यह साफ करना होगा।
वहीं वर्तमान संविधान से होते हैं तो फिर ओडीए से दो सदस्य का निर्वाचन होना है। अभी मतदाता सूची पर दावे आपत्तियां बुलाई गई है और इन पर 27 अप्रैल को फैसला होगा।
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