इंदौर में बालिका हॉस्टल वार्डन ने सब्जी विक्रेता को ही ठेकेदार, मजदूर बताकर भुगतान किया, कोविड में दूध, कॉस्मेटिक खरीदी
मामले की शिकायत भोपाल लोकायुक्त से की गई थी। इसके बाद कलेक्टर को जांच कराने के निर्देश मिले हैं। कलेक्टर शिवम वर्मा ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाई है। कमेटी की जांच में कई गड़बड़ियां सामने आई हैं।
जांच में पता चला कि सब्जी विक्रेता मेहताब को कई बार पैसे दिए गए। कभी उसे ठेकेदार बताया गया तो कभी मजदूर। हॉस्टल के टेलीफोन बिल भी उसी से भरवाए गए। इसके बदले उसे नकद पैसे दिए गए।
मामले में लाखों रुपए की गड़बड़ी के आरोप हैं। अब जिला प्रशासन 3 नवंबर को लोकायुक्त को जांच रिपोर्ट सौंपेगा।
इनके द्वारा की गई जांच
कलेक्टर के निर्देश पर राऊ एसडीएम लोकेंद्र सरल ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाई थी। इस कमेटी में सहायक जिला कोषालय अधिकारी सचिन शर्मा, जिला परियोजना समन्वयक अजय मिश्रा और तहसीलदार सत्येंद्र सिंह गुर्जर शामिल थे। तीनों अधिकारियों ने मामले की जांच की और पूरी रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी है।
ऐसे-ऐसे किया वार्डन ने खेल
1. एक कर्मचारी को दो जिम्मेदारियां, दोनों का भुगतान
वार्डन ने अजय जाटया नाम के कर्मचारी को दो जिम्मेदारियां दी थीं। उन्हें लेखापाल के साथ चौकीदार का काम भी सौंपा गया। इसके बदले उन्हें दोनों पदों का भुगतान किया गया। जांच कमेटी ने इसे नियमों के खिलाफ पाया। वार्डन ने सफाई दी कि कोविड के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों को बताकर ऐसा किया गया था।
2. सब्जी विक्रेता को मजदूर बताकर दिए पैसे
कोविड के दौरान जब देश में लॉकडाउन था, तब हॉस्टल के लिए बाथरूम का सामान खरीदा गया। इसका भुगतान सब्जी विक्रेता मेहताब को किया गया। हॉस्टल में पानी की मोटर भी खरीदी गई। इसे लगाने के लिए मेहताब को ही मजदूर बताया गया। इसके बदले उसे मजदूरी के पैसे भी दिए गए।
3. सब्जी विक्रेता से भरवाए बिजली और टेलीफोन बिल
हॉस्टल के बिजली और टेलीफोन बिल भी मेहताब से भरवाए गए। वार्डन ने बताया कि उन्हें ऑनलाइन भुगतान करना नहीं आता था। इसलिए उन्होंने मेहताब से बिल जमा करवाए। इसके बदले उसे पैसे दे दिए गए।
4. सादे कागज पर सब्जियों के बिल बनाए
जांच में सब्जियों की खरीदी को लेकर भी गड़बड़ी सामने आई। सब्जी खरीदने के बिल सादे कागज पर बनाए गए थे। अलग-अलग तारीख डालकर खरीदी दिखाई गई। इसके लिए करीब 25 हजार रुपए का भुगतान हुआ। जांच में एक जैसे बिल बार-बार लगाए जाने की बात भी सामने आई।
5. हॉस्टल बंद था, फिर भी दूध और कॉस्मेटिक सामान खरीदा
कोविड के दौरान हॉस्टल बंद था। वहां छात्राएं भी नहीं रह रही थीं। इसके बावजूद 12 हजार रुपए के दूध की खरीदी दिखाई गई। तेल, साबुन और कॉस्मेटिक सामान भी खरीदा गया। इस पर वार्डन ने बताया कि हॉस्टल में काम चल रहा था। वहां मजदूर आते थे। इसलिए उनके लिए दूध और दूसरी सामग्री खरीदी गई थी।
6. स्वेटर और ड्रेस की खरीदी में भी गड़बड़ी
हॉस्टल में छात्राओं के लिए स्वेटर और ड्रेस खरीदी दिखाई गई। इसके लिए 50 हजार रुपए का भुगतान किया गया। हालांकि इस खरीदी का जीएसटी बिल नहीं बनाया गया। इसी तरह जूतों की खरीदी में भी गड़बड़ी सामने आई। जांच कमेटी ने इससे जुड़े बिल और वाउचर नियमों के खिलाफ पाए।
जांच रिपोर्ट के बाद वार्डन को पद से हटाया
जांच रिपोर्ट आने के बाद मंजुला जरिया को हॉस्टल वार्डन के पद से हटा दिया गया है। हालांकि उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई अभी बाकी है। लोकायुक्त की ओर से भी आगे की कार्रवाई होना बाकी है।
इस मामले में जिला प्रशासन को 3 नवंबर को भोपाल में लोकायुक्त के सामने जवाब देना होगा। प्रशासन को पूरी जांच रिपोर्ट पेश करनी होगी। साथ ही यह भी बताना होगा कि अब तक वार्डन के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है।