कारोबारी ज्यादा, राजस्व ज्यादा, फिर इंदौर में GST ट्रिब्यूनल क्यों नहीं- कोर्ट

Pawan Modiya | Jul 21, 2026, 18:15 IST
इंदौर में जीएसटी ट्रिब्यूनल
इंदौर में जीएसटी ट्रिब्यूनल बेंच रद्द करने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। कोर्ट ने केंद्र सरकार, जीएसटी काउंसिल और राज्य के वाणिज्यिक कर विभाग को नोटिस भेजा है। चार हफ्ते में जवाब मांगा गया है, जानिए पूरा मामला।

समझें क्या है पूरा मामला

  • इंदौर में जीएसटी ट्रिब्यूनल बेंच बनाने का फैसला सरकार ने बदल दिया था।
  • इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी।
  • हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार कर केंद्र और राज्य को नोटिस भेजा है।
  • चार हफ्ते में सभी पक्षों से जवाब मांगा गया है।
  • टैक्स प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन ने कोर्ट में कई अहम तर्क रखे हैं।

इंदौर में जीएसटी ट्रिब्यूनल बेंच का मामला एक बार फिर चर्चा में है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने इस मामले में बड़ा कदम उठाया है। कोर्ट ने एक याचिका को स्वीकार किया है। यह याचिका सरकार के एक फैसले के खिलाफ दायर हुई थी। सरकार ने इंदौर में जीएसटी ट्रिब्यूनल बेंच बनाने का फैसला बदल दिया था। इसी फैसले को अब कोर्ट में चुनौती दी गई है।



कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस भेजा है। साथ ही जीएसटी काउंसिल को भी नोटिस दिया गया है। मध्य प्रदेश के वाणिज्यिक कर विभाग को भी नोटिस मिला है। सभी पक्षों से चार हफ्ते में जवाब मांगा गया है। यह मामला व्यापारियों और टैक्स सलाहकारों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।



क्या है पूरा विवाद

साल 2019 में राज्य सरकार ने एक प्रस्ताव तैयार किया था। इसमें इंदौर में जीएसटी अपीलेट ट्रिब्यूनल बनाने की बात कही गई थी। लेकिन साल 2021 में यह प्रस्ताव बदल दिया गया। नए प्रस्ताव में भोपाल को तरजीह दे दी गई। इसी बदलाव से इंदौर के कारोबारी और वकील नाराज हैं। उनका कहना है कि यह फैसला गलत तरीके से लिया गया। इसी वजह से टैक्स प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन ने कोर्ट का रुख किया।



सुनवाई में क्या हुआ

हाल ही में हुई सुनवाई में कोर्ट ने कई अहम सवाल पूछे। कोर्ट ने जानना चाहा कि ट्रिब्यूनल का ज्यादातर काम कहां से जुड़ा है। याचिकाकर्ता के वकील ने साफ जवाब दिया। उन्होंने बताया कि ज्यादातर मामले इंदौर से ही जुड़े रहेंगे। इसके पीछे सरकार का पुराना फैसला भी आधार बना। सरकार ने पहले ही इंदौर को इस काम के लिए चुना था। कोर्ट ने इन दलीलों को गंभीरता से सुना। इसके बाद ही नोटिस जारी करने का फैसला हुआ।



टैक्स एसोसिएशन के ठोस तर्क

टैक्स प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन ने कोर्ट में कई ठोस तर्क रखे। एसोसिएशन ने बताया कि इंदौर में जीएसटी पंजीकृत कारोबारियों की संख्या सबसे ज्यादा है। शहर से सरकार को भारी राजस्व भी मिलता है। एसोसिएशन के मुताबिक यह आंकड़े इंदौर के दावे को मजबूत बनाते हैं। उनका कहना है कि इतने बड़े कारोबारी आधार को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।



एसोसिएशन ने अपने तर्क में दूसरे राज्यों का उदाहरण भी दिया। छत्तीसगढ़ जैसे छोटे राज्य में भी जीएसटी अपीलेट ट्रिब्यूनल की दो बेंच हैं। आंध्र प्रदेश, केरल, राजस्थान और गुजरात में भी कई बेंच काम कर रही हैं। लेकिन मध्य प्रदेश में सिर्फ एक ही बेंच बनाई गई है। एसोसिएशन का कहना है कि इंदौर का सही दावा नजरअंदाज हुआ है। यह तुलना कोर्ट के सामने अहम मुद्दा बनी।



इंदौर के लिए अलग बेंच क्यों जरूरी

एसोसिएशन ने यह भी बताया कि इंदौर में पहले से कई अहम अदालतें मौजूद हैं। यहां इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल पहले से काम कर रहा है। हाईकोर्ट की बेंच भी इंदौर में मौजूद है। ऐसे में अगर जीएसटी ट्रिब्यूनल बेंच नहीं बनती तो दिक्कत बढ़ेगी। कारोबारियों को अपने मामलों के लिए भोपाल जाना पड़ेगा। इससे टैक्स विवादों के निपटारे में देरी होगी। छोटे कारोबारियों के लिए यह प्रक्रिया और मुश्किल हो जाएगी। समय और पैसा दोनों की बर्बादी बढ़ जाएगी।



कोर्ट का रुख अहम क्यों

कोर्ट का यह कदम व्यापारियों के लिए राहत भरा माना जा रहा है। नोटिस जारी होने से यह साफ है। कोर्ट मामले को गंभीरता से देख रहा है। अब सरकार और जीएसटी काउंसिल को अपना पक्ष रखना होगा। चार हफ्ते के भीतर जवाब देना अनिवार्य होगा। इसके बाद ही अगली सुनवाई की तारीख तय होगी। कारोबारी वर्ग को अब कोर्ट के अगले फैसले का इंतजार है।



आगे क्या हो सकता है

अगर कोर्ट का फैसला इंदौर के पक्ष में आता है तो बड़ी राहत मिलेगी। इससे इंदौर के हजारों कारोबारियों को सीधा फायदा होगा। टैक्स से जुड़े मामलों का निपटारा भी तेजी से होगा। वहीं अगर सरकार अपने फैसले पर अड़ी रहती है तो दिक्कत बढ़ सकती है। ऐसे में मामला और लंबा खिंच सकता है। ऐसे में व्यापारी वर्ग एक बार फिर सड़कों पर उतर सकता है। फिलहाल सबकी नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हैं।



गौरतलब है कि जीएसटी अपीलेट ट्रिब्यूनल टैक्स विवादों के लिए दूसरा अपीलीय मंच है। अभी तक देश में यह ट्रिब्यूनल पूरी तरह काम शुरू नहीं कर पाया है। इस वजह से कारोबारियों को अक्सर हाईकोर्ट का रुख करना पड़ता है। इससे अदालतों पर भी अतिरिक्त बोझ बढ़ता जा रहा है। ऐसे में हर राज्य में पर्याप्त बेंच होना बेहद जरूरी माना जा रहा है। इंदौर एक बड़ा कारोबारी शहर है। यहां के लिए यह मांग लंबे समय से उठ रही है। अब देखना होगा कि कोर्ट का अंतिम फैसला किसके पक्ष में जाता है।



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