इंदौर हाईकोर्ट में उठी बात- ट्रैफिक पुलिस कोने में खड़े होकर बनाती हैं चालान, केवल VIP ड्यूटी करती है
Indore. इंदौर में सबसे गंभीर ट्रैफिक की समस्याओं को लेकर विविध जनहित याचिकाएं हैं। इस पर लगातार हाईकोर्ट मॉनिटरिंग कर रहा है। आखिरकार लगातार मॉनिटरिंग के चलते बीआरटीएस कॉरिडोर पूरी तरह से हट गया है और सभी बस स्टॉप हटा दिए गए हैं।
सोमवार को हुई सुनवाई में जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिल आलोक अवस्थी की बेंच को यह जानकारी अधिकारियों ने दी। सुनवाई में इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा, निगमायुक्त क्षितिज सिंघल, डीसीपी ट्रैफिक राजेश त्रिपाठी व अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
ट्रैफिक सिपाही कोने में खड़े होते हैं
वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया ने कहा कि ट्रैफिक को लेकर हाईकोर्ट के पुराने आदेशों का पालन नहीं किया जा रहा है। ट्रैफिक सिपाही चौराहों पर नहीं रहते हैं और कोने में खड़े होकर चालान बनाने में अधिक जोर होता है। अभी भी 24 घंटे ट्रैफिक सिग्नल्स चालू नहीं हैं।
हाईकोर्ट बेंच भी बोली- नहीं दिखते हैं सिपाही
इस पर हाईकोर्ट बेंच ने भी कहा कि वह यू टर्न लेकर हाईकोर्ट की ओर आते हैं तो ट्रैफिक सिपाही नहीं दिखते हैं। दो पहिया वाहन इधर-उधर से घुसते हैं और इससे एक्सीडेंट की आशंका बनी रहती है।
वीआईपी को नहीं है जीरो ट्रैफिक सुविधा
बागड़िया ने सवाल उठाया कि जब वीवीआईपी, वीआईपी मूवमेंट होता है तो ट्रैफिक रोक दिया जाता है। बाद में ट्रैफिक जवान वीवीआईपी निकलते ही गायब हो जाते हैं। इस पर हाईकोर्ट ने ट्रैफिक डीसीपी से पूछा कि किन लोगों को जीरो ट्रैफिक की सुविधा है। इस पर बताया गया कि ऐसा कोई नियम नहीं है। केवल सुरक्षा कारणों से ही ट्रैफिक ब्लिंक करने की सुविधा करते हैं, वह भी एक मिनट के लिए।
इंदौर में 237 ट्रैफिक बल कम है
वहीं इंदौर हाईकोर्टद्वारा नियुक्ति ट्रैफिक कमेटी के चेयरमैन व वरिष्ठ अधिवक्ता विनय चेलावत ने कहा कि इंदौर में अभी स्वीकृत ट्रैफिक पुलिस बल की तुलना में 237 का बल कम है। इस पर हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश शासन और डीजीपी को इस बल को पूरा करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।
ड्रिंक एंड ड्राइव चेकिंग जरूरी- कोर्ट
यह बात भी उठी कि रात नौ-दस बजे से ही चेकिंग शुरू हो जाती है, बैरिकेड लग जाते हैं इससे ट्रैफिक जाम होता है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि जिस तरह से ड्रिंक एंड़ ड्राइव हो रही है और एक्सीडेंट हो रहे हैं, यह चेकिंग भी जरूरी है।
सुनवाई में ये बातें भी उठीं
- वरिष्ठ अधिवक्ता बागड़िया ने मांग की है कि रोबोट चौराहे से रेडिसन चौराहा तक हालत खराब है। यहां मेट्रो का काम चल रहा है, लेकिन सर्विस रोड को ठीक नहीं किया गया है। इसे ठीक किया जाए।
- इन चौराहों पर 24 घंटे ट्रैफिक पुलिस को लगाया जाए
- विजनयगर थाने के सामने जब्त वाहन व अन्य वाहन के कारण ट्रैफिक समस्या आती है
- सत्यसांई चौराहा व अन्य जगह जो ओवरब्रिज बन रहे हैं, वहां रास्ता संकरा हो गया है। सर्विस रोड की बाधाएं हटाकर रोड चौड़ी की जाए।
- एमपीआरडीसी, आईडीए, निगम इन सभी को निर्देश दिए जाएं कि ब्रिज बनने के साथ ही सर्विस रोड को ठीक करना होता है और बनाना होता है। लेकिन ऐसा नहीं होने से ट्रैफिक समस्या होती है, इसे सुधारा जाए।
- हाईकोर्ट की ट्रैफिक कमेटी के साथ अधिकारियों की बैठक हो और इसमें सभी से सुझाव लिए जाएं। एलिवेटेड कॉरिडोर को लेकर अतुल सेठ ने बात रखी और हाईकोर्ट ने कहा कि वह अपने अहम सुझाव कमेटी को उपलब्ध कराएं।
मेरे साथ कार में घूमें ट्रैफिक डीसीपी
ट्रैफिक डीसीपी ने दावा किया है कि चाैराहे चिह्नित कर ट्रैफिक बल लगाया गया है। यह पीक आवर्स में मुख्य तौर पर रहते हैं। इस पर बागडिया ने कहा कि आप मेरे साथ बिना किसी को बताए कार से शहर घूमें, आपको असलियत पता चल जाएगी, पुलिस रहती ही नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा कि जो निर्देश दिए गए हैं इस पर काम हो और अगली सुनवाई में कमेटी रिपोर्ट देगी।
बाधक धार्मिक स्थल पर भी चिह्नित करें
हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि वह ट्रैफिक में बाधक बने अवैध धार्मिक स्थलों को चिह्नित करें। इनकी सूची अगली सुनवाई में पेश की जाए। साथ ही इन्हें हटाने की नियमानुसार कार्रवाई हो।
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