इंदौर हाईकोर्ट में गेहूं की खरीदी में मिसमैनेजमेंट पर लगी जनहित याचिका, सभी को नोटिस
News in Short
- गेहूं खरीदी को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका।
- खरीदी में अव्यवस्था और देरी के आरोप।
- 55 फीसदी किसान आबादी का मुद्दा उठाया गया।
- कई विभागों और एजेंसियों को पक्षकार बनाया गया।
- कोर्ट ने सभी को नोटिस देकर जवाब मांगा।
News in Detail
इंदौर हाईकोर्ट में अब गेहूं की खरीदी को लेकर जनहित याचिका दायर हुई है। इसमें मप्र की 55 फीसदी किसान आबादी का मुद्दा उठाते हुए इसे अहम बताया गया है। हालांकि, शासन पक्ष ने इस याचिका पर सवाल उठाए हैं। हाईकोर्ट ने इसमें सभी पक्षकारों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है।
इन सभी को बनाया तीसरा पक्षकार
गोपाल सिंह सरदारपुर तहसील जिला धार ने याचिका लगाई है। वहीं, इसमें मप्र शासन, कृषि कल्याण विभाग मप्र, राजस्व विभाग मप्र, मप्र स्टेट एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड डायरेक्टर, मप्र वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक कॉरपोरेशन एमडी, कलेक्टर धार, फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया एमडी नई दिल्ली को पक्षकार बनाया गया है।
याचिका में यह बात उठाई गई
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता हर्षवर्धन सिंह राठौर ने तर्क रखे। इसमें कहा गया कि मप्र की 55 फीसदी आबादी किसान है। मध्यप्रदेश सरकार किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं व अन्य फसलों की खरीदी समय पर करने में विफल रही है। मिसमैनेजमेंट के चलते खरीदी पर अनिश्चितता बनी हुई है।
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