इंदौर हाईकोर्ट ने दिया महिला अभ्यर्थियों को बड़ा तोहफा, आरक्षक भर्ती में राहत

Sanjay Sharma | Apr 08, 2026, 24:03 IST
constable recruitment
BHOPAL. पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा की अभ्यर्थी प्रतिभा शर्मा ने इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने दूसरे चरण से वंचित किए जाने को चुनौती दी। हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने इसे गलत माना।

News in Short

  • प्रतिभा शर्मा को शारीरिक परीक्षा में भाग लेने की अनुमति दी गई।
  • कोर्ट ने याचिका के अंतिम परिणाम तक कोई अधिकार का दावा न करने को कहा।
  • गजट अधिसूचना में महिला नियुक्ति के लिए 35 प्रतिशत आरक्षण दिया गया।
  • सीधी भर्ती के चयन में हॉरीजोन्टल आरक्षण को लागू किया गया।
  • उत्तरदाताओं को 15 दिनों के भीतर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया गया।

News in Detail

मध्यप्रदेश की आरक्षक भर्ती परीक्षा (mp constable recruitment ) का आयोजन किया जा रहा है। पुलिस मुख्यालय के लिए इस भर्ती के नोटिफिकेशन में मध्य प्रदेश सिविल सर्विसेज नियम के तहत महिलाओं को 35 फीसदी पदों पर आरक्षण दिया गया है।



आरक्षक भर्ती दो चरणों में हो रही है। ईएसबी द्वारा जारी इस भर्ती के लिए जारी रूलबुक में पहले चरण के रिटर्न टेस्ट में हॉरिजोन्टल आरक्षण के लिए अलग कटऑफ जारी नहीं करने का उल्लेख है।



पहले चरण की परीक्षा में महिला अभ्यर्थियों को मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 35 फीसदी पदों पर आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। जबकि पहले चरण की परीक्षा में चयन होने पर ही दूसरे चरण की परीक्षा में अभ्यर्थी शामिल हो सकते हैं। इसी विरोधाभास के चलते मामला हाईकोर्ट बेंच पहुंचा था।





आरक्षण नियम और रूलबुक में विरोधाभास

हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में प्रतिभा शर्मा के अलावा दो अन्य महिला अभ्यर्थियों ने याचिका पेश की थी। हाईकोर्ट जस्टिस जय कुमार पिल्लई के सामने 7 अप्रैल को याचिका पर सुनवाई हुई।



एडवोकेट दिनेश सिंह चौहान के याचिका के समर्थन में महत्वपूर्ण तथ्य पेश किए। उन्होंने महिलाओं को दिए गए आरक्षण और ईएसबी द्वारा आरक्षक भर्ती की रूलबुक का उल्लेख किया। उन्होंने कहा पहले चरण में हॉरीजोन्टल आरक्षण के आधार पर कटऑफ जारी नहीं होंगे। वहीं दूसरे चरण में वे ही शामिल हो पाएंगे जो पहले चरण में चुने जाएंगे।



पहले चरण में बाहर तो आरक्षण कैसा

एडवोकेट दिनेश सिंह चौहान ने रूल बुक के अन्य विरोधाभास भी गिनाए। उन्होंने बताया कि रूल बुक के आधार पर दूसरे चरण में शामिल होने के लिए पहला चरण पास करना जरूरी है।



पहले चरण में महिलाओं को पुरुषों के साथ प्रतिस्पर्धा करनी होगी। पहले चरण में उन्हें आरक्षण नहीं मिलेगा। इस वजह से आधे से ज्यादा महिला अभ्यर्थी दूसरे चरण में पहुंच ही नहीं पाएंगी। एक ही भर्ती परीक्षा के दो चरणों में आरक्षण की स्थिति में भिन्नता है।



पहले चरण के आधार पर रोकना गलत

सरकार और भर्ती से जुड़े पक्षों की ओर से डिप्टी एजी सुदीप भार्गव और ऋषभ सिंह चौहान ने याचिकाकर्ता पक्ष के तथ्यों को नकारने के लिए दलीलें पेश कीं।



सुनवाई के बाद हाईकोर्ट बेंच ने अभ्यर्थी प्रतिभा शर्मा को दूसरे चरण की शारीरिक दक्षता परीक्षा से रोकना गलत माना। प्रावधानों को देखते हुए साफ है कि प्रतिभा शर्मा को गलत तरीके से आगे भाग लेने से रोका गया है। हाईकोर्ट ने प्रतिभा को दूसरे चरण की परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने के निर्देश दिए हैं।



15 दिन में जवाब पेश करने के निर्देश

इंदौर हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान भर्ती प्रक्रिया के संबंध में 15 दिन में जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। वहीं याचिकाकर्ता पक्ष के एडवोकेट को भी याचिका और उससे जुड़े दस्तावेज सरकारी वकील को उपलब्ध कराने निर्देशित किया है।



वहीं रिटर्न टेस्ट में चयन से वंचित प्रतिभा शर्मा और अन्य को हाईकोर्ट से अंतरित राहत मिली है। अब वे दूसरे चरण में होने वाली शारीरिक दक्षता परीक्षा में शामिल हो पाएंगी। यानी उन्हें भर्ती में चयन के लिए एक और अवसर मिल गया है।



आरक्षण की अनदेखी

एडवोकेट दिनेश सिंह चौहान के अनुसार आरक्षक भर्ती में महिलाओं को अनफेयर कॉम्पटीशन में रखा गया। दो चरणों में अलग प्रावधान किए गए। पहले चरण में महिलाओं को पुरुषों के साथ प्रतिस्पर्धा करनी पड़ी।



अलग से कटऑफ जारी नहीं किए गए। रिटर्न टेस्ट में अनारक्षित का कटऑफ 80 जबकि अन्य सभी का कटऑफ 75 तक पहुंचा।



अलग कटऑफ जारी करने से महिलाओं के सामने प्रतिस्पर्धा कम होती और उन्हें चयन के ज्यादा अवसर मिलते। हाईकोर्ट ने प्रतिभा शर्मा को इस मामले में बड़ी राहत दी है। इससे साफ हो गया है पुलिस भर्ती की रूलबुक में त्रुटि हुई है।



पीछे हटीं दो याचिकाकर्ता

आरक्षक भर्ती में महिला आरक्षण के प्रावधानों की अनदेखी को लेकर हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में प्रतिभा शर्मा के अलावा हिना कौसर कुरैशी और चेतना बघेल भी याचिकाकर्ता थीं। पहले चरण की परीक्षा में हिना और चेतना का चयन दूसरे चरण के लिए हो गया है।



इस स्थिति को देखते हुए दोनों याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में विचाराधीन याचिका से खुद को अलग कर लिया है। एडवोकेट दिनेश सिंह चौहान के अनुसार आरक्षक भर्ती में महिला अभ्यर्थियों को नियमानुसार 35 फीसदी आरक्षण नहीं मिला है। पहले चरण में 40 से 50 फीसदी या अधिक अंक हासिल करने वाली अनारक्षित और अन्य कैटेगरी की महिला अभ्यर्थियों के लिए यह आदेश राहत दे सकता है।



खुली स्पर्धा से पिछड़ी महिला अभ्यर्थी

एडवोकेट दिनेश सिंह चौहान का कहना है पुरुषों के साथ महिलाओं को प्रतिस्पर्धा में रखकर प्रावधानों की अनदेखी की गई। आरक्षक भर्ती पहले चरण के रिटर्न टेस्ट में अनारक्षित वर्ग का परिणाम का कटऑफ करीब 80 फीसदी तक गया है। ओबीसी व अन्य वर्गों का कटऑफ करीब 75 फीसदी रहा है।



इसी कटऑफ की वजह से महिलाएं पिछड़ गईं। जबकि महिलाओं को हर कैटेगरी में 35 फीसदी आरक्षण दिया जाना था। खुली स्पर्धा के कारण महिला अभ्यर्थियों को आरक्षण का पूरी तरह लाभ नहीं मिला था।



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