आईएएस वंदना वैद्य के फार्महाउस का नाम FIR में मत लिखना, उस रात TI पर था उच्च स्तर से दबाव और धमकी
INDORE. इंदौर में मध्यप्रदेश वित्त निगम की एमडी व 2009 बैच की आईएएस वंदना वैद्य के फार्महाउस पर 10-11 मार्च की दरमियानी रात जुआकांड पकड़ा गया था।
इसके बाद 11 मार्च को टीआई मानपुर लोकेंद्र सिंह हिहोरे के साथ ही एसआई मिथुन ओसारी और एएसआई रेशम गिरवाल को एसपी यांगचेन डोलकर भूटिया ने सस्पेंड कर दिया था।
वहीं, अब सवाल उठ रहा है कि क्या इन अधिकारियों को आईएएस का नाम नहीं छिपाने के कारण उच्च अधिकारियों ने खुन्नस में हटाया था?क्या उस रात इनके द्वारा टीआई पर दबाव डाला गया था?
ये सारे आरोप टीआई हिहोरे ने हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका में लगाए हैं। इससे पूरी कार्रवाई पर सवाल खड़े हो गए हैं।
टीआई ने कहा- मैंने घुटने नहीं टेके, धमकियां मिली थीं
द सूत्र के पास इस मामले के पूरे लिखित दस्तावेज मौजूद हैं। इसमें टीआई हिहोरे ने अपने सस्पेंशन ऑर्डर को चुनौती दी है। इसमें गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि रात (10-11 मार्च) कोमानपुर में कोठी निवास फार्महाउस पर जुआ पकड़ा था। तब मुझे नहीं पता था कि यह आईएएस (वंदना वैद्य) का फार्महाउस है।
वहीं, इसके बाद ही मुझे मैसेज और फोन आने लगे। धमकी दी गई और दबाव डाला गया कि एफआईआर में जुआ आईएएस के फार्महाउस में पकड़े जाने की बात नहीं लिखनी है।
दबाव बनाया गया कि जुआ इस फार्महाउस की जगह किसी अन्य स्थान पर पकड़े जाने की बात एफआईआर में लिख दी जाए।
इसके बावजूद मैंने इस मामले में घुटने नहीं टेके और सुबह थाना पहुंचकर एफआईआर में स्थान,पकड़े गए आरोपी और सभी तथ्य सही-सही लिख दिए थे।
इसी बात से अधिकारी मुझसे चिढ़ गए
टीआई ने याचिका में लिखा है कि इसी कारण से अधिकारी मुझसे चिढ़ गए कि आईएएस का नाम क्यों नहीं छिपाया गया?
इसके बाद एसपी ने उसी दिन 11 मार्च को मुझे सस्पेंड कर दिया और कहा गया कि मैंने अपराध नियंत्रण के लिए काम नहीं किया।
यह मेरे ऊपर केवल काउंटर अटैक था क्योंकि मैंने आईएएस के फार्महाउस का नाम नहीं छिपाया था। यह प्रशासनिक शक्तियों का दुरुपयोग था।
आईएएस के प्रभाव में अधिकारियों ने की कार्रवाई
टीआई यहीं नहीं रुके,उन्होंने खुलकर लिखा कि आईएएस के प्रभाव में आकर प्रतिवादियों (उच्च पुलिस अधिकारियों) द्वारा मेरे खिलाफ यह कार्रवाई की गई है।इसके बाद भी उनका मन नहीं भरा और एडिशनल एसपी को जांच सौंप दी।
यह भाई-भतीजावाद का क्लासिक उदाहरण है। मुझे केवल एफआईआर में उनके हिसाब से बदलाव नहीं करने के कारण इस कार्रवाई का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
एएसआई तो छुट्टी पर थीं
याचिका में यह भी कहा गया कि इस कार्रवाई में अधिकारियों ने विवेक का उपयोग नहीं किया है। मेरे साथ उस दिन रात में गश्त और कार्रवाई पर एसआई मिथुन थे,उन्हें भी और साथ ही एएसआई रेशम गिरवाल को भी उस दिन सस्पेंड किया गया। जबकि गिरवाल तो 21 फरवरी से ही बीमारी के कारण छुट्टी पर हैं और वह ड्यूटी पर ही नहीं थीं।
टीआई ने इन सभी को बनाया है पक्षकार
टीआई ने इस याचिका में प्रमुख सचिव (गृह विभाग),डीजीपी,आईजी (ग्रामीण),एसपी (ग्रामीण),एडिशनल एसपी (महू) और एसडीओपी (महू) को पक्षकार बनाया है।
इसमें पूरी कार्रवाई को दबाव में नहीं आने के चलते उच्च अधिकारियों द्वारा आईएएस के प्रभाव में किया गया काउंटर अटैक बताया है। हाईकोर्ट ने इस मामले में सभी पक्षकारों से जवाब मांगा है।
सिमरोल में भी जुआ पकड़ा, फिर कार्रवाई क्यों नहीं?
टीआई ने इस याचिका में 15 मार्च को सिमरोल में भी हुई जुआ पकड़ने की कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े किए। कहा गया कि जब इसी तरह की कार्रवाई सिमरोल में पुलिस ने की और जुआ पकड़ा, तो फिर वहां के टीआई पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
यह भी उसी तरह का मामला था जैसा कि मैंने कार्रवाई की थी। साथ ही टीआई ने कहा कि मुझे यूएस (US) की एफबीआई (FBI) ने भी प्रशंसा पत्र दिया है। मेरे करियर में मुझे 300 से ज्यादा प्रमाणपत्र मिल चुके हैं।
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