MR-10, फ्लाईओवर वाली कुमेड़ी में 500 करोड़ की जमीन पर IDA को झटका

Sanjay Gupta | Sept 26, 2026, 12:00 IST
स्कीम 139 में IDA को 500 करोड़ का झटका
हाईकोर्ट इंदौर ने आईडीए (इंदौर विकास प्राधिकरण) को जोरदार झटका दिया है। सुपर कॉरिडोर को जोड़ने वाली एमआर 10, फ्लाईओवर वाली 6 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण 24 साल बाद गलत ठहराया गया है।

कुमेड़ी में स्कीम 139 की 500 करोड़ से ज्यादा कीमत की 6 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन को लेकर आईडीए को झटका लगा है। इंदौर हाईकोर्ट ने घनश्याम कोठारी, पुष्पेंद्र कोठारी व अन्य की याचिकाओं पर यह फैसला दिया है। इसमें साल 2002 में की गई जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया को गलत बताया है। इसमें याचिकाकर्ता की आपत्तियां फिर सुनकर उचित मुआवजा देने की बात कही है।



इस जमीन पर बना है एमआर 10

याचिकाकर्ताओं की जमीन कुमेड़ी गांव के सर्वे नंबर 36 में 6 हेक्टेयर है। यह जमीन आज शहर की अहम मेजर रोड 10 और इस पर बने फ्लाईओवर का हिस्सा है। इसी जमीन से होकर यह दोनों निकले हैं। ऐसे में अब इस अधिग्रहण प्रक्रिया को लेकर आए फैसले से आईडीए बुरी तरह से उलझ गया है।



याचिकाकर्ताओं का यह कहना था

इसमें याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उनकी जमीन के अधिग्रहण में धारा 5ए (जिसमें भू स्वामी की आपत्ति को सुना जाता है) का पालन नहीं हुआ है। आईडीए ने स्कीम 139 को 93 हेक्टेयर जमीन पर घोषित किया और इसमें भी अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू की। यह प्रक्रिया उस समय इमरजेंसी क्लॉज के तहत तेजी से की गई।



इसमें हमें (भूस्वामी) को धारा 5ए के तहत आपत्ति दर्ज कराने का अधिकार नहीं मिला और उनकी आपत्ति नहीं सुनी गई। आपत्ति सुने बिना ही अवार्ड पारित किया गया और इसके लिए आईडीए ने एक करोड़ 40 लाख की राशि कलेक्टर के पास जमा करा दी। यह राशि कभी याचिकाकर्ता ने ली ही नहीं, इसलिए यह अधिग्रहण प्रक्रिया अधूरी है। वहीं इस जमीन (एमआर 10 व फ्लाईओवर वाला हिस्सा छोड़कर बाकी जमीन) पर अभी भी उनका कब्जा है और खेती हो रही है।



इसके पहले हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट जा चुका मामला

याचिकाकर्ता ने बताया कि धारा 5 ए में आपत्ति नहीं सुनने पर हाईकोर्ट में केस लगा।



इस पर हाईकोर्ट इंदौर ने साल 2010 में रिट अपील को आंशिक रूप से स्वीकार किया और याचिकाकर्ता को अधिनियम 1894 की धारा 5A और 48 के तहत आपत्ति उठाने की अनुमति देने का आदेश पारित किया। फिर सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2016 के अपने आदेश में, याचिकाकर्ता को पुराने अधिनियम की धारा 5A और 48 के तहत उचित प्राधिकरण से संपर्क करने का बोलकर याचिका निस्तारित की।





निगम इसी मामले में भूस्वामी मान नोटिस दे चुका

याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में यह भी कहा कि इंदौर नगर निगम द्वारा याचिकाकर्ता/भूमिस्वामी (जो कि भूमिस्वामी और कब्जेदार हैं) को उनकी भूमि के एक भाग पर मास्टर प्लान सड़क के निर्माण के संबंध में नोटिस जारी किए गए। जिसमें भी हाईकोर्ट ने जुलाई 2025 की रिट अपील में याचिकाकर्ता के मामले पर विचार करने और उसे दोहरा एफएआर प्रदान करने का निर्देश दिया था।



आईडीए ने यह तर्क रखे

वहीं आईडीए (इंदौर विकास प्राधिकरण) ने तर्क रखे कि साल 2004 से ही मेजर रोड, फ्लाईओवर का उपयोग आम जनता द्वारा किया जा रहा है। सिंहस्थ 2004 के तहत इसे पूरा किया गया। इसके तहत MR-10 रोड और फ्लाईओवर काफी पहले बन चुके हैं। जमीन पर भी आईडीए पहले कब्जा ले चुका है और इसकी राशि भी 1.40 करोड़ कलेक्टर शाखा में जमा कर चुके हैं।



हाईकोर्ट ने आईडीए को माना देरी का दोषी

वहीं जस्टिस संदीप एन भट्ट की बेंच ने सभी पक्ष सुनने के बाद कहा कि जमीन पर कब्जा लेना विवादित है क्योंकि पंचनामा पर हस्ताक्षर को लेकर विवाद है। वहीं यह भी है कि भू स्वामी ने मुआवजा राशि नहीं ली है, भले ही वह कलेक्टर के पास जमा कराई गई है। नगर निगम द्वारा भी भूस्वामी मानकर उन्हें नोटिस दिया गया था। इसमें भी हाईकोर्ट एफएआर देने के संबंध में निर्देश दे चुका है।



साल 2010 में भी हाईकोर्ट डिवीजन बेंच द्वारा पूर्व में याचिकाकर्ता को धारा 5 ए व 48 के तहत आपत्तियां दर्ज करने की स्वतंत्रता दी गई थी। ऐसे में बिना इसके निराकरण के आगे की कोई भी प्रक्रिया खुद ही रद्द हो गई।



स्कीम नंबर 139 का मकसद शुरू में MR-10 रोड, फ्लाईओवर और इंडस्ट्रियल प्लॉट बनाना था। वहीं, इंदौर मास्टर प्लान-2021 लागू होने और कानूनी विवाद के दौरान, स्कीम नंबर 139 के मकसद को पूरा करना मुमकिन नहीं रहा क्योंकि पूरे इलाके की जमीन का इस्तेमाल सुपर कॉरिडोर के हिसाब से बदल दिया गया। याचिकाकर्ता ने यह भी बताया है कि उन्होंने पहले ही 4.111 हेक्टेयर ज़मीन सौंप दी है, जिस पर MR-10 रोड और फ्लाईओवर काफी पहले बन चुके हैं और MR-10 का विकास और काम पूरा हो चुका है।



चूंकि कब्जा नहीं लिया गया है या मुआवजे की राशि का भुगतान नहीं किया गया है, ऐसी स्थिति में कार्रवाई को समाप्त (lapse) माना जाएगा।



हाईकोर्ट ने भी पहले याचिकाकर्ता की 5 ए में आपत्ति सुनने की बात कही और सुप्रीम कोर्ट ने भी साल 2016 में इसे बरकरार रखा, लेकिन इस पर दस साल में भी कुछ नहीं हुआ। इतने साल कार्रवाई नहीं करने का आईडीए दोषी है।



आईडीए बोला हम अपील करेंगे

उधर इस मामले में आईडीए सीईओ डॉ. परीक्षित झाड़े ने कहा कि फैसला आया है। हम इसके खिलाफ अपील करेंगे। इस जमीन में से चार हेक्टेयर लेकर तो एमआर 10, फ्लाईओवर बन चुका है और स्कीम 139 का भी अधिकांश काम हो चुका है।



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