IDA स्कीम 171 से मुक्ति के लिए रहवासी खुलकर उतरे, सीएम घोषणा के बाद भी सुस्ती
इंदौर स्कीम 171 से मुक्ति के लिए करीब दर्जनभर गृह निर्माण सोसायटी के हजारों प्लॉट धारक 33 साल से इंतजार कर रहे हैं। मप्र शासन के नियमों के तहत प्लॉट धारक विकास शुल्क के रूप में 5.89 करोड़ रुपए अक्टूबर 2024 में जमा कर चुके हैं। इसके बावजूद अब तक समाधान नहीं हुआ है। जिससे प्लॉट धारकों का धैर्य जवाब देने लगा है।
बैठक कर लिया फैसला करेंगे आंदोलन
पीड़ित प्लाटधारकों ने बैठक कर चरणबद्ध आंदोलन का फैसला लिया है। आंदोलन की शुरुआत सोशल मीडिया पर विरोध के पोस्टर जारी कर की गई है। इसके बाद तय रणनीति के अनुसार आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। जरूरत पड़ने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
इस तरह के पोस्टर किए गए जारी
प्लाटधारकों द्वारा कई तरह के पोस्टर जारी कि गए हैं। इसमें पूछा गया है कि हमारे 33 साल बर्बाद हुए हैं। एक पीढ़ी इंतजार में गुजर गई है।
ना औपचारिक तौर पर एक इंच जमीन अधिग्रहित की गई और ना ही विकास और ना ही हमे मकान बनाने के लिए एनओसी दी जा रही है।
जबकि इंदौर आईडीए शासन के नियमों के तहत 22 दिसंबर 2024 को पूरी राशि ले चुका है। इसके बावजूद स्कीम लैप्स करने का अभी तक नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया।
न्याय में देरी भी अन्याय है। साल 1993 में स्कीम आई थी। तभी से ना विकास ना ही मुक्ति दी जा रही है। यह जमीन हमारा अधिकार है और अब हम आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं। हमे हमारा अधिकार चाहिए।
क्या है पूरा विवाद
साल 1993 में आईडीए ने 13 सोसायटी की जमीन, आसपास की सरकारी और अन्य जमीन को मिलाकर स्कीम 132 लांच की। इस स्कीम का विरोध हुआ और हाईकोर्ट ने 2007 में इसे लैप्स कर दिया।
इसके बाद आईडीए ने 2009 में इसी क्षेत्र के लिए नए सिरे से स्कीम 171 लांच की। लेकिन प्लाटधारकों को अब तक न मुआवजा मिला और न ही स्कीम पर कोई काम हुआ। धीरे-धीरे यह स्कीम भी विवादों में फंस गई।
स्कीम लंबित रहने से प्लाटधारकों की परेशानी बढ़ गई। उन्हें भवन निर्माण की मंजूरी भी स्कीम के कारण नहीं मिल पा रही है।
उधर भूमाफियाओं ने अपना खेल शुरू कर दिया। तत्कालीन कलेक्टर मनीष सिंह के समय कब्जे हटवाए गए और भूमाफियाओं को खदेड़ा गया। इसके बाद शासन ने प्रस्ताव पास किया कि जिन स्कीमों में 10 फीसदी से कम विकास हुआ है, वहां विकास शुल्क लेकर उन्हें मुक्त किया जाए।
जुलाई 2021 में आईडीए ने इस संबंध में प्रस्ताव पास किया। विकास शुल्क की गणना 5.84 करोड़ रुपए की गई। अक्टूबर 2024 में यह राशि जमा करवाई गई। इसके बावजूद अब तक स्कीम को मुक्त नहीं किया गया।
सीएम बोलकर गए थे कि समस्या दूर करेंगे
हाल ही में सीएम डॉ. मोहन यादव के 20 जून को इंदौर दौरे के दौरान विधायक महेंद्र हार्डिया ने सीएम के सामने मंच से यह मुद्दा उठाया। इस पर सीएम ने आश्वस्त किया कि जल्द ही आईडीए स्कीम से मुक्ति मिलेगी।
अभी आईडीए में कोई हलचल नहीं
हालांकि सीएम की घोषणा के बाद भी आईडीए में अभी कोई हलचल नहीं हुई है। ना ही इस संबंध में कोई बैठक और चर्चा हुई है। इसे लेकर रहवासी अब फिर नाराज है और मांग कर रहे हैं कि हमे आखिर और कितना इंतजार करना होगा।
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