पब्लिक पार्क में जैन संत के अंतिम संस्कार का बवाल, पुलिस बोली- हमने रोका था
इंदौर के अन्नपूर्णा थाना क्षेत्र में बुधवार सुबह अनोखी घटना से हलचल मच गई। केसर बाग रोड पर जैन आचार्य विद्यासागर बगीचा स्थित है। यहां 80 साल के जैन संत का अंतिम संस्कार कर दिया गया। यह जानकारी मिलते ही आसपास के रहवासी मौके पर पहुंच गए। लोगों ने सार्वजनिक बगीचे में अंतिम संस्कार किए जाने पर कड़ा विरोध जताया। कुछ ही देर में मामला पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया।
चातुर्मास पर आए थे संत
जानकारी के मुताबिक यह जैन संत वर्षा योग यानी चातुर्मास के लिए इलाके में ठहरे हुए थे। चातुर्मास के दौरान जैन साधु संत एक स्थान पर रुककर धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। यह परंपरा सैकड़ों साल पुरानी मानी जाती है। इसी दौरान अचानक संत का निधन हो गया। उनका नाम सुलभथी सागर जी महाराज बताया जा रहा है।
पुलिस ने मना किया था
अन्नपूर्णा पुलिस (इंदौर न्यूज) के मुताबिक मंगलवार रात जैन समाज के कुछ लोग थाने पहुंचे थे। वे बगीचे में अंतिम संस्कार की अनुमति मांग रहे थे। पुलिस का कहना है कि सार्वजनिक उद्यान में संस्कार की इजाजत नहीं है। पुलिस ने साफ तौर पर अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इसके बावजूद बुधवार सुबह बिना प्रशासनिक अनुमति के अंतिम संस्कार कर दिया गया। पुलिस के इनकार के बाद भी संस्कार होना बड़ा सवाल खड़ा करता है।
सुबह 6 बजे हुआ संस्कार
रहवासियों की शिकायत के मुताबिक सुबह करीब 6 बजे बगीचे में अंतिम संस्कार शुरू कर दिया गया। किसी को इसकी पहले से जानकारी नहीं दी गई थी। आसपास के रहवासियों को इस बारे में सुबह करीब 7 बजे पता चला। जानकारी मिलते ही वे तुरंत मौके पर पहुंच गए। वहां पहुंचकर उन्होंने पूरी स्थिति का बारीकी से जायजा लिया।
रहवासियों का गुस्सा फूटा
सार्वजनिक बगीचे में अंतिम संस्कार की खबर फैलते ही कॉलोनी में हड़कंप मच गया। बड़ी संख्या में रहवासी मौके पर जमा हो गए। लोगों ने इसे नियमों का सीधा उल्लंघन बताया। रहवासियों का कहना है कि सार्वजनिक जगह का ऐसा इस्तेमाल पूरी तरह गलत है। कुछ लोगों ने इसे स्वास्थ्य और सफाई से जुड़ा मुद्दा भी बताया। विरोध बढ़ता देख पुलिस टीम भी जल्द ही मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने आकर स्थिति को शांत कराने की कोशिश की।
निगम में लिखित शिकायत
मामले को लेकर रहवासियों ने नगर निगम के उद्यान अधिकारी को लिखित शिकायत सौंपी है। शिकायत जोन क्रमांक 15 और वार्ड क्रमांक 72 से जुड़ी बताई गई है। इसमें कहा गया है कि यह बगीचा नगर निगम द्वारा विकसित किया गया है। नेमी नगर जैन कॉलोनी के पास इन्द्रपुरी में चातुर्मास कार्यक्रम चल रहा था। इसी दौरान संत का निधन होने की जानकारी शिकायत में दी गई है। रहवासियों ने साफ लिखा है कि उन्हें पहले कोई सूचना नहीं दी गई।
दिगंबर जैन ट्रस्ट ने कराया अंतिम संस्कार
शिकायत के अनुसार दिगंबर जैन समाज के ट्रस्ट (Digambar Jain society) ने ही यह अंतिम संस्कार कराया। रहवासियों का कहना है कि इसके लिए पहले कोई अनुमति नहीं ली गई। उनका यह भी कहना है कि नियम तोड़कर यह काम किया गया। उन्होंने इंदौर नगर निगम से नियमानुसार सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
नियम और परंपरा दोनों अहम
इस पूरे मामले में दो पहलू सामने आ रहे हैं। एक तरफ धार्मिक परंपरा और आस्था का सवाल है। दूसरी तरफ सार्वजनिक जगह के नियमों का पालन जरूरी है। आमतौर पर अंतिम संस्कार के लिए तय श्मशान घाट (जैन संत की मौत) ही इस्तेमाल किए जाते हैं। किसी सार्वजनिक बगीचे या पार्क में ऐसा करना नियमों के खिलाफ माना जाता है। यही वजह है कि रहवासी इसे लेकर इतने नाराज हैं। दोनों पहलुओं को लेकर इलाके में बहस छिड़ गई है।
प्रशासन पर उठे सवाल
इस पूरी घटना ने प्रशासनिक ढील को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जब पुलिस ने पहले ही मना कर दिया था, तो संस्कार कैसे हुआ। रहवासियों का कहना है कि इसमें बड़ी लापरवाही हुई है। कुछ लोगों ने मौके पर सुरक्षा न होने पर भी सवाल उठाया। लोगों की मांग है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। इलाके के कई अन्य रहवासी संगठनों ने भी इस पर चिंता जताई है।
पुलिस-निगम की जांच जारी
फिलहाल पूरे मामले की जांच पुलिस और नगर निगम दोनों कर रहे हैं। अधिकारी पता लगाने में जुटे हैं कि अनुमति के बिना संस्कार कैसे हो गया। यह भी देखा जा रहा है कि इसमें किसकी जिम्मेदारी बनती है। जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी।
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