इंदौर में एक बिल्डर के रुपए देने से लॉरेंस गैंग की बढ़ी हिम्मत, 12 बिल्डरों को मिल चुकी धमकी
पांच प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला
- इंदौर में लॉरेंस गैंग के नाम पर धमकियां बढ़ रही हैं।
- एक बिल्डर द्वारा पैसे देने से गैंग का हौसला बढ़ गया है।
- 12 से ज्यादा बिल्डर और कारोबारी को धमकी भरे कॉल आ चुके हैं।
- कई मामलों में करोड़ों की मांग की गई है।
- पुलिस और एसआईटी जांच में जुटी, लेकिन ठोस सुराग नहीं मिल रहे हैं।
INDORE. इंदौर में लॉरेंस गैंग के नाम से हैरी बॉक्सर द्वारा वसूली की धमकियां खतरनाक स्तर पर पहुंच गई हैं। बुधवार 15 अप्रैल को ही दो नए मामले सामने आए हैं। करीब एक महीने पहले जैन समाज के एक बिल्डर द्वारा डर के मारे करोड़ों रुपए की राशि देने से इस गिरोह के हौसले बुलंद हो गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, पिछले एक माह में ही 12 से अधिक बिल्डर और प्रॉपर्टी कारोबारियों को धमकी भरे कॉल आ चुके हैं। इसके बाद ही गैंग की हिम्मत बढ़ गई और फोन की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।
बिल्डर की खबर से खुलासा, कई धमकी आई
बिल्डर और राष्ट्रीय रियल एस्टेट विकास परिषद (NAREDCO) एमपी के प्रेसीडेंट विवेक दम्मानी को 5 करोड़ की धमकी मिली। इसके बाद टिगरिया बादशाह के पेट्रोल पंप कारोबारी और प्रॉपर्टी कारोबारी चेतन सिंह पंवार और उनके पार्टनर कुंवर सिंह भूरिया को 10 करोड़ की धमकी मंगलवार और बुधवार दोनों दिन आई।
इन धमकियों के बाद इस बिल्डर लॉबी में बात चली। इसमें खुलासा हुआ कि कई और बिल्डर, जिनकी संख्या 12 से भी ज्यादा है, उन्हें फोन आ चुके हैं। लेकिन इसकी जानकारी पुलिस को भी नहीं दी है। जब बड़े बिल्डर के मामले सामने आए तो फिर इन्होंने आपस में बात की और बताया कि इन्हें भी धमकियां मिल चुकी हैं।
इंदौर में यह कर चुके हैं शिकायत
- फरवरी में मेवाड़ अस्पताल संचालक किशनगंज थाना एरिया को भी पांच करोड़ की धमकी मिल चुकी है।
- इंदौर में इसके पहले बिल्डर संजय मोगरा (जैन) को धमकी मिली थी। इनसे पहले 10 करोड़ मांगे और जब फोन काट दिया तो 15 करोड़ की मांग की। इन्हें 16 मार्च को धमकी मिली, जिस पर 20 मार्च को तुकोगंज थाने में केस दर्ज हुआ।
- कॉलेज संचालक रंजन मित्तल को भी 10 करोड़ की धमकी आ चुकी है।
- अब बिल्डर दम्मानी को पांच करोड़ की और इसके बाद चेतन सिंह पंवार और उनके पार्टनर कुंवर सिंह भूरिया को 10 करोड़ की धमकी आई।
(वहीं मध्य प्रदेश में खरगोन, भोपाल, अशोकनगर में भी केस सामने आ चुके हैं)
एसआईटी के हाथ अभी ठोस कुछ नहीं लगा
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए डीजीपी कैलाश मकवाना ने इसकी जांच के लिए एसआईटी टीम भी गठित कर दी है। इसकी कमान एसटीएफ के एडीजी डी. श्रीनिवास वर्मा को दी गई है। दल में डीआईजी राहुल लोढ़ा भी हैं। लेकिन अभी तक दो गिरफ्तारियां, एक मनीष जांगिड़ और दूसरा नगदा के राजपाल सिंह चंद्रावत की हुई हैं।
हालांकि गैंग से लिंक होने वाले दर्जन भर संदिग्धों को रडार पर लिया है, लेकिन अभी ठोस सुराग हाथ में नहीं आया। वहीं धमकी भरे फोन की संख्या लगातार बढ़ रही है।
इस तरह से काम कर रही है गैंग
लॉरेंस गैंग के खौफ का पूरा लाभ उठाने की कोशिश हो रही है। इसमें विदेशी नंबरों का उपयोग हो रहा है। इससे वाट्सएप कॉल और वॉयस मैसेज भेजे जा रहे हैं। लॉरेंस गैंग धमकी भरे फोन करती है। साथ ही इंटरनेट के जरिए शूटर और छोटे गुंडों को, जो इंटरनेट पर सक्रिय हैं, अपने साथ जोड़ती है।
फोन करने पर रुपए नहीं मिलते हैं तो धमकाने के लिए इन गुंडों का उपयोग किया जाता है। इसके बदले में इन्हें कई म्यूल खातों का उपयोग कर 25 से 50 हजार रुपए दिए जाते हैं। यह गुंडे वसूली में डर बनाने के लिए हवाई फायर करना, पेट्रोल बम फेंकने जैसी वारदातों को अंजाम देते हैं।
निजी जानकारी कहां से मिल रही, यह संदिग्ध
वहीं इस घटना में यह भी संदिग्ध है कि जिन्हें धमकी मिल रही है, उनकी निजी जानकारियां कौन इस गैंग को दे रहा है। धमकी वाले फोन में इस तरह की बातें भी होती हैं, जो काफी निजी होती हैं और जो इन्हें पता होती हैं। ऐसे में पुलिस की जांच के लिए यह भी अहम है कि यह निजी जानकारियां कौन उपलब्ध करा रहा है।
वीपीएन नेटवर्क से समस्या
जांच एजेंसी को वीपीएन नेटवर्क से समस्या आ रही है। धमकी वाले नंबर इसी नेटवर्क के हैं। इसके चलते इनकी सही लोकेशन ट्रेस करना मुश्किल काम है। इसलिए अभी तक मुख्य आरोपी तक पुलिस नहीं पहुंच सकी है।
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