इंदौर में महंगी बिकी शराब दुकान, लेबल लाइसेंस से अटका माल, आठ दुकान छोड़ सब बिकीं
Indore. इंदौर में सबसे महंगी शराब दुकानें बिकी हैं। यही जिला रहा है जिसने 2100 करोड़ जैसे लक्ष्य को भी पार किया है। इंदौर जिले में कुल 173 दुकान थीं और लक्ष्य था 2102 करोड़ का। इसमें 165 दुकानों से 2105 करोड़ मिल चुका है।
वहीं, बाकी बची 8 दुकानों के लिए 125 करोड़ की बोली मिल चुकी है। मध्य प्रदेश शासन से इस बोली के लिए मंजूरी मिलते ही ये भी बिक जाएंगी, क्योंकि यह बेस प्राइज से 30 फीसदी कम पर बोली है। इस तरह इंदौर से रिजर्व प्राइज से भी ज्यादा राशि मिल जाएगी।
इसके बाद शराब ठेकेदार परेशान
इंदौर में इस लक्ष्य को पाने के लिए ठेकेदारों को हर दिन औसतन 6 करोड़ की शराब बेचना होगी, तब जाकर वे घाटे से बच सकेंगे। लेकिन समस्या यह है कि अभी तक मध्य प्रदेश शासन के आबकारी विभाग ने लेबल लाइसेंस रजिस्ट्रेशन को मंजूरी नहीं दी है।
इसके चलते विभाग के गोदामों से शराब बिना लेबल के निकल नहीं पा रही है और दुकानों तक पहुंच ही नहीं रही है। इससे कई ब्रांड दुकानों में उपलब्ध नहीं हैं और ठेकेदारों को हर दिन नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसे लेकर ठेकेदारों ने शासन स्तर पर शिकायत भी की है, लेकिन अभी तक सुनवाई नहीं हुई है।
मध्य प्रदेश में 4500 करोड़ पीछे
वहीं मध्य प्रदेश की बात करें तो हालात ठीक नहीं हैं। प्रदेश के 54 जिलों में से इस बार केवल 10 जिले ही राजस्व लक्ष्य हासिल कर सके हैं, जबकि 45 जिले पीछे हैं। कुल लक्ष्य 19 हजार 960 करोड़ रुपए का था, जिसमें विभाग करीब 15 हजार 450 करोड़ तक ही पहुंच सका है, यानी करीब 75 फीसदी।
कई जिले तो 50 फीसदी से भी नीचे हैं, जिनमें नीमच, शाजापुर, रतलाम, झाबुआ और सीहोर शामिल हैं। बड़े शहरों में जबलपुर की स्थिति सबसे खराब रही, जहां केवल 60 फीसदी लक्ष्य ही पूरा हो सका। वहीं भोपाल भी 70 फीसदी तक ही पहुंच पाया है। ग्वालियर 95 फीसदी तक जरूर पहुंचा है, लेकिन उज्जैन 60 फीसदी लक्ष्य भी हासिल नहीं कर सका है।
ये खबरें भी पढ़ें...
MP मेडिकल यूनिवर्सिटी में बिना टेंडर 2.86 करोड़ का भुगतान, ऑडिट रिपोर्ट से खुली पोल
विवादों में घिरी डीएसपी अनीता प्रभा शर्मा, नैतिकता सीखने ट्रेनिंग पर जाएंगी!
आईडीए चेयरमैन के लिए नजरें सीएम पर, पूर्व सीएम, मंत्री और संगठन से अलग-अलग नाम
40 दिन से लापता नाबालिग पर इंदौर हाईकोर्ट सख्त, पुलिस को लगाई फटकार, कहा-पेश करो