40 दिन से लापता नाबालिग पर इंदौर हाईकोर्ट सख्त, पुलिस को लगाई फटकार, कहा-पेश करो

Anjali Dwivedi | Apr 05, 2026, 12:32 IST
indore-mahu
इंदौर के महू में 23 फरवरी को 17 वर्षीय नाबालिग का अपहरण हुआ। अपहरण के 40 दिन बाद भी वह नहीं मिली। हाईकोर्ट ने छुट्टी के दिन सुनवाई कर पुलिस को फटकारा और 6 अप्रैल को नाबालिग को हर हाल में पेश करने का आदेश दिया।

News In Short

  • इंदौर के महू में 23 फरवरी को एक 17 वर्षीय नाबालिग का अपहरण हुआ था।
  • घटना के 40 दिन बाद भी बच्ची को नहीं ढूंढ पाई पुलिस।
  • बडगोंदा थाना पुलिस ने शुरू में एफआईआर नहीं की और आरोपियों के नाम भी नहीं लिखे।
  • हाईकोर्ट ने छुट्टी के दिन सुनवाई कर पुलिस को कड़ी फटकार लगाई।
  • कोर्ट ने 6 अप्रैल को नाबालिग और आरोपियों को हर हाल में पेश करने का आदेश दिया।

News In Detail

इंदौर के महू में 40 दिन से लापता नाबालिग के मामले में हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। पुलिस की गंभीर लापरवाही को देखते हुए अदालत ने छुट्टी के दिन विशेष सुनवाई की और जांच टीम को जमकर फटकार लगाई।



दरअसल, परिजनों के नामजद आरोपियों की जानकारी देने के बावजूद, बडगोंदा थाना पुलिस ने शुरुआती दौर में न तो FIR दर्ज की और न ही कोई कार्रवाई की।



पुलिस की इसी कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए हाईकोर्ट ने सख्त आदेश जारी किया है कि 6 अप्रैल तक नाबालिग और आरोपियों को हर हाल में अदालत में पेश किया जाए।



23 फरवरी को हुआ था अपहरण

बडगोंदा थाना क्षेत्र में 23 फरवरी को अनुसूचित जाति की नाबालिग का अपहरण हुआ था। पीड़िता की उम्र 17 साल 3 महीने है। उसके पिता ने आरोप लगाया है कि पवन सिंह नाम का दबंग ने बेटी को जबरन उठाकर ले गया। वह अभी भी उसी के कब्जे में है।



पुलिस ने पहले नहीं की FIR

घटना के बाद पीड़िता के परिजन थाने पहुंचे तो पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने में टालमटोल की। पिता ने आरोपियों के नाम बताए, लेकिन पुलिस ने न कार्रवाई की और ना ही FIR में उनके नाम लिखे।



इससे भी आगे बढ़कर पुलिस पर एक और गंभीर आरोप है। परिजन के मुताबिक जब बच्ची के चाचा थाने पहुंचे तो पुलिस ने उनके साथ मारपीट भी की। पूरे एक महीने में पुलिस ने बालिका को ढूंढने की कोई कोशिश नहीं की।



हाईकोर्ट ने छुट्टी के दिन की सुनवाई

जब कोई रास्ता नहीं बचा तो पीड़िता के पिता ने अपने वकील के जरिए हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका (Habeas Corpus Petition) दायर की। शनिवार 4 अप्रैल को छुट्टी के दिन भी कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई की। यह अपने आप में इस मामले की गंभीरता बताता है।



सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नामजद एफआईआर न होने पर पुलिस को जमकर फटकारा। साथ ही सरकार को सख्त निर्देश दिए कि 6 अप्रैल सोमवार को नाबालिग को हर हाल में कोर्ट के सामने पेश किया जाए।



कोर्ट के आदेश के बाद जागी पुलिस

हाईकोर्ट का आदेश आते ही पुलिस का रवैया बदल गया। वही बडगोंदा पुलिस जो 40 दिन तक चुप बैठी रही, शनिवार 4 अप्रैल की शाम को तुरंत पीड़िता के घर पहुंच गई। पुलिस ने परिजन से घटना की पूरी जानकारी ली।



यह मामला इसलिए भी संवेदनशील है, क्योंकि पीड़िता अनुसूचित जाति की है और उसके पिता मजदूर हैं। ऐसे मामलों में पोक्सो (POCSO - Protection of Children from Sexual Offences) अधिनियम और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत सख्त एक्शन लिया जाता है।



अब सोमवार को अगली सुनवाई

सोमवार 6 अप्रैल को हाईकोर्ट में सुनवाई है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि नाबालिग और आरोपियों को उसी दिन पेश किया जाए। अब देखना यह है कि क्या पुलिस वाकई बच्ची को ढूंढ पाती है या फिर कोर्ट में खाली हाथ जाना पड़ता है। इस मामले का अगला मोड़ सोमवार को तय होगा।



ये खबरें भी पढ़ें....



पति से नहीं तय होगा महिला का ओबीसी क्रीमीलेयर स्टेटस, ग्वालियर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला



पीएफ में देरी पर रिटायर्ड कर्मचारियों को सरकार देगी सालाना 8 प्रतिशत ब्याज, हाईकोर्ट ने लगाई फटकार



RTE एडमिशन में लापरवाही पर हाईकोर्ट सख्त: छुट्टी के दिन विशेष सुनवाई, सरकार से मांगा जवाब



BPL परिवार का घर बचाने छुट्टी के दिन खुला हाईकोर्ट, प्रशासन के बुलडोजर पर कोर्ट ने लगाई रोक





Tags:
  • इंदौर
  • हाईकोर्ट
  • नाबालिग का अपहरण
  • नाबालिग
  • POCSO
  • इंदौर के महू