क्लीन सिटी इंदौर में हालात बेकाबू, एक तरफ सफाईकर्मी हड़ताल पर, दूसरी ओर महापौर के लगे पोस्टर
कचरे के ढेर पर रखे महापौर के पोस्टर
कांग्रेस नेता गिरीश जोशी, विवेक खंडेलवाल और विभाष शर्मा ने सफाई व्यवस्था को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में सफाई मित्रों की लंबित मांगों का मुद्दा भी शामिल था। इस दौरान शहर में लगे कचरे के ढेरों के बीच महापौर पुष्यमित्र भार्गव के पोस्टर लगाए गए। पोस्टरों पर लिखा था, महापौर एक काम करो, कचरे के ढेर में…। साथ ही सफाई मित्रों की मांगें पूरी करो, इंदौर को कचरा मुक्त करो भी लिखा था।
यह हैं सफाई कर्मचारियों की मांगें
सफाई कर्मचारियों की मांग है कि लंबे समय से कार्यरत सफाई कर्मचारियों का नियमितीकरण किया जाए। समान काम के लिए समान वेतन दिया जाए। एनजीओ/ठेका प्रथा समाप्त कर कर्मचारियों को स्थायी रोजगार दिया जाए।
साथ ही मेडिकल आधार पर पात्र परिवारों को अनुकंपा नियुक्ति दी जाए। ड्यूटी के दौरान कर्मचारी की मृत्यु होने पर परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाए। विनियमित कर्मचारियों को नियुक्ति तिथि से स्थायी माना जाए। लंबित वेतन-भत्तों और सेवा लाभों का निराकरण किया जाए।
कचरे के बीच पोस्टर बना विरोध का केंद्र
कांग्रेस के इस प्रदर्शन में कचरे के ढेर के बीच लगाए गए पोस्टर लोगों के बीच चर्चा का विषय बने। प्रदर्शनकारियों ने सफाई मित्रों की मांगों के समाधान के साथ-साथ शहर में जमा कचरे को तत्काल उठाने और सफाई व्यवस्था बहाल करने की मांग उठाई।
शहर में जगह-जगह फैल रहा कचरा
सफाईकर्मियों के आंदोलन से इंदौर शहर के कई इलाकों में मंगलवार शाम से सफाई व्यवस्था प्रभावित होने लगी। जगह-जगह गीला और सूखा कचरा सड़कों पर फैला दिखने लगा है। कई सड़कों पर इतना कचरा और गंदगी फैली हुई थी कि वाहन चालकों का निकलना मुश्किल हो गया। लोगों का कहना है कि मांगें सही हो सकती हैं, लेकिन साफ शहर में विरोध का यह तरीका ठीक नहीं है।
बीजेपी के आयोजन में हंगामा
उधर बीजेपी के सेवा संकल्प के तहत विजयनगर में हो रहे आयोजन में हंगामा हो गया। यहां अपनी मांगों को लेकर सफाईकर्मी पहुंच गए। इस दौरान एक बीजेपी नेत्री द्वारा कुछ शब्द गए जिस पर बवाल हो गया। इस दौरान भीड़ में झूमाझटकी और हंगामा हो गया। सफाईकर्मी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
स्वच्छता देश में नंबर-1 इंदौर
बता दें कि मध्य प्रदेश का इंदौर शहर स्वच्छता के मामले में लगातार देश में नंबर-1 रहा है। स्वच्छ सर्वेक्षण में इंदौर ने 2017 से 2025 तक आठ बार सबसे साफ शहर का खिताब जीता है।
- 2017: पहली बार इंदौर देश का सबसे साफ शहर बना।
- 2018: इंदौर ने लगातार दूसरी बार पहला स्थान हासिल किया।
- 2019: तीसरी बार भी इंदौर नंबर-1 रहा।
- 2020: चौथी बार इंदौर ने देश में टॉप किया।
- 2021: पांचवीं बार स्वच्छता का खिताब इंदौर के नाम रहा।
- 2022: इंदौर ने छठी बार यह उपलब्धि हासिल की।
- 2023: इंदौर ने सूरत के साथ संयुक्त रूप से पहला स्थान पाया।
- 2024/2025: इंदौर ने आठवीं बार देश के सबसे साफ शहर का खिताब जीता।
FAQ
- इंदौर में महापौर के पोस्टर्स कचरे के बीच क्यों लगाए गए?
महापौर के पोस्टर्स कचरे के बीच कांग्रेस नेता गिरीश जोशी, विवेक खंडेलवाल और विभाष शर्मा द्वारा सफाई व्यवस्था में सुधार की मांग करते हुए लगाए गए। - इंदौर शहर में सफाई कर्मचारियों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
सफाई कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में नियमितीकरण, समान काम के लिए समान वेतन, एनजीओ/ठेका प्रथा समाप्त कर स्थायी रोजगार, और सेवा लाभों का निराकरण शामिल हैं। - इंदौर शहर को स्वच्छता में कितनी बार नंबर-1 का खिताब मिला है?
इंदौर शहर ने 2017 से 2025 तक आठ बार देश का सबसे साफ शहर बनने का खिताब जीता है, जिसमें 2017 से 2024/2025 तक लगातार कई बार पहला स्थान हासिल किया।