इंदौर में सीएम मोहन यादव से महिला ने मांगा था मेट्रो प्रोजेक्ट को लेकर मुआवजा, जांच में यह मिला
इंदौर मेट्रो प्रोजेक्ट में घर जाने को लेकर पिंकी वर्मा नामक महिला मुआवजे की मांग कर रही हैं। गुरुवार, 18 जून को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दौरे के दौरान वह उनसे मिली थीं। उन्होंने सीएम से रोते हुए कहा था कि अधिकारी उनकी बात नहीं सुन रहे हैं और मुआवजा भी नहीं मिल रहा है।
सीएम ने उन्हें भरोसा दिया, लेकिन महिला ने साफ कहा कि सिर्फ आश्वासन से काम नहीं चलेगा, लिखित में कुछ दीजिए क्योंकि बिना लिखित के कोई सुनता नहीं है। इस पर मुख्यमंत्री ने उनके आवेदन पर ही लिख दिया कि मेट्रो की मुआवजा नीति के मुताबिक सभी के साथ समान व्यवहार करते हुए आगे की कार्रवाई की जाए।
प्रशासन ने कराई जांच, यह मिला
इस मामले में कलेक्टर शिवम वर्मा ने तुरंत अधिकारियों को जांच कर राहत देने के निर्देश दिए थे। इसके बाद एसडीएम निधि वर्मा ने तहसीलदार और मेट्रो प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों को मौके पर भेजकर पूरे मामले की रिपोर्ट मंगवाई थी।
जांच में सामने आया कि महिला के पिता भरत वर्मा और भाई बलराम वर्मा को मुआवजा नीति के तहत फ्लैट या राशि लेने का विकल्प पहले ही दिया जा चुका है। वहीं, उन्होंने इसे लेने से मना कर दिया है। साथ ही, यह भी पाया गया कि महिला शादीशुदा है और अलग घर में रहती है, इसलिए मुआवजा नीति के हिसाब से उनका अलग से हक नहीं बनता।
इस तरह से दिया गया मुआवजा चेक
अधिकारियों ने बताया कि प्रभावितों को पीएम आवास के तहत फ्लैट दिया जाता है। वहीं, यदि वह चेक लेना चाहें तो सात लाख का चेक और एक लाख 36 हजार का भत्ता मिलता है। इस तरह आठ लाख 36 हजार का चेक दिया जाता है। यदि घर में 18 साल से ऊपर कोई है तो उन्हें अलग यूनिट मानकर फ्लैट या आठ लाख 36 हजार के चेक का ऑफर दिया जाता है।
इस केस में महिला पिंकी वर्मा शादीशुदा है और वह अलग लसूडिया में रहती है, इसलिए उनका अधिकार नहीं बनता है। मेट्रो प्रभावित घर में पिता भरत व 18 साल से अधिक उम्र का बेटा बलराम है, इसलिए कुल 16 लाख 72 हजार का चेक दिया गया लेकिन उन्होंने इंकार कर दिया।
प्लॉट भी दिखाया और कॉलोनी में मकान भी
प्रशासन ने इस मामले में वर्मा परिवार को पहले फ्लैट और चेक दोनों विकल्प दिए, लेकिन उन्होंने दोनों ही लेने से इनकार कर दिया था। इसके बाद उनकी सहमति के मुताबिक पास की कुछ कॉलोनियों में ईडब्ल्यूएस प्लॉट भी दिखाए गए, लेकिन वे भी उन्हें पसंद नहीं आए। इसी वजह से मामला अभी अटका हुआ है।
इस प्रोजेक्ट में कुल 16 घर प्रभावित हुए थे। इनमें से 15 परिवार फ्लैट या मुआवजे की राशि ले चुके हैं। सिर्फ वर्मा परिवार का मामला ही बाकी रह गया है।
वहीं पिंकी वर्मा का कहना है कि छोटे घरों वालों को ज्यादा मुआवजा मिला है। उनका कहना है कि उनके पिता दिव्यांग हैं, इसलिए उन्हें इतनी राशि दी जाए कि वे आसानी से दूसरा घर ले सकें।
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