इंदौर का वंदे मातरम् विवाद: फौजिया के पति शेख अलीम और महापौर की साजिश? किसने लगाए आरोप
इंदौर नगर निगम के बजट सत्र में 08 अप्रैल को उठा वंदे मातरम् का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। विवाद कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम द्वारा वंदे मातरम् नहीं कहने की बात से हुआ था। इस पर सभापति ने उन्हें बाहर कर दिया था।
बाद में पार्षद रुबीना इकबाल खान ने भी यही बात कही और कह दिया कि किसी के बाप में हिम्मत नहीं कि जबरदस्ती वंदे मातरम् बुलवा सके। यहां तक कह दिया कि वह ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम में चली जाएंगी, कांग्रेस को मुसलमानों की कदर नहीं है। रुबीना ने यह भी कह दिया था कि कांग्रेस पार्टी भाड़ में जाए।
अब इस मामले में शहराध्यक्ष चिंटू चौकसे के करीबी व वार्ड 22 से कांग्रेस पार्षद राजू भदौरिया ने गंभीर आरोप लगाए हैं।
यह विवाद अभी ही क्यों हुआ, फौजिया तो पहले भी रही
इस विवाद को लेकर राजू भदौरिया ने लंबी-चौड़ी पोस्ट सोशल मीडिया पर लिखी (जिसे बाद में डिलीट कर दिया गया)। इसमें इस विवाद को षड्यंत्र बताया गया है। भदौरिया ने कहा कि फौजिया पहले नेता प्रतिपक्ष रही हैं और तब वह हर वंदे मातरम् गान में रही हैं। इसके पहले भी सदन में यह हुआ है, लेकिन तब फौजिया ने वंदे मातरम् को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की थी। उन्हें वंदे मातरम् नहीं गाना है तो नहीं गातीं, लेकिन यह बोलने की क्या जरूरत थी कि मैं नहीं गाऊंगी, विवाद क्यों भड़काया गया?
इसके पीछे शेख अलीम और महापौर की डील
भदौरिया इस पूरे घटनाक्रम को साजिश बताते हुए इसे फौजिया के पति शेख अलीम और महापौर पुष्यमित्र भार्गव की डील बता रहे हैं। शेख अलीम एमपी कांग्रेस में अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष हैं। साथ ही, वह स्टेट बार काउंसिल के चुनाव में उम्मीदवार हैं।
भदौरिया ने आरोप लगाते हुए कहा कि शेख अलीम को चुनाव जीतना है, इसके लिए उनकी महापौर (वह पहले एएजी इंदौर रह चुके हैं) से डील हुई है। इसमें था कि महापौर उन्हें चुनाव में वकीलों के वोट दिलवाएंगे। इसके बदले में शेख अलीम पत्नी फौजिया के जरिए निगम में उनकी मदद करेंगी, क्योंकि इस बार भागीरथपुरा मुद्दे व निगम की आर्थिक तंगी के कारण बीजेपी बैकफुट पर है। इसी डील के तहत फौजिया ने यह विवाद खड़ा किया है।
पहले नंबर पर सवाल था तो देर से क्यों आईं?
भदौरिया ने द सूत्र से कहा कि फौजिया का प्रश्नकाल में प्रश्न पहले नंबर पर था, लेकिन वह देर से आईं। इस पर बीजेपी पार्षद सुरेश कुरवाड़े ने केवल यही सवाल किया था कि फौजिया देर से क्यों आईं, क्या वंदे मातरम् नहीं गाना था?
इस पर फौजिया को चुप रहना चाहिए था। वह तो पहले भी वंदे मातरम् गायन में रही हैं, लेकिन यह कहकर कि कोई जबरदस्ती वंदे मातरम् नहीं बुलवा सकता, विवाद शुरू करा दिया गया। यह पूरी तरह से मिली-जुली कुश्ती है।
महापौर बोले, कांग्रेस का असली चेहरा सामने आया
वहीं आज, 10 अप्रैल को महापौर पुष्यमित्र भार्गव के आह्वान पर पूरे 85 वार्डों में वंदे मातरम् का गान किया गया। महापौर ने कहा कि कांग्रेस का असली चेहरा सामने आ गया है।
इस मामले में राहुल गांधी, दिग्विजय सिंह और हर बात पर झूठे बयान देने वाले जीतू पटवारी ने अभी तक कुछ नहीं कहा है। वह इस्लाम के साथ हैं या देश के साथ? वंदे मातरम् राष्ट्रीयता की पहचान है। वह इस पर चुप बैठे हैं। वहीं शेख अलीम, जीतू पटवारी के ही करीबी हैं।
अभी तक क्या हुआ इस पूरे विवाद में
इस पूरे विवाद में अभी तक कांग्रेस के बड़े नेताओं और प्रदेशाध्यक्ष पटवारी की टिप्पणी सामने नहीं आई है। हालांकि शहराध्यक्ष चिंटू चौकसे ने साफ कहा कि वंदे मातरम् हमारी रगों में है। साथ ही उन्होंने कांग्रेस के हर कार्यक्रम में इसके गान को अनिवार्य कर दिया है।
चिंटू चौकसे ने साफ कहा कि जो नहीं गा सकता, वह पार्टी कार्यक्रम में भी न आए। वहीं रुबीना को पार्टी से निष्कासित करने का प्रस्ताव भोपाल भेज दिया गया है। वहीं रुबीना ने कहा कि कांग्रेस मुसलमानों की कदर नहीं करती, केवल वोट लेती है। हम तो ओवैसी की पार्टी में चले जाएंगे, हमें तो पहले ही न्यौता आ गया है।
वहीं कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा ने फौजिया और रुबीना दोनों को ही पाकिस्तान बसने की नसीहत दे दी और कार्रवाई की मांग की है।
बीजेपी ने हाथों हाथ लिया यह मुद्दा
उधर बीजेपी ने संभागायुक्त से मांग की है कि दोनों पार्षदों को निष्कासित किया जाए। साथ ही पुलिस में भी एफआईआर के लिए आवेदन दिया है। उधर एबीवीपी ने भी नगर निगम पर प्रदर्शन किया है। बीजेपी इस मामले में शांत होने को तैयार नहीं है।
कांग्रेस का वोट बैंक खिसका
इस पूरे मुद्दे ने कांग्रेस के कट्टर वोट बैंक (मुस्लिम) को हिला दिया है। रुबीना ने खुद कहा कि हम नौ मुस्लिम पार्षद हैं, कांग्रेस के पास है क्या? कांग्रेस अंदर ही अंदर हिंदू-मुस्लिम में बंट गई है। वहीं बड़े नेता इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं।
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