पार्षद फौजिया, रुबीना के वंदे मातरम् विवाद से कांग्रेस हिंदू-मुस्लिम में बंटी, शहराध्यक्ष चौकसे ने भी किया अनिवार्य
Sanjay Gupta | Apr 09, 2026, 13:21 IST
indore congress vande mataram row split
इंदौर में वंदे मातरम् विवाद से कांग्रेस में दरार दिख रही है। फौजिया और रूबीना के बयानों से पार्टी दो गुटों में बंट गई है। शहराध्यक्ष चिंटू चौकसे ने इसे अब कार्यक्रमों में अनिवार्य कर दिया है। वहीं कांग्रेस से ही मांग उठी कि दोनों को बाहर किया जाए।
कांग्रेस पार्षद फौजिया और रूबीना के बयान से विवाद बढ़ गया है। वंदे मातरम् विवाद में कांग्रेस दो गुटों में बंट गई है। शहराध्यक्ष चौकसे ने इसे अनिवार्य किया है। इंदौर नगर निगम के बजट सत्र में वंदे मातरम् विवाद से कांग्रेस अब सीधे तौर पर हिंदू-मुस्लिम में बंट गई है।
बीजेपी को घेरने उतरी कांग्रेस दो फाड़ हो गई है। वंदे मातरम् नहीं गाने की जिद ने विवाद बढ़ा दिया है। इंदौर नगर निगम के बजट सत्र में 08 अप्रैल को बवाल हुआ था। फौजिया शेख अलीम ने वंदे मातरम् गाने से इनकार कर दिया था।
इस पर सभापति ने उन्हें सदन से बाहर कर दिया था। वहीं उनके बयान से कांग्रेस ने दूरी बना ली थी। चिंटू चौकसे ने कहा कि यह फौजिया की व्यक्तिगत राय है और हमारी रग-रग में वंदे मातरम् है। रूबीना इकबाल खान ने बयान से आग बढ़ा दी है। उन्होंने कहा कि जबरदस्ती किसी का बाप हमसे वंदे मातरम् नहीं बुलवा सकता। इंदौर में करीब सात मुस्लिम पार्षद हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता केके मिश्रा ने तीखा बयान दिया है। उन्होंने दोनों पार्षदों को पाकिस्तान बसने का बोलते हुए कहा कि जो राष्ट्र धर्म नहीं निभा सकते वे जाएं। उन्होंने पार्षदों के बयान को राजनीतिक ब्लैकमेलिंग बताते हुए बीजेपी से सांठगांठ का आरोप लगाया है। सात ही, दोनों को पार्टी से निकालने की मांग की है।
वहीं शहराध्यक्ष चिंटू चौकसे ने कांग्रेस कार्यक्रम में वंदे मातरम् अनिवार्य करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति में यह भावना होनी चाहिए। साथ ही यह भी कहा कि यह नैतिक जिम्मेदारी है। कांग्रेस के कार्यक्रम की शुरुआत अब वंदे मातरम् गान से होगी और जो नहीं गाए वह बैठक में न आए। समापन राष्ट्रगान से किया जाएगा।
उधर दूसरा धड़ा इसके खिलाफ है। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के अल्पसंख्यक प्रभारी इंदौर के डॉ. अमीनुल खान सूरी ने बयान दिया है। उन्होंने चिंटू चौकसे द्वारा कांग्रेस के कार्यक्रम में वंदे मातरम् को अनिवार्य करने के फैसले को तानाशाही वाला निर्णय बताया है।
उन्होंने कहा कि इसे अनिवार्य करना गलत है। कांग्रेस में यह कभी अनिवार्य नहीं किया गया है। वंदे मातरम् का सम्मान जरूरी है, लेकिन इसे अनिवार्य करना गलत है।
फौजिया शेख अलीम का कहना है कि जबरदस्ती करना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि यह संविधान से मेल नहीं खाता है। संविधान में धर्म मानने की स्वतंत्रता है, लेकिन वंदे मातरम् गाना अनिवार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि हम पूजा नहीं करते हैं।
वहीं रूबीना इकबाल खान ने कहा कि किसी का बाप वंदे मातरम् बोलने के लिए जबरदस्ती नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी भाड़ में जाए। कांग्रेस को मुसलमानों के वोट के लिए याद किया जाता है। हम ओवैसी की पार्टी में जा सकते हैं। कोई कांग्रेस से जिंदगी भर का अनुबंध नहीं है। हम निर्दलीय भी चुनाव जीत सकते हैं।
शेख अलीम अब कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश अध्यक्ष हैं। यह फौजिया शेख के पति हैं। वह लंबे समय से पटवारी के करीबी रहे हैं। इस विवाद से पटवारी भी घिर गए हैं। इस विवाद को राजनीतिक नजरिए से देखा जा रहा है।
फौजिया नेता प्रतिपक्ष रह चुकी हैं और पहले भी वंदे मातरम् होता था और वह रहती थीं। बुधवार को वह देरी से सदन में आईं, ताकि वंदे मातरम् का गायन नहीं करना पड़े। कांग्रेस प्रवक्ता मिश्रा ने यह आरोप लगाया है।
उन्होंने इसे पार्षदों की बीजेपी से मिलीभगत की बात कही है। इस विवाद के कारण भागीरथपुरा, अवैध कॉलोनी जैसे कई मुद्दों पर घिरी बीजेपी का बचाव हो गया।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव के साथ ही पूरी बीजेपी ने कांग्रेस को घेर दिया है। महापौर ने कहा कि देश के प्रति सम्मान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह सदन की गरिमा के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् राष्ट्रीय चेतना का गीत है। वहीं नगराध्यक्ष सुमित मिश्रा ने भी कांग्रेस को घेरा और कहा कि इस पर कांग्रेस अपना रुख साफ करे।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 26 मार्च को फैसला देते हुए कहा कि वंदे मातरम् गाना अनिवार्य नहीं है। गृह मंत्रालय के निर्देश केवल प्रोटोकॉल के रूप में हैं। नहीं गाने पर सजा का प्रावधान नहीं है।
यह गीत बंकिम चंद्र चटर्जी ने साल 1875 में लिखा था। यह 1882 में आनंदमठ में प्रकाशित हुआ था। साल 1896 में कांग्रेस अधिवेशन में इसे गाया गया था। रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे मंच पर गाया था। वंदे मातरम् का अर्थ मां को नमन करना है। यह स्वतंत्रता संग्राम में नारा बना था।
कांग्रेस शहराध्यक्ष चिंटू चौकसे ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी को रुबीना खान के पार्टी से निष्कासन का प्रस्ताव भेज दिया है। चौकसे ने कहा कि पार्टी को लेकर गलत बात करने वालों की पार्टी में जगह नहीं, इन्हें पार्टी एंटरटेन नहीं करेगी।
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बीजेपी को घेरने उतरी कांग्रेस दो फाड़ हो गई है। वंदे मातरम् नहीं गाने की जिद ने विवाद बढ़ा दिया है। इंदौर नगर निगम के बजट सत्र में 08 अप्रैल को बवाल हुआ था। फौजिया शेख अलीम ने वंदे मातरम् गाने से इनकार कर दिया था।
इस पर सभापति ने उन्हें सदन से बाहर कर दिया था। वहीं उनके बयान से कांग्रेस ने दूरी बना ली थी। चिंटू चौकसे ने कहा कि यह फौजिया की व्यक्तिगत राय है और हमारी रग-रग में वंदे मातरम् है। रूबीना इकबाल खान ने बयान से आग बढ़ा दी है। उन्होंने कहा कि जबरदस्ती किसी का बाप हमसे वंदे मातरम् नहीं बुलवा सकता। इंदौर में करीब सात मुस्लिम पार्षद हैं।
इस मामले में कांग्रेस हिंदू और मुस्लिम में बंटी
♦️“*जो राष्ट्रधर्म नहीं निभा सकते हैं,वन्दे मातरम् नहीं बोल सकते हैं, वे जाएं “भाड़” में, पाकिस्तान जाकर बसें*”….
🔺“*पार्षद रूबीना ख़ान का बयान राजनैतिक ब्लैकमेलिंग,भाजपा से मिलीजुल कर किया गया खेला, बयान आज़ादी के संग्राम में और भारतीय सेना में योगदान/ बलिदान देने वाले…
— KK Mishra (@KKMishraINC) April 9, 2026
चिंटू चौकसे ने नया फैसला लिया
दूसरा धड़ा चौकसे के खिलाफ नजर आया
उन्होंने कहा कि इसे अनिवार्य करना गलत है। कांग्रेस में यह कभी अनिवार्य नहीं किया गया है। वंदे मातरम् का सम्मान जरूरी है, लेकिन इसे अनिवार्य करना गलत है।
“शहर कांग्रेस अध्यक्ष का यह बयान पूरी तरह तानाशाही से परिपूर्ण है कि ‘जिसे वंदे मातरम् नहीं गाना, वो कांग्रेस के कार्यक्रमों में न आए।’
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का इतिहास गवाह है कि 1896 से लेकर आज तक हर अधिवेशन और कार्यक्रम में वंदे मातरम् गाया गया है, लेकिन इसे कभी अनिवार्य… pic.twitter.com/mBQoSxdArj
— Dr Aminul khan Suri (@SuriAminul) April 9, 2026
फौजिया शेख अलीम ने यह कहा था
कांग्रेस जाए भाड़ में- रूबीना इकबाल खान
शेख अलीम हैं जीतू पटवारी के खास
फौजिया नेता प्रतिपक्ष रह चुकी हैं और पहले भी वंदे मातरम् होता था और वह रहती थीं। बुधवार को वह देरी से सदन में आईं, ताकि वंदे मातरम् का गायन नहीं करना पड़े। कांग्रेस प्रवक्ता मिश्रा ने यह आरोप लगाया है।
उन्होंने इसे पार्षदों की बीजेपी से मिलीभगत की बात कही है। इस विवाद के कारण भागीरथपुरा, अवैध कॉलोनी जैसे कई मुद्दों पर घिरी बीजेपी का बचाव हो गया।
महापौर और बीजेपी ने घेरा
सुप्रीम कोर्ट ने 26 मार्च को फैसला दिया
यह गीत बंकिम चंद्र चटर्जी ने साल 1875 में लिखा था। यह 1882 में आनंदमठ में प्रकाशित हुआ था। साल 1896 में कांग्रेस अधिवेशन में इसे गाया गया था। रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे मंच पर गाया था। वंदे मातरम् का अर्थ मां को नमन करना है। यह स्वतंत्रता संग्राम में नारा बना था।
रुबीना को करेंगे बाहर
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