इंदौर से 4 नई रेल लाइन: 2047 तक बदलेगा एमपी का रेल नक्शा
समझें क्या है पूरा मामला
- इंदौर से चार नई रेल लाइनें प्रस्तावित की गई हैं
- इंदौर-बुदनी और इंदौर-दाहोद प्रमुख प्रोजेक्ट हैं
- मुंबई और दिल्ली यात्रा समय में कमी आएगी
- आदिवासी जिलों को पहली बार रेल कनेक्टिविटी मिलेगी
- 2047 तक इंदौर को बड़ा रेल हब बनाने का लक्ष्य है
अभी क्या है इंदौर की रेलवे स्थिति
इंदौर रेलवे स्टेशन फिलहाल डेड एंड स्टेशन की तरह काम करता है। यानी अधिकांश ट्रेनें यहां आकर खत्म हो जाती हैं। दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद और भोपाल के लिए सीधी ट्रेनें हैं। लेकिन पूर्वी और दक्षिणी भारत से सीधा रेल संपर्क अभी भी पर्याप्त नहीं है। शहर की बढ़ती आबादी और औद्योगिक विस्तार के हिसाब से मौजूदा रेल नेटवर्क काफी नहीं है। इसी जरूरत को देखते हुए रेलवे ने चार बड़े प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया है।
इंदौर-बुदनी रेल लाइन
यह लाइन 205 किलोमीटर लंबी होगी। इससे इंदौर और जबलपुर के बीच की दूरी 68 से 150 किलोमीटर तक कम हो जाएगी। दिल्ली, प्रयागराज और वाराणसी जाने वाली ट्रेनों को नया और छोटा रास्ता मिलेगा। यात्रियों का करीब एक घंटे का समय बचेगा। इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत है इसकी रेल सुरंग। करीब 8.64 किलोमीटर लंबी यह टनल मध्यप्रदेश की सबसे लंबी रेलवे टनल होगी।
इंदौर-दाहोद रेल लाइन
यह भी करीब 205 किलोमीटर लंबी होगी। झाबुआ और अलीराजपुर जैसे आदिवासी जिलों को पहली बार सीधा रेल संपर्क मिलेगा। गुजरात के औद्योगिक इलाकों तक पहुंच आसान होगी। इस परियोजना का बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका है। टीही सहित कई सुरंगों और पुलों का निर्माण अंतिम चरण में है।
इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन
यह सबसे लंबी लाइन है, करीब 309 किलोमीटर। इससे इंदौर, धार, खरगोन और बड़वानी सीधे महाराष्ट्र से जुड़ेंगे। इंदौर और मुंबई के बीच रेल दूरी करीब 200 किलोमीटर घटेगी। सफर में साढ़े चार घंटे की बचत होगी। पीथमपुर के औद्योगिक क्षेत्र को भी इस लाइन से बड़ा फायदा होगा। माल परिवहन की लागत घटेगी। फिलहाल महाराष्ट्र में काम चल रहा है और मध्यप्रदेश के हिस्से में जमीन अधिग्रहण जारी है।
महू-खंडवा आमान परिवर्तन
यह लाइन करीब 142 किलोमीटर लंबी है। पुरानी मीटर गेज लाइन को ब्रॉड गेज में बदला जा रहा है। इससे इंदौर की दक्षिण भारत से सीधी रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी। डेड एंड स्टेशन की समस्या भी खत्म होगी। लंबी दूरी की एक्सप्रेस ट्रेनें और मालगाड़ियां आसानी से चल सकेंगी। वन विभाग जल्द ही पेड़ काटकर रेलवे को जमीन सौंपेगा।
क्या बदलेगा आम यात्री के लिए
इन चारों प्रोजेक्ट के पूरे होने के बाद इंदौर से पूर्वी, पश्चिमी, उत्तरी और दक्षिणी भारत सभी दिशाओं में सीधी ट्रेन कनेक्टिविटी होगी। आदिवासी इलाकों के लोगों को पहली बार ट्रेन का सफर नसीब होगा। कारोबारियों के लिए माल ढुलाई सस्ती और तेज होगी। इंदौर का डेड एंड स्टेशन का दर्जा खत्म होगा और यह एक बड़े रेल जंक्शन के रूप में उभरेगा।
FAQ
- इंदौर से कौन-सी 4 नई रेल लाइनें बनाई जाएंगी?
इंदौर-बुदनी, इंदौर-दाहोद, इंदौर-मनमाड़ और महू-खंडवा आमान परिवर्तन — ये चार परियोजनाएं हैं। इनसे इंदौर को पूर्वी, पश्चिमी और दक्षिणी भारत से सीधा रेल संपर्क मिलेगा। इनका लक्ष्य 2047 तक पूरा होना है। - इंदौर से मुंबई का सफर कितना आसान होगा?
इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन पूरी होने के बाद इंदौर और मुंबई के बीच रेल दूरी करीब 200 किलोमीटर घटेगी। यात्रा समय में साढ़े चार घंटे की बचत होगी। यह लाइन 309 किलोमीटर लंबी होगी।
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