इंदौर दवा व्यापारी से बड़ी ठगी: OTT सब्सक्रिप्शन के चक्कर में गंवाए एक लाख रुपए

Manya Jain | Jul 06, 2026, 14:01 IST
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इंदौर में ओटीटी सब्सक्रिप्शन बंद करने के चक्कर में दवा व्यापारी से ₹1.08 लाख की ठगी। गूगल से मिला फर्जी नंबर, ठगों ने 5 रुपए ट्रांसफर करवाकर मोबाइल हैक किया।




समझें क्या है पूरा मामला

  • इंदौर में एक दवा व्यापारी और उनकी पत्नी के साथ ऑनलाइन ठगी हुई।
  • उन्होंने ओटीटी सब्सक्रिप्शन बंद कराने के लिए गूगल पर नंबर खोजा।
  • यह नंबर फर्जी कस्टमर केयर का निकला।
  • ठगों ने 5 रुपए ट्रांसफर कराकर मोबाइल हैक कर लिया।
  • इसके बाद दोनों के खातों से 1.08 लाख रुपए निकाल लिए गए।

गूगल से मिला फर्जी नंबर

गोपाल कॉलोनी में रहने वाले निर्मल नवलानी दवा का कारोबार करते हैं। उन्होंने कई ओटीटी प्लेटफॉर्म के सब्सक्रिप्शन ले रखे थे। 4 जून को उन्होंने जियो हॉटस्टार का सब्सक्रिप्शन बंद कराना चाहा। उन्होंने गूगल पर कस्टमर केयर नंबर खोजा और उस पर कॉल कर दिया।



फोन उठाने वाले व्यक्ति ने खुद को कस्टमर सपोर्ट प्रतिनिधि बताया। उसने सब्सक्रिप्शन बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी। यह पूरा नंबर असल में फर्जी था।



5 रुपए से शुरू हुआ खेल

आरोपी ने कहा कि प्रक्रिया पूरी करने के लिए पहले 5 रुपए भेजने होंगे। निर्मल ने बिना शक किए गूगल पे से पैसे भेज दिए। कुछ ही देर में उनके मोबाइल की स्क्रीन बंद हो गई।



जब मोबाइल दोबारा चालू हुआ, तो लगातार बैंक ट्रांजेक्शन के मैसेज आने लगे। तब तक नुकसान हो चुका था।



दोनों खातों से निकले 1.08 लाख

सबसे पहले निर्मल के बैंक ऑफ बड़ौदा खाते से 8 हजार रुपए निकले। इसके तुरंत बाद 50 हजार रुपए की एक और निकासी हुई। कुल मिलाकर उनके खाते से 58 हजार रुपए गायब हो गए।



इसके बाद ठगों ने निर्मल की पत्नी शारदा के खाते को निशाना बनाया। उनके खाते से 20 हजार और फिर 30 हजार रुपए के दो अलग ट्रांजेक्शन हुए। इस तरह दोनों खातों से कुल 1 लाख 8 हजार रुपए की ठगी हो गई।



शक होते ही खाते फ्रीज कराए

जैसे ही निर्मल को ठगी का अंदेशा हुआ, उन्होंने तुरंत बैंक से संपर्क किया। उन्होंने अपने और पत्नी के दोनों खाते फ्रीज करवाए। इससे आगे और नुकसान होने से बच गया।



साइबर हेल्पलाइन से थाने तक

खाते फ्रीज कराने के बाद निर्मल ने साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। वहां से उन्हें जूनी इंदौर थाने भेजा गया। पुलिस ने उनकी शिकायत पर एफआईआर (FIR – First Information Report) दर्ज की।



अब पुलिस आरोपियों के बैंक खातों और ट्रांजेक्शन की डिटेल जुटा रही है। जांच अभी जारी है।



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