इंदौर में मेट्रो स्टेशन के आड़े आया तोतों का आशियाना, अफसर बोले- बसेरा बचाने में खर्च होंगे 400 करोड़!
तोतों का आशियाना बचाने 400 करोड़
दरअसल, याचिकाकर्ताओं की मांग है कि यहां लगे पुराने पेड़ों पर सैकड़ों तोते रहते हैं। इसलिए उनके घोंसले बचाने के लिए स्टेशन किसी दूसरी जगह बनाया जाए।
इसके जवाब में मेट्रो कंपनी ने साफ किया कि उन्होंने स्टेशन शिफ्ट करने के लिए तीन अलग-अलग जगहों की जांच-पड़ताल की थी। वे तीनों ही विकल्प तकनीकी और व्यावहारिक तौर पर सही नहीं पाए गए। वहीं अगर स्टेशन की जगह बदली जाती है, तो प्रोजेक्ट की लागत 400 करोड़ रुपए तक बढ़ जाएगी।
मेट्रो कंपनी ने बताए 3 विकल्प
मेट्रो अधिकारियों ने अदालत को बताया कि उन्होंने रानी सराय के अलावा तीन अन्य जगहों पर विचार किया था, लेकिन हर जगह गंभीर अड़चनें सामने आईं।
1. रीगल टॉकीज का इलाका
- इस जगह पर स्टेशन बनाने के लिए मिल्की-वे परिसर और 5 हजार वर्गमीटर निजी जमीन की जरूरत पड़ेगी।
- इस जमीन के अधिग्रहण से आसपास के होटल, सरकारी आवास और जज बंगले प्रभावित होंगे।
- जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में ही कम से कम 2 साल का समय लग जाएगा।
- इस विकल्प से करीब 400 करोड़ रुपए की लागत बढ़ेगी। साथ ही पूरा मेट्रो प्रोजेक्ट 3 से 4 साल पीछे चला जाएगा।
2. प्रीतमलाल दुआ सभागृह
- यहां काम शुरू होने से प्रीतमलाल दुआ सभागृह, महावीर स्तंभ, सिंगापुर मार्केट और अहिल्या पुस्तकालय को हटाना पड़ सकता है।
- निर्माण कार्य के दौरान हाईकोर्ट का बगीचा बुरी तरह प्रभावित होगा।
- काम चलने तक हाईकोर्ट के मुख्य गेट नंबर 1 और 2 को पूरी तरह बंद रखना पड़ेगा।
3. गांधी हॉल
- राजवाड़ा स्टेशन के निर्माण के चलते रूट में बदलाव करना संभव नहीं है।
- गांधी हॉल एक ऐतिहासिक धरोहर है और इसे तोड़ने या नुकसान पहुंचाने पर भारी जनविरोध झेलना पड़ेगा।
24 घंटे भारी ट्रैफिक के बीच तोतों का अनोखा बसेरा
बता दें कि रानी सराय और रीगल तिराहा पूरे शहर में ऐसी जगह है जहां दिन-रात भारी गाड़ियों की आवाजाही रहती है। इतने शोर और धुएं के बीच भी तोते बिना किसी डर के इन पेड़ों पर आकर डेरा जमाते हैं।
कुछ दिन पहले हाईकोर्ट के दो माननीय जज भी शाम को यहां का माहौल देखने पहुंचे थे। पर्यावरणविद् भालू मोंढे और वकील अभिनव धनोतकर ने उन्हें रानी सराय के 50 से 60 साल पुराने पेड़ दिखाए। विशेषज्ञों का कहना है कि नए लगाए गए पौधे पुराने पेड़ों की जगह नहीं ले सकते। पुराने पेड़ों के खोखले तनों में ही तोते सुरक्षित रहते हैं।
यह खबर क्यों जरूरी है?
यह खबर इसलिए जरूरी है क्योंकि इंदौर शहर में रानी सराय के पुराने पेड़ सिर्फ हरियाली नहीं हैं। इन पेड़ों पर सैकड़ों तोतों का बसेरा है। वहीं मेट्रो स्टेशन की जगह बदलने पर 400 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च बताया गया है। ऐसे में मामला पर्यावरण, वन्यजीव और बड़े विकास प्रोजेक्ट के बीच संतुलन से जुड़ा है। अदालत के सामने अब यह तय करना अहम होगा कि तोतों का प्राकृतिक आशियाना कैसे बचाया जाए।