सिंधी पंचायत की रिसर्च में सामने आया, क्यों टूट रहा रिश्तों का ताना बाना

Jitendra Shrivastava | May 15, 2026, 16:51 IST
Photograph: (THESOOTR)
इंदौर की सिंधी पंचायत ने 800 परिवारों के झगड़े सुलझाए हैं। इसमें 60% विवाद शारीरिक असंतुष्टि से जुड़े थे। काउंसलिंग के बाद टूटते परिवार फिर बस गए।

समझें पूरा मामला...

  • सिंधी पंचायत ने 800 से ज्यादा विवाद सुलझाए।
  • 60% दाम्पत्य केस में शारीरिक असंतोष था कारण।
  • डॉक्टरों और मनोवैज्ञानिकों से कराई काउंसलिंग।
  • 48% विवाद दाम्पत्य जीवन से जुड़े हुए थे।
  • 39% लड़कियां 22-29 आयु वर्ग में अविवाहित हैं।

इंदौर की सिंधी पंचायत (Sindhi Panchayat) ने एक अनूठी पहल की है। 17 जुलाई 2023 से शुरू इस मध्यस्थता केंद्र ने 800 से अधिक पारिवारिक विवादों को सुना। इनमें से 60% दाम्पत्य विवाद (marital disputes) फिजिकल रिलेशन में असंतुष्टि (physical relationship dissatisfaction) से जुड़े थे। परिवार दिवस पर जानें कैसे समाज एकजुट होकर घर बचा रहा है।



पत्नी ने मांगा था तलाक

इंदौर में एक महिला तलाक लेना चाहती थी। शादी के बाद से ही वह संतुष्ट नहीं थी। फिजिकल रिलेशन (physical relation) में असंतुष्टि उसकी मुख्य शिकायत थी। पति और परिवार रिश्ता बचाना चाहते थे।



विवाद धीरे-धीरे घर से बाहर आ गया। परिवार ने समाज की पंचायत से मदद मांगी। दोनों पक्षों को ध्यान से सुना गया। पत्नी के आरोपों की डॉक्टरों से जांच हुई। अंततः मामला सुलझा लिया गया। आज वे दोनों खुशी से साथ रह रहे हैं।



800 परिवारों की कहानी

15 मई को परिवार दिवस (Family Day) है। इस मौके पर सिंधी समाज की पहल सामने आई है। 17 जुलाई 2023 से मध्यस्थता केंद्र काम कर रहा है। अब तक 800 से अधिक विवादों की सुनवाई हो चुकी है।



इंदौर की आबादी में सिंधी समाज की बड़ी हिस्सेदारी है। समाज के पंचों ने बड़ी सूझ-बूझ दिखाई है। कई परिवार बिखरने की कगार पर थे। पंचायत की मदद से वे फिर एकजुट हुए। यह पहल पूरे देश के लिए प्रेरणा है।



60% मामलों में शारीरिक असंतोष

केंद्र के संस्थापक किशोर कोडवानी ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 48% विवाद दाम्पत्य जीवन से जुड़े हैं। 18% मामले पारिवारिक विवाद (family disputes) के थे।



17% संपत्ति और 12% आर्थिक मामले थे। 10% सामाजिक विवादों से संबंधित थे। दाम्पत्य मामलों में 60% केस शारीरिक असंतोष (sexual dissatisfaction) के थे। मेडिकल, मानसिक स्थिति और जीवनशैली कारण बनी। एक फीसदी मामले सुनवाई योग्य नहीं थे। ऐसे मामलों को निरस्त कर दिया गया।



indore sindhi panchayat


डॉक्टरों से कराई काउंसलिंग

हर मामला अलग प्रकृति का होता है। मध्यस्थता केंद्र ने अलग-अलग तरीके अपनाए। मेडिकल परिस्थितियों वाले मामलों में डॉक्टर बुलाए गए। समाज के ही चिकित्सकों ने परामर्श दिया। मनोवैज्ञानिक आधार के मामलों में काउंसलिंग (counselling) कराई गई। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मदद ली गई। जटिल मामलों में विशेषज्ञों की टीम बनाई गई। हर परिवार को व्यक्तिगत ध्यान दिया गया।



आर्थिक असमानता भी बनी वजह

कुछ झगड़े आर्थिक स्थिति से भी जुड़े थे। यदि लड़की संपन्न परिवार से हो। और लड़के का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हो। तो दोनों की जीवनशैली में अंतर आ जाता है। रीति-रिवाजों में भी फर्क पैदा होता है। यही अंतर विवादों की जड़ बनता है। पंचायत ने इन मामलों में भी सफलतापूर्वक मध्यस्थता की।



लड़कियां ज्यादा अविवाहित

सिंधी पंचायत ने विवाह सर्वे (marriage survey) भी कराया। अलग-अलग आयु वर्ग में डेटा इकट्ठा हुआ। 22 से 29 साल में 34% लड़के अविवाहित हैं। इसी उम्र में 39% लड़कियां अविवाहित हैं।



यानी लड़कियां 5% अधिक अविवाहित हैं। 30 से 40 साल में 60% लड़के अविवाहित हैं। इसी वर्ग में 57% लड़कियां अविवाहित हैं। यह आंकड़े समाज के लिए चिंता का विषय हैं। पंचायत इस पर भी कदम उठा रही है।



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