MIC सदस्य राजेंद्र राठौर बोले स्मार्ट सिटी के नाम पर इंदौर में अधिकारियों ने 1000 करोड़ का चूना लगाया

Sanjay Gupta | Aug 18, 2026, 19:34 IST
एमआईसी सदस्य राजेंद्र राठौर
स्मार्ट सिटी के नाम पर इंदौर में एक हजार करोड़ का खर्चा हुआ, लेकिन गोराकुंड में 40 करोड़ की सड़क केवल पानी लाइन फूटने से उखड़ गई। इस पर अब एमआईसी सदस्य राजेंद्र राठौर ने स्मार्ट सिटी के अधिकारियों पर जमकर आरोप लगाए हैं।

इंदौर के गोराकुंड में स्मार्ट सिटी कंपनी द्वारा बनवाई गई 40 करोड़ की सड़क उखड़ गई। पानी की लाइन फूटी तो पूरी सडक ही धंस गई। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत इंदौर में करीब एक हजार करोड़ का खर्च हुआ, लेकिन इसके काम लगातार सवालों के घेरे में हैं।



हालत यह है कि स्मार्ट सिटी के पास अभी फंड तक नहीं है और ठेकेदार अपने किए काम के भुगतान के लिए चक्कर काट रहे हैं। उधर mic सदस्य राजेंद्र राठौर ने खुलकर अधिकारियों पर आरोप लगाए हैं।



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स्मार्ट सिटी बोर्ड में यह होते हैं

स्मार्ट सिटी बोर्ड में चेयरमैन पर कलेक्टर पदेन होते हैं। वहीं निगमायुक्त पदेन एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर होते हैं। इसके साथ ही इसमें केंद्र व राज्य के विविध विभागों के अधिकारी नामिनी डायरेक्टर होते हैं।



राजेंद्र राठौर बोले एक हजार करोड़ का चूना लगाया

राठौर ने मंगलवार को आरोप लगाते हुए कहा कि स्मार्ट सिटी के तहत कामों की जांच होना चाहिए। स्मार्ट सिटी की सड़कें स्मार्ट नहीं है। पहले भी मैंने गोराकुंड की सड़क को लेकर महापौर और तत्कालीन निगमायुक्त प्रतिभा पाल को बताया था। लेकिन कुछ नहीं हुआ। पीएम, केंद्रीय मंत्री नगरीय प्रशासन सभी को पत्र लिखा था और बात हुई थी कि एसीएस स्तर की जांच कराएंगे. लेकिन उस जांच का भी पात नहीं चला। स्मार्ट सिटी के नाम पर एक हजार करोड़ खत्म कर चूना लगा दिया गया।



बड़े सपने दिखाए गए थे स्मार्ट सिटी में

राठौर ने कहा कि तत्कालीन अधिकारियों ने स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्ट का प्रेजेंटेशन देते समय खूब सपने दिखाए थे। कहा था कि खजूरी बाजार लंदन जैसा दिखेगा, लेकिन हालत खराब है। नेहरू पार्क में नौ करोड़ से काम हुआ, लेकिन वहां दस लाख का भी काम नहीं दिखता है। जैसी सड़कें स्मार्ट सिटी में बनी है और इसके लिए गुजरात के ठेकेदार आए,वह काम तो हमारे यहां पप्पू ठेकेदार जैसे लोग कर देते हैं।



स्मार्ट सिटी के पास वेतन तक के पैसे नहीं

राठौर ने कहा कि अब कहा जा रहा है लोन लेकर काम करेंगे, यानी दुकान चलाएंगे। अब कोई काम स्मार्ट सिटी के पास नहीं है. इसे बंद कर देना चाहिए। विज्ञापन बोर्ड की आय से तनख्वाह बांट रहे हैं। पूरे काम की जांच होना चाहिए, इसमें जमकर भ्रष्टाचार हुआ है। सभी सड़कें उखड़ रही है और डामर हम करवा रहे हैं। काम के नाम पर लीपापोती के सिवा कुछ नहीं हुआ, चाहे राजबाड़ा देख लो, चाहे गांधी हाल।



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