धारा 16 में स्वीकृत कॉलोनी पर TCP का पत्र, कॉलोनाइजर को राहत, प्रशासन उलझा
इंदौर का मास्टर प्लान अटका हुआ है। इसी के चलते 79 गांवों में विकास मंजूरी स्पेशल प्रावधान के तहत धारा 16 में हो रही है। हालांकि लंबे समय से यह भी रुकी हुई है। वहीं, इन कॉलोनियों में नक्शा संशोधन के केस उलझे हुए हैं।
इसी बीच एक कॉलोनी को लेकर मामला जिला प्रशासन इंदौर से टीएंडसीपी इंदौर तक गया और फिर एक लाइन का अभिमत आया। इससे कॉलोनाइजर तो खुश है लेकिन अब जिला प्रशासन असमंजस में है।
क्या है मामला
हिंगोनिया गांव में एक कॉलोनाइजर की दो कॉलोनियां हैं। ये कॉलोनी धारा 16 के तहत मंजूरी प्राप्त हैं। इसमें एक कॉलोनी में एलआईजी कैटेगरी (कम आय वालों के लिए) आरक्षित प्लॉट पर बिजली ग्रिड बना ली जो सर्विस एरिया में बननी थी। इसका कारण उन्होंने प्रशासन को बताया कि ग्रिड के ऊपर हाई टेंशन लाइन थी, इसलिए वहां नहीं कर सकते थे इसलिए शिफ्ट किया।
वहीं दूसरी पास लगी कॉलोनी में उन्होंने पानी की टंकी ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) कैटेगरी के लिए आरक्षित प्लॉट पर बना ली। कॉलोनाइजर ने प्रशासन से कहा कि वह ईडब्ल्यूएस, एलआईजी के लिए आरक्षित प्लॉटों की भरपाई सामान्य प्लॉट देकर करने के लिए तैयार है। लेकिन जिला प्रशासन ने कार्यपूर्णता प्रमाणपत्र रोकते हुए टीएंडसीपी से इस पर अभिमत मांगा।
धारा 16 में संशोधन मुश्किल, टीएंडसीपी ने यह लिखा
नियमानुसार यदि किसी कॉलोनी में कोई बदलाव स्वीकृत नक्शे से अलग होता है, तो वह टीएंडसीपी से संशोधित कराता है। इसके बाद प्रशासन मंजूरी देता है, लेकिन यह धारा 16 की विशेष मंजूरी थी जिसमें संशोधन नहीं हो रहा है।
इस पर प्रशासन के अभिमत संबंधी पत्र पर टीएंडसीपी ने एक लाइन का पत्र लिखा और कहा कि सर्विस एरिया और एलआईजी/ईडब्ल्यूएस के लिए आरक्षित एरिया (3-3 फीसदी) होना अनिवार्य होता है। यानी टीएंडसीपी ने एक लाइन यह लिखकर साफ कर दिया कि यदि कॉलोनाइजर अन्य सामान्य प्लॉट या अन्य जगह पर ईडब्ल्यूएस और एलआईजी को तय आरक्षित 3-3 फीसदी प्लॉट दे रहा है तो यह संभव है।
अब प्रशासन क्यों असमंजस में
अब प्रशासन टीएंडसीपी के पत्र के बाद असमंजस में है। क्या बिना टीएंडसीपी संशोधन के यह बदलाव संभव है? हालांकि जानकार कहते हैं कि नियम इस मामले में खामोश हैं और कुल एरिया से ही मतलब होता है। टीएंडसीपी प्लान के तहत सर्विस एरिया, एलआईजी, आदि के लिए कॉलोनी में प्रतिशत तय होता है।
वहीं, इसमें बदलाव होने पर प्रशासन द्वारा टीएंडसीपी संशोधन के लिए कहा जाता है। अब टीएंडसीपी के इस अभिमत से संशोधन की अनिवार्यता ही खत्म हो रही है। इसी पर अब जिला प्रशासन विचार कर रहा है कि कॉलोनी को अब विकास कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र दिया जाए या नहीं। वहीं कॉलोनाइजर के लिए एक रास्ता खुला है। ऐसे में कई बिल्डर इसी तरह की समस्याओं में उलझ रहे हैं। एक को मंजूरी होने पर अन्य के लिए रास्ता खुलेगा।
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