इंदौर के व्यापारी बोले UPI भुगतान में 0.4 प्रतिशत शुल्क के साथ GST भी लगेगा
केंद्र ने यूपीआई में दो हजार से अधिक के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगा दिया है। हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि यह पर्सन-टू-पर्सन पर नहीं है और 96 प्रतिशत लेन-देन इससे मुक्त रहेंगे। लेकिन व्यापारी इससे खुश नहीं हैं। मप्र की व्यावसायिक राजधानी इंदौर में व्यापारी विरोध कर रहे हैं।
फ्री बताना बंद करे सरकार- व्यापारी
इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अक्षय जैन ने सरकार के इसे फ्री बताने के प्रचार पर सवाल उठाते हुए कहा कि यूपीआई को पहले देश की जरूरत बताया गया था। व्यापारियों को डिजिटल भुगतान अपनाने के लिए प्रेरित किया गया और अब उसी डिजिटल व्यवस्था की कीमत व्यापारी से वसूली जा रही है। इसे मामूली शुल्क बताकर वास्तविक लागत को छोटा दिखाना उचित नहीं है।
इस पर जीएसटी भी लगेगा
व्यापारियों ने कहा कि दो हजार रुपए से ऊपर के भुगतान पर 0.4% एमडीआर होगा। वहीं एमडीआर पर 18% जीएसटी भी देना होगा। जैसे पांच हजार रुपए के यूपीआई भुगतान पर 0.4% एमडीआर की दर से 20 रुपए बनेंगे। इस पर 18% जीएसटी यानी 3.60 रुपए और जुड़ने पर कुल लागत 23.60 रुपए होगी। यानी प्रभावी लागत 0.472% तक पहुंचती है।
15 अक्टूबर से प्रभावी होगी दर
यह शुल्क 15 अक्टूबर 2026 से दो हजार रुपए से अधिक के पात्र पर्सन-टू-मर्चेंट (पी2एम) यूपीआई भुगतान पर लागू होगा। व्यापारियों का कहना है कि ग्राहक से शुल्क लेने का नहीं, बल्कि व्यापारी की लागत बढ़ने का भी मुद्दा है। जिस व्यापारी के कारोबार में दो हजार रुपए से ऊपर के भुगतान नियमित हैं, उसके लिए हर पात्र लेनदेन पर लागत जुड़ेगी।
सबसे बड़ा भ्रम यही है कि ग्राहक से शुल्क नहीं लिया जाएगा तो नुकसान किसी को नहीं होगा। ग्राहक से सीधे पैसा नहीं लिया जाएगा लेकिन व्यापारी की लागत बढ़ेगी तो वह कहीं तो असर डालेगी। जैन ने कहा कि सरकार स्वयं कह रही है कि एमडीआर टैक्स नहीं बल्कि भुगतान इकोसिस्टम का शुल्क है; फिर उस सेवा शुल्क पर जीएसटी का अतिरिक्त बोझ क्यों आ रहा है।
जीएसटी से मुक्त करो
एसोसिएशन ने मांग की कि दो हजार रुपए से अधिक के व्यापारिक यूपीआई भुगतान पर एमडीआर की व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाए और कम से कम एमडीआर पर लगने वाले 18% जीएसटी को हटाया जाए।
व्यापारियों का कहना है कि डिजिटल भुगतान को हतोत्साहित करने के बजाय सरकार को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिसमें डिजिटल अर्थव्यवस्था का विस्तार भी हो और छोटे-मझोले व्यापारियों की लागत भी न बढ़े।
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