2000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर चार्ज के खिलाफ व्यापारी, सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती
Amresh Kushwaha | Sept 17, 2026, 09:15 IST
यूपीआई लेनदेन पर फीस के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका
2000 रुपए से ज्यादा के यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर शुल्क को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। व्यापारी संगठन विरोध में उतरे हैं। जानें पूरा नियम, छूट, जीएसटी असर और सरकार का जवाब...
समझें क्या है पूरा मामला...
- 2000 रुपए से ज्यादा के यूपीआई लेनदेन पर 0.4% शुल्क लगेगा।
- इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।
- व्यापारी संगठनों ने फैसला वापस लेने की मांग की है।
- नियम 15 अक्टूबर से पूरे देश में लागू होगा।
- आम ग्राहकों के लिए यूपीआई पूरी तरह मुफ्त रहेगा।
याचिका में कहा गया है कि यह शुल्क व्यापारियों पर जबरन थोपा गया है। इससे पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम एक्ट यानी पीएसएस एक्ट (Payment and Settlement Systems Act) 2007 की संवैधानिक वैधता पर भी सवाल उठा है। हालांकि कोर्ट ने अभी सुनवाई की तारीख तय नहीं की है।
कोर्ट में याचिका दायर
कैट की मांग और चेतावनी
इन क्षेत्रों में व्यापारियों का नेट प्रॉफिट मार्जिन सिर्फ 0.5% से 1% तक रहता है। ऐसे में 0.4% का एमडीआर मुनाफे का बड़ा हिस्सा छीन लेगा। कैट ने शुल्क मुक्त लेनदेन की सीमा 10 हजार या 25 हजार रुपए तक बढ़ाने की मांग की है। दिल्ली के व्यापारी संगठनों ने साफ कहा है कि यदि शुल्क वापस नहीं लिया गया तो वे कैश लेनदेन पर लौट जाएंगे। बड़े भुगतानों के लिए वे चेक या नकद का इस्तेमाल करने का आग्रह करेंगे।
पैनल में कांग्रेस सांसद
समिति ने यह भी कहा था कि इसे बिना देरी लागू किया जाना चाहिए। इस समिति में कांग्रेस सांसद पी. चिदंबरम, मनीष तिवारी और गौरव गोगोई शामिल रहे हैं। समिति में किशोरी लाल और के. गोपानाथ भी सदस्य थे। सरकार का कहना है कि पांच कांग्रेस सांसद इस सिफारिश को मंजूरी देने वाले पैनल में मौजूद थे।
एमडीआर पर जीएसटी भी
हालांकि जीएसटी में रजिस्टर्ड व्यापारी बाद में इनपुट टैक्स क्रेडिट का क्लेम कर सकेंगे। इससे उनकी कुछ लागत वापस भी मिल सकती है। फिर भी छोटे और असंगठित व्यापारियों के लिए यह राहत आसान नहीं होगी।
सरकार अड़ी, नहीं होगी वापसी
वित्त मंत्रालय ने यह भी कहा है कि यह फैसला किसी अमेरिकी दबाव में नहीं लिया गया। भारत के यूपीआई से जुड़े नीतिगत फैसले पूरी तरह स्वतंत्र रूप से लिए जाते हैं।
इंदौर के व्यापारी भी MDR के विरोध में
एसोसिएशन के अध्यक्ष अक्षय जैन ने बताया कि 18 सितंबर 2026 से शहर की विभिन्न दुकानों पर UPI पर मर्चेंट फीस का विरोध संबंधी पोस्टर लगाए जाएंगे। उनका कहना है कि डिजिटल भुगतान आज व्यापारिक लेन-देन का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। ऐसे में UPI भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क का सीधा असर व्यापारी और ग्राहक दोनों पर पड़ सकता है।
अप्रत्यतक्ष रूप में पड़ेगा उपभोक्ताओं पर असर
उनका कहना है कि व्यापारी यह लागत उत्पाद या सेवा की कीमत में जोड़ सकते हैं। इससे कीमतें थोड़ी बढ़ सकती हैं। बड़े लेनदेन करने वाले व्यापारी ग्राहकों को दूसरे भुगतान विकल्प अपनाने के लिए भी कह सकते हैं।
नया नियम क्या कहता है
वित्त मंत्रालय ने साफ किया है कि आम ग्राहकों के लिए यूपीआई पूरी तरह मुफ्त रहेगा। दोस्तों या परिवार को पैसे भेजने पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। दुकान पर क्यूआर कोड से पेमेंट करने पर भी ग्राहक से कुछ नहीं लिया जाएगा।
किन पर लगेगा चार्ज
बड़े लेनदेन पर सीमा
छोटे दुकानदारों को राहत
जरूरी सेवाओं में छूट
स्कूल और यूनिवर्सिटी की फीस पर भी सिर्फ पांच रुपए चार्ज लगेगा। रेलवे के मामले में यह चार्ज यात्री नहीं, बल्कि रेलवे खुद चुकाएगा। दुकानदारों को अपने पुराने क्यूआर कोड बदलने की भी जरूरत नहीं होगी।
चार्ज क्यों लगाया गया
सरकार का कहना है कि जमा होने वाले एमडीआर का 5% हिस्सा एक खास डेवलपमेंट फंड में जाएगा। इस फंड से छोटे शहरों और गांवों में डिजिटल पेमेंट नेटवर्क मजबूत किया जाएगा। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्मों के मुताबिक इससे पेमेंट इंडस्ट्री को सालाना 5 हजार से 22 हजार करोड़ रुपए तक नया राजस्व मिल सकता है।
ग्राहक से वसूली गैरकानूनी
विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ बड़े कारोबारी यह लागत कीमत में जोड़ सकते हैं। छोटे दुकानदारों को भी डर है कि आगे चलकर लागत बढ़ सकती है। अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और 15 अक्टूबर से लागू होने वाले इस नियम पर टिकी है।
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