मौत के बाद भी भ्रष्टाचार के आरोप से मुक्ति नहीं, ट्रेजरी ऑफिसर की 3 साल की सजा बरकरार
इंदौर के ट्रेजरी ऑफिसर ओमप्रकाश मुंगलेवाल का निधन अक्टूबर 2021 में हो चुका है। वह लोकायुक्त द्वारा सात हजार रुपए की रिश्वत लेने के मामले में रंगे हाथ पकड़े गए थे। निचली कोर्ट से आरोप सही पाए गए और सजा सुनाई गई। मामला हाईकोर्ट गया, लेकिन वहां मौत के बाद भी सजा बरकरार रखी गई।
यह है मामला
घटनाक्रम: ऐसे हुआ था पूरा ट्रैप
सितंबर 2015 में सब इंजीनियर शैलेंद्र अग्रवाल रिटायर हुए थे। पेंशन से जुड़े काम के लिए वह इंदौर जिला कोषालय पहुंचे। आरोप है कि उनका केस जल्दी निपटाने के लिए उनसे 10 हजार रुपए रिश्वत मांगी गई। बाद में यह रकम 7 हजार रुपए तय हुई। इसमें से 2 हजार रुपए उसी दिन दे दिए गए। इसके बाद शैलेंद्र अग्रवाल ने लोकायुक्त इंदौर में शिकायत कर दी।
शिकायत के आधार पर लोकायुक्त ने 4 सितंबर 2015 को ट्रैप की कार्रवाई की और ओमप्रकाश मुंगेलवाल को 5 हजार रुपए रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया। मामले की सुनवाई के बाद जिला कोर्ट ने 31 अक्टूबर 2018 को मुंगेलवाल और सहायक ट्रेजरी अधिकारी राजेंद्र शर्मा को दोषी मानते हुए सजा सुनाई। इसके बाद अक्टूबर 2021 में ओमप्रकाश मुंगेलवाल का निधन हो गया।
परिजन ने हाईकोर्ट में की अपील, मृत्यु प्रमाणपत्र लगाया
सजा के खिलाफ अपील में मामला इंदौर हाईकोर्ट पहुंचा। मुंगेलवाल की मौत को लेकर परिवार ने मृत्यु प्रमाण पत्र और 11 दिन के इलाज के दस्तावेज कोर्ट में पेश किए। इसके बाद भी राहत नहीं मिली।
हाईकोर्ट ने साफ कहा, नरमी का आधार नहीं
जस्टिस जय कुमार पिल्लई की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि मामले में राहत देने की कोई वजह नहीं बनती। कोर्ट ने माना कि हाथ और पैंट की जेब की जांच में रिश्वत लेने की पुष्टि हुई है। इसके अलावा गवाहों के बयान भी इस मामले में अहम रहे।
वहीं सहायक ट्रेजरी अधिकारी राजेंद्र शर्मा के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिले। उनके पास से रिश्वत की रकम बरामद नहीं हुई थी और आवाज की पहचान के लिए भी पर्याप्त वैज्ञानिक जांच नहीं हुई थी। इसी वजह से हाईकोर्ट ने उन्हें राहत दे दी।
30 हजार की रिश्वत में सचिव को 4 साल की सजा
इसी तरह रिश्वत के एक अन्य मामले में अलीराजपुर के थान सिंह बिलवाल को भी कोर्ट ने सजा सुनाई है। वह ग्राम पंचायत ऊटी, जनपद उदयगढ़ में सहायक सचिव के पद पर पदस्थ थे।
मामले में शिकायतकर्ता बालू लक्ष्मण ने लोकायुक्त में शिकायत की थी। आरोप था कि प्रधानमंत्री आवास योजना की कुटीर की बची हुई राशि जारी करने के बदले सचिव ने 30 हजार रुपए रिश्वत मांगी थी।
शिकायत के बाद लोकायुक्त ने 30 जनवरी 2019 को कार्रवाई करते हुए थान सिंह बिलवाल को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया था। विशेष न्यायालय अलीराजपुर ने मामले की सुनवाई के बाद उन्हें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में दोषी माना। कोर्ट ने उन्हें 4-4 साल की सजा और 15-15 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है।
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