देश में पहली बार किसी IPS अफसर पर 'डिमोशन' का खतरा, EWS सर्टिफिकेट ने खड़ा किया कानूनी पेंच
मध्यप्रदेश की मूल निवासी और केरल कैडर की आईपीएस अफसर निमिषी त्रिपाठी के खिलाफ EWS सर्टिफिकेट को लेकर जांच चल रही है। यह मामला इसलिए संवेदनशील है, क्योंकि यदि जांच में सर्टिफिकेट केंद्र सरकार के नियमों के खिलाफ पाया गया तो देश में पहली बार किसी आईपीएस अधिकारी को डिमोट करके लोअर सर्विस में भेजा जा सकता है।
मध्यप्रदेश के खरगोन जिले के सनावद की रहने वाली निमिषी त्रिपाठी 2023 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं। वर्तमान में वे केरल में पदस्थ हैं। उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा 2023 (UPSC 2023) में 368वीं रैंक हासिल की थी।
EWS कोटे के तहत उन्हें भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) आवंटित हुई है। आईपीएस निमिषी त्रिपाठी कीनियुक्ति के बाद सब कुछ सामान्य चल रहा था, लेकिन इसी बीच उनके EWS सर्टिफिकेट को लेकर सरकार के पास शिकायत पहुंची।
अब शिकायत के आधार पर भारत सरकार ने मामले की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल मध्यप्रदेश का गृह विभाग इस पूरे प्रकरण की पड़ताल कर रहा है।
EWS नियमों में अंतर से उलझा पेंच
इस पूरे मामले का सबसे अहम पहलू है EWS सर्टिफिकेट के नियमों में केंद्र और राज्य के बीच अंतर। भारत सरकार के नियमों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति या उसके परिवार के पास 1000 वर्ग फीट या उससे अधिक का प्लॉट है तो वह EWS श्रेणी में नहीं आता। यानी केंद्रीय सेवाओं के लिए यह सख्त सीमा है।
वहीं, मध्यप्रदेश सरकार के नियम अलग हैं। नगर निगम क्षेत्र में 1500 वर्ग फीट तक का प्लॉट होने पर भी व्यक्ति EWS में आ सकता है। नगर पालिका क्षेत्र में 1200 वर्ग फीट तक की सीमा मान्य है। नगर पंचायत क्षेत्र में 1000 वर्ग फीट तक का प्लॉट होने पर भी पात्रता बनी रहती है।
निमिषी त्रिपाठी के मामले में क्या?
निमिषी त्रिपाठी के मामले में यह तथ्य सामने आया है कि उनका परिवार नगर पालिका क्षेत्र में निवासरत है। उनकी मां ने करीब 1000 वर्ग फीट का प्लॉट खरीदा था और यह खरीद UPSC परीक्षा से पहले की गई थी। राज्य के नियमों के अनुसार वे EWS श्रेणी में पात्र थीं और इसी आधार पर उन्हें प्रमाण पत्र जारी किया गया।
केंद्र की नौकरी में राज्य का सर्टिफिकेट क्यों बना सवाल?
यहीं से मामला उलझ जाता है। नियम कहते हैं कि यदि कोई अभ्यर्थी केंद्र सरकार की नौकरी के लिए परीक्षा देता है तो उसके लिए केंद्र सरकार के प्रारूप (Central Format) वाला EWS सर्टिफिकेट अनिवार्य होता है।
EWS सर्टिफिकेट दो तरह के होते हैं
1. केंद्रीय प्रारूप: UPSC, SSC, रेलवे और IIT/NIT जैसे केंद्रीय संस्थानों के लिए यही मान्य होता है।
2. राज्य प्रारूप: केवल राज्य सरकार की नौकरियों और परीक्षाओं के लिए यह सर्टिफिकेट मान्य होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, निमिषी त्रिपाठी का सर्टिफिकेट नकली नहीं है। यह राज्य सरकार के नियमों के अनुसार विधिवत जारी किया गया है, लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि क्या उन्हें केंद्र सरकार की परीक्षा में राज्य प्रारूप वाला सर्टिफिकेट इस्तेमाल करना चाहिए था? यही तकनीकी, लेकिन गंभीर गलती अब उनके करियर पर भारी पड़ सकती है।
दो एंगल से जांच
मध्यप्रदेश गृह विभाग इस मामले की दो प्रमुख एंगल से जांच कर रहा है। एक तो क्या सर्टिफिकेट फर्जी है? और दूसरा क्या गलत प्रारूप का सर्टिफिकेट इस्तेमाल किया गया? सूत्रों के अनुसार प्रारंभिक जांच में पता चला है कि सर्टिफिकेट फर्जी नहीं है। इसे विधिवत तरीके से जारी किया गया था।
इन सबके बीच विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही सर्टिफिकेट सही हो, उसका उपयोग गलत संदर्भ में किया गया हो सकता है। यानी केंद्र सरकार की नौकरी के लिए राज्य का सर्टिफिकेट लगाना नियमों के खिलाफ माना जा सकता है।
पुराने चयन पर भी सवाल
पिछले दिनों मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर कुछ यूजर्स ने निमिषी त्रिपाठी के चयन को लेकर सवाल उठाए हैं। दावा किया गया कि उनका चयन पहले इंडियन सिविल अकाउंट्स सर्विस (ICAS) में भी EWS कोटे से हुआ था।
2020 में वे EWS श्रेणी में चयनित हुईं और बाद में 2023 में भी इसी श्रेणी का लाभ लिया। अब इसे लेकर सवाल यह उठाया जा रहा है कि जब उनके पिता वन विभाग में फॉरेस्ट गार्ड के पद पर कार्यरत थे और वे पहले से सरकारी सेवा में थीं तो क्या वे दोबारा EWS श्रेणी के लिए पात्र थीं?
कलेक्टर ने सौंपी रिपोर्ट
इस मामले में खरगोन कलेक्टर आईएएस भव्या मित्तल ने जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। उन्होंने कहा है कि अब अंतिम निर्णय सरकार के स्तर पर ही लिया जाएगा। यानी अब नजरें केंद्र सरकार के उस फैसले पर टिकी हैं, जो निमिषी त्रिपाठी के करियर को तय करेगा। वहीं, केंद्र सरकार की यह कार्रवाई भविष्य में ऐसे सभी मामलों की दिशा तय करने वाली होगी।
अगर EWS रद्द हुआ तो क्या होगा?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि निमिषी का EWS सर्टिफिकेट अमान्य घोषित होता है तो क्या उनकी नौकरी चली जाएगी? विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसा होने की संभावना कम है। क्योंकि उन्होंने UPSC परीक्षा पास की है और उनकी रैंक भी है, लेकिन चूंकि उन्हें IPS सेवा EWS कोटे के आधार पर मिली थी, इसलिए यदि यह कोटा रद्द होता है तो उनकी सेवा बदल सकती है।
संभावना यह है कि उन्हें उनकी रैंक के अनुसार lower service जैसे इंडियन रेवेन्यू सर्विस (IRS) आदि में भेजा जा सकता है। यानी नौकरी बरकरार रहेगी, लेकिन सेवा और पद दोनों बदल सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो यह देश में संभवत: पहली बार होगा, जब किसी आईपीएस अधिकारी को इस तरह डिमोट किया जाएगा।
कौन हैं निमिषी त्रिपाठी
आपको बता दें कि निमिषी त्रिपाठी की कहानी संघर्ष और सफलता की मिसाल मानी जाती रही है। वे मध्यप्रदेश के छोटे कस्बे सनावद से आती हैं। उनके पिता अवधेश त्रिपाठी वन विभाग में फॉरेस्ट गार्ड हैं। उनकी मां शैवालिनी त्रिपाठी गृहिणी हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई सनावद से ही पूरी की है। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के इंद्रप्रस्थ कॉलेज से आगे की पढ़ाई की है।
कोरोना काल में उन्होंने घर पर रहकर तैयारी की और पहली बार UPSC में 622वीं रैंक हासिल की। इस रैंक के आधार पर उनका चयन इंडियन सिविल अकाउंट्स सर्विस (ICAS) में हुआ और वे वित्त मंत्रालय, दिल्ली में पदस्थ रहीं। इसके बाद उन्होंने दोबारा प्रयास किया और 2023 में 368वीं रैंक हासिल कर IPS बनीं। अप्रैल 2025 को गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, उन्हें केरल कैडर आवंटित किया गया है।
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