विभागीय कार्रवाई की देरी से IPS प्रमोशन पर संकट, CAT ने ASP को दी अंतरिम राहत

Neel Tiwari | Jun 24, 2026, 22:22 IST
ASP संदीप मिश्रा को दी अंतरिम राहत
रीवा में पदस्थ अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संदीप मिश्रा को राहत मिली है। उन्हें आईपीएस पदोन्नति से पहले यह राहत दी गई है। केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) जबलपुर में मामला सुना गया। विभागीय कार्रवाई में देरी को गंभीर माना गया है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • रीवा में पदस्थ अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संदीप मिश्रा 1998 बैच के राज्य पुलिस सेवा अधिकारी हैं।
  • वर्ष 2010 में जारी कारण बताओ नोटिस का निराकरण वर्ष 2018 में किया गया था।
  • संदीप मिश्रा का दावा है कि विभागीय कार्रवाई जानबूझकर लंबी खींची गई।
  • 25 जून 2026 को होने वाली IPS पदोन्नति DPC में उनका नाम विचारार्थ आना है।
  • CAT जबलपुर ने अंतरिम आदेश देकर उन्हें DPC में शामिल करने और परिणाम सीलबंद कवर में रखने के निर्देश दिए हैं।

IPS पदोन्नति से पहले शुरू हुई कानूनी लड़ाई

रीवा में पदस्थ अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संदीप मिश्रा, मध्य प्रदेश राज्य पुलिस सेवा के वर्ष 1998 बैच के अधिकारी हैं। सेवा नियमों के अनुसार वह कई वर्ष पहले ही भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में पदोन्नति के लिए पात्र हो चुके थे। हालांकि मध्य प्रदेश में लंबे समय तक पदों की उपलब्धता और समय पर विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठकें नहीं होने के कारण उनका मामला आगे नहीं बढ़ सका। अब 25 जून 2026 को प्रस्तावित DPC में उनका नाम विचारार्थ आने वाला है, लेकिन विभागीय दंड उनके लिए बाधा बनता दिखाई दे रहा था।



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2010 के नोटिस का फैसला 2018 में

अधिकरण में दायर याचिका में संदीप मिश्रा ने कहा कि उन्हें वर्ष 2010 में कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया था। सामान्यतः ऐसे मामलों का निराकरण उचित समय सीमा में किया जाना चाहिए था, लेकिन उनके मामले को वर्षों तक लंबित रखा गया और अंततः वर्ष 2018 में निर्णय पारित किया गया। याचिकाकर्ता का आरोप है कि इस असामान्य देरी के कारण अब उन्हें IPS पदोन्नति की प्रक्रिया में नुकसान उठाना पड़ सकता है और उनका नाम DPC में प्रभावी रूप से विचार से बाहर हो सकता है।



देरी का खामियाजा अधिकारी क्यों भुगते?

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता पंकज दुबे एवं अधिवक्ता अक्षय खंडेलवाल ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण, जबलपुर के समक्ष पक्ष रखा। उन्होंने तर्क दिया कि विभागीय कार्रवाई को अनावश्यक रूप से लंबा खींचे जाने का दुष्परिणाम अब अधिकारी को भुगतना पड़ रहा है। अधिकरण ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए यह संकेत दिया कि यदि विभागीय प्रक्रिया में असामान्य देरी हुई है तो उसका प्रभाव पदोन्नति के अवसरों पर पड़ना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।



DPC में होगा विचार, लेकिन फैसला रहेगा सीलबंद

मामले की सुनवाई के बाद केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण ने अंतरिम राहत देते हुए निर्देश दिया कि संदीप मिश्रा को 25 जून को होने वाली DPC में विचारार्थ शामिल किया जाए। हालांकि उनके संबंध में DPC द्वारा लिया गया निर्णय फिलहाल "सीलबंद कवर" (Sealed Cover) में रखा जाएगा। इसका मतलब है कि पदोन्नति पर अंतिम निर्णय न्यायाधिकरण में लंबित मामले के परिणाम के अधीन रहेगा।



केंद्र और राज्य सरकार से मांगा जवाब

मामले में अधिकरण ने मध्य प्रदेश सरकार तथा केंद्र सरकार दोनों से जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई के लिए 25 अगस्त 2026 की तारीख निर्धारित की गई है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि विभागीय कार्रवाई में हुई देरी को लेकर सरकार क्या जवाब देती है और क्या यह मामला संदीप मिश्रा के IPS बनने के रास्ते की सबसे बड़ी बाधा साबित होगा या फिर CAT का यह अंतरिम आदेश उनके लिए राहत का रास्ता खोलेगा।



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