बंजर जमीन में लाए हरियाली: आईपीएस राजा बाबू सिंह को मिला राज्य जैव विविधता पुरस्कार 2025
भारतीय पुलिस सेवा के इतिहास में यह पहली बार हुआ है। किसी आईपीएस अधिकारी को पर्यावरण बहाली के लिए राज्य जैव विविधता पुरस्कार मिला हो। यह सम्मान 1994 बैच के मध्य प्रदेश कैडर के आईपीएस राजा बाबू सिंह को दिया गया है।
मध्य प्रदेश राज्य बायो डायवर्सिटी बोर्ड ने यह पुरस्कार उनके पुलिस इको प्रोजेक्ट पीटीएस (MP Police Training School) तिघरा, ग्वालियर के लिए दिया।
बंजर जमीन बनी हरी-भरी धरती
ग्वालियर के पीटीएस तिघरा में करीब 172 एकड़ जमीन पहले बंजर पड़ी थी। राजा बाबू सिंह की अगुवाई में इस पूरी जमीन को एक हरे-भरे इकोसिस्टम (Ecosystem) में तब्दील कर दिया गया।
इसके लिए वैज्ञानिक तरीकों से पारिस्थितिकी बहाली (Ecological Restoration) का काम किया गया। स्थानीय समुदाय की भागीदारी इस पूरे प्रोजेक्ट की असली ताकत रही।
15 हजार पौधे, जमीन की नई पहचान
इस प्रोजेक्ट के तहत 15 हजार से ज्यादा देसी और फलदार पौधे लगाए गए। इनमें खेजड़ी, पीलू, नीम और गूलर जैसे पेड़ शामिल हैं। इसके अलावा औषधीय पौधे भी लगाए गए। वेटिवर (Vetiver) घास भी बड़े पैमाने पर लगाई गई। इससे मिट्टी की सेहत बेहतर हुई, पानी का संरक्षण हुआ और कार्बन अवशोषण (Carbon Sequestration) में मदद मिली।
सिर्फ पेड़ लगाना नहीं, बहुत कुछ और भी
यह प्रोजेक्ट सिर्फ पौधरोपण तक सीमित नहीं था। इसमें वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) के ढांचे भी बनाए गए। मौसमी नालों पर बंधान बनाए गए। बीज प्रसारण और चॉप-एंड-ड्रॉप (Chop-and-Drop) तकनीक से खराब हो चुकी जमीन को फिर से जिंदा किया गया। पक्षियों, तितलियों और स्थानीय जैव विविधता (Biodiversity) को बचाने की भी कोशिश की गई। इस पूरे काम ने यह साबित किया कि पुलिस भी पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका निभा सकती है।
जीरो बजट, बड़ा बदलाव
सबसे खास बात यह है कि यह पूरा प्रोजेक्ट जीरो बजट मॉडल पर चला। यानी सरकारी खजाने से अलग से कोई बड़ी रकम खर्च नहीं हुई। सामुदायिक भागीदारी से यह काम पूरा हुआ। यह मॉडल अब देशभर के लिए एक उदाहरण बन गया है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि इच्छाशक्ति हो तो बिना पैसे के भी बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं।
अब और जगहों पर भी यही काम
आईपीएस राजा बाबू सिंह का यह मिशन ग्वालियर तक सीमित नहीं रहा। अब इसी तरह के प्रोजेक्ट पीटीएस सागर, इंदौर की दातूनी रेंज और देवास हिल पर भी शुरू हो चुके हैं। इसके साथ ही उज्जैन सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए उज्जैन में एक बड़ा अभियान छेड़ा गया है। इसके तहत जलाशयों के आसपास एक लाख वेटिवर घास की पत्तियां लगाने का लक्ष्य रखा गया है। यह न सिर्फ पर्यावरण बल्कि कुंभ के लिए भी जरूरी है।
पुलिस और पर्यावरण का नया रिश्ता
राजा बाबू सिंह ने यह साबित कर दिया कि वर्दी का काम सिर्फ कानून-व्यवस्था तक नहीं है। पर्यावरण को बचाना भी समाज की रक्षा करना है। उनका यह प्रोजेक्ट अब एक जन आंदोलन की शक्ल ले रहा है। जब पुलिस, जनता और प्रकृति मिलकर काम करें तो नतीजे कितने बेहतरीन हो सकते हैं, यह इस प्रोजेक्ट से स्पष्ट हो गया है।
यह खबर क्यों जरूरी है
यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 48-A के तहत पर्यावरण संरक्षण की भावना को जमीन पर उतारने का एक ठोस उदाहरण है। IPS राजा बाबू सिंह ने यह सिद्ध किया कि सरकारी तंत्र का हिस्सा होते हुए भी बिना अतिरिक्त बजट के बड़े सामाजिक बदलाव संभव हैं। जलवायु संकट के इस दौर में जीरो बजट पर्यावरण बहाली का यह प्रयोग एक मार्गदर्शक दस्तावेज बन सकता है।
FAQ
- आईपीएस राजा बाबू सिंह को कौन सा पुरस्कार मिला है और
आईपीएस अधिकारी राजा बाबू सिंह को मध्यप्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा 'राज्य जैव विविधता पुरस्कार 2026' (State Biodiversity Award) दिया गया है। - यह मध्यप्रदेश राज्य जैव विविधता पुरस्कार क्यों खास है?
यह पुरस्कार इसलिए खास है क्योंकि भारतीय पुलिस के इतिहास में पहली बार किसी आईपीएस अधिकारी को पर्यावरण बहाली और प्रकृति संरक्षण के कार्यों के लिए यह प्रतिष्ठित सम्मान मिला है। - वेटिवर घास क्या है और उज्जैन सिंहस्थ 2028 में इसका क्या उपयोग होगा?
वेटिवर (Vetiver) एक विशेष प्रकार की औषधीय घास होती है, जिसकी जड़ें मिट्टी को मजबूती से पकड़ती हैं और पानी को साफ करने में मदद करती हैं।
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