एमपी की अर्थव्यवस्था पर ईरान-इजराइल युद्ध का असर, व्यापारी और किसान झेल रहे करोड़ों को नुकसान
ईरान-इजराइल युद्ध का असर अब मध्यप्रदेश तक पहुंच चुका है। निर्यात रुकने लगे हैं और गैस सप्लाई भी प्रभावित हो रही है। इससे किसान, व्यापारी और आम लोगों को परेशानी हो रही है।
इस स्थिति का आकलन करने के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने आज 10 मार्च को एक बैठक बुलाई है। इस बैठक में ईंधन भंडारण और खाद्य सुरक्षा की समीक्षा की जाएगी। राज्य में पेट्रोल-डीजल के स्टॉक पर अब कड़ी नजर रखी जा रही है।
कृषि क्षेत्र में नुकसान
बाड़वानी जिले के केला किसानों को इस बार सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। नर्मदा घाटी के केले पहले खाड़ी देशों जैसे ईरान, इराक, बहरीन और यूएई में भेजे जाते थे। अब युद्ध की वजह से इनका निर्यात रुक गया है। इसके कारण कीमतें 25 रुपये प्रति किलो से घटकर 8-9 रुपये तक रह गई है। ये कीमत अब किसानों के लिए उत्पादन की लागत से भी कम है।
हजारों एकड़ में फैले केला बागान अब प्रभावित हो गए हैं। किसानों का कहना है कि उर्वरक और श्रम लागत तो बढ़ी है, लेकिन बाजार में घरेलू आपूर्ति ज्यादा होने की वजह से भाव गिर गए हैं। व्यापारियों का कहना है कि सिर्फ जिला स्तर पर 200 टन निर्यात रुकने से उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
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गिरने लगे धान के दाम
जंग का असर चावल पर भी देखने को मिला है। खासकर नर्मदापुरम जिले में बासमती चावल का व्यापार बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। समुद्री रास्ता बंद होने के कारण माल बाहर नहीं भेजा जा रहा है। इसके चलते पिपरिया के कारखानों में करोड़ों रुपए का चावल फंसा हुआ है।
इन कारखानों से रोजाना 20 से 25 टन बासमती चावल खाड़ी देशों में भेजा जाता था। अब माल का उठाव नहीं हो पा रहा है, जिससे गोदाम भर गए हैं। युद्ध के पहले दिन से ही धान के दाम गिरने लगे थे। इससे व्यापारी और किसान दोनों परेशान हैं।
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व्यापार पर पड़े झटके
भोपाल के इत्र बाजार में भी युद्ध की मार देखने मिली है। लगभग 70% की भारी गिरावट आ गई है। खासकर जुमेराती गेट के पास स्थित 100 साल पुरानी दुकानों का व्यापार खाड़ी देशों में नहीं हो पा रहा है। व्यापारी सैयद साजिद अली का कहना है कि रमजान से पहले उनका कारोबार सिर्फ 30% रह गया है।
कपड़ा उद्योग, ड्रायफ्रूट्स के बढ़े दाम
बुरहानपुर के कपड़ा उद्योग में यार्न (20-23, 50-60 काउंट) के दाम भी बढ़ गए हैं। रसायनों और कच्चे माल के आयात में दिक्कतें आ रही हैं। इसके अलावा ड्रायफ्रूट्स (खजूर) के दाम भी 20-40% तक बढ़ गए हैं, जो रमजान और ईद से पहले बाजार को और प्रभावित कर रहा है।
ऊर्जा संकट पर युद्ध का असर
इजराइल ईरान युद्ध का असर अब गैस सप्लाई पर भी दिखने लगा है। सोमवार, 9 मार्च से ऑयल कंपनियों ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की डिलीवरी रोक दी है। इसका सीधा असर होटल, रेस्त्रां, मैरिज गार्डन और छोटे-बड़े उद्योगों पर पड़ सकता है।
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यात्रा और अन्य प्रभाव
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का सीधा असर अब हवाई यात्रियों की बुकिंग पर भी दिखने लगा है। हर साल हजारों लोग मध्यप्रदेश से खाड़ी देशों में घूमने जाते हैं, लेकिन इस बार सुरक्षा कारणों से लोग अपनी टिकटें रद्द करवा रहे हैं। इससे टूरिज्म इंडस्ट्री को करोड़ों का नुकसान हो रहा है। एयरस्पेस बंद होने के कारण मध्यप्रदेश के 750 से ज्यादा यात्री खीड़ी देशों में फंसे हैं।
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