जबलपुर कोर्ट में बड़ा खुलासा: पुलिसकर्मी खुद बने ‘अधिवक्ता’, जुर्माने से ज्यादा वसूली करते पकड़े गए
News In short
- जिला एवं सत्र न्यायालय जबलपुर में पुलिसकर्मी चालान मामलों में खुद ही ‘अधिवक्ता’ की भूमिका निभाते पकड़े गए।
- आरोप है कि जुर्माना राशि से अधिक पैसे लेकर खुद ही ऑनलाइन फाइन जमा किया जा रहा था।
- कोर्ट नंबर 2, CJM के समक्ष 7 समरी ट्रायल मामलों में गड़बड़ी सामने आई।
- पकड़े जाने पर पुलिसकर्मियों द्वारा अधिवक्ताओं से अभद्रता किए जाने का आरोप।
- अधिवक्ताओं ने पहले भी इस तरह की शिकायतें उठाई थीं, वीडियो भी बनाया गया।
News in detail
जबलपुर जिला अदालत में एक बार फिर व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। यहां कोर्ट ड्यूटी पर आए पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगे हैं। अधिवक्ताओं ने रंगे हाथ पकड़कर पूरे मामले का वीडियो भी बना लिया है।
पुलिसकर्मी कह रहा वकील की कोई जरूरत नहीं
जिला एवं सत्र न्यायालय जबलपुर में मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया जब अधिवक्ताओं ने चालान ड्यूटी में तैनात पुलिसकर्मियों को कथित तौर पर अधिवक्ता की भूमिका निभाते हुए पकड़ लिया। आरोप है कि पुलिसकर्मी न सिर्फ चालान पेश कर रहे थे, बल्कि पक्षकारों से सीधे संपर्क कर पूरे केस की प्रक्रिया खुद ही संभाल रहे थे।
जुर्माने से ज्यादा वसूली का आरोप
जानकारी के अनुसार कोर्ट नंबर 2 में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) के समक्ष पेश करीब 7 समरी ट्रायल मामलों में पुलिसकर्मी श्रीकांत गुर्जर (आबकारी) और श्वेता ठाकुर पर आरोप लगा कि उन्होंने निर्धारित जुर्माना राशि से अधिक पैसे पक्षकारों से लिए। इसके बाद वे स्वयं ही ऑनलाइन माध्यम से जुर्माना जमा कर रहे थे, जो कि स्थापित प्रक्रिया के विपरीत बताया जा रहा है।
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इन मामलों में सामने आई गड़बड़ी
जिन मामलों में अनियमितता सामने आई, उनमें अंकित उर्फ बहादुर, सुनीता केवट, महेंद्र बर्मन, छोटे यादव, कान्धिलाल यादव, अनिल बारी और किरन कोल के नाम शामिल हैं। इन सभी मामलों में 500 से 1000 रुपए तक के जुर्माने निर्धारित थे, लेकिन आरोप है कि इनसे अधिक राशि ली गई।
अधिवक्ताओं से अभद्रता, वीडियो बना सबूत
जब अधिवक्ताओं ने इस पूरे मामले का विरोध किया और पुलिसकर्मियों को रोका, तो आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। इस दौरान अधिवक्ताओं ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी बना लिया, जो अब चर्चा का विषय बना हुआ है।
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पहले से उठते रहे हैं ऐसे सवाल
अधिवक्ताओं का कहना है कि यह कोई पहला मामला नहीं है। लंबे समय से यह शिकायत सामने आ रही थी कि कोर्ट में तैनात कुछ पुलिसकर्मी जमानत और चालान मामलों में खुद ही अधिवक्ता बनकर आरोपियों से डील करते हैं और उन्हें वकील की जरूरत न होने का झांसा देते हैं।
बाबुओं की मिलीभगत की भी आशंका
इस पूरे घटनाक्रम के सामने आने के बाद अब अदालत परिसर के भीतर काम करने वाले कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। अधिवक्ताओं का आरोप है कि बिना अंदरूनी मिलीभगत के इस तरह की प्रक्रिया संभव नहीं है, जिससे पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग रहा है।
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न्याय व्यवस्था पर उठे सवाल
घटना के बाद अब न्यायालय की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। अधिवक्ताओं ने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों और संबंधित कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि न्यायालय की गरिमा बनी रह सके।
कोर्ट में आए हुए जो व्यक्ति इन पुलिसकर्मियों को जुर्माने की राशि देते हैं यह उनके लिए भी एक बड़ा संकट साबित हो सकता है। क्योंकि आने वाले समय में जब मामले की सुनवाई होगी तो आखिर बहस अधिवक्ता को ही करनी पड़ेगी।
यदि जुर्माने की राशि गलत ढंग से भरी जाती है या नहीं भरी जाती है तो इसकी भरपाई आखिरकार उस क्लाइंट को ही करनी होती है जिसने पुलिसकर्मी पर भरोसा किया था।