हाईकोर्ट के आदेश पर खोदी कब्र, एक साल बाद निकला शव… मौत के पीछे छुपे सच की तलाश शुरू

Neel Tiwari | Apr 08, 2026, 16:43 IST
Photograph: (the sootr)
जबलपुर में एक साल पुरानी मौत ने फिर तूल पकड़ लिया है। भाई ने हत्या का आरोप लगाते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अब हाईकोर्ट के आदेश पर कब्र से शव निकालकर पोस्टमॉर्टम कराया गया। तस्बीह की कसम खिलाकर कब्र की पहचान की कोशिश।

NEWS IN SHORT

  • 27 मार्च 2025 को गयासुद्दीन कुरैशी को दफनाया गया था
  • भाई कासिमुद्दीन ने हत्या का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की
  • सिंगल बेंच ने याचिका खारिज की, डिवीजन बेंच ने दिया बड़ा आदेश
  • 8 अप्रैल 2026 को कब्र खोदकर शव निकाला गया
  • मेडिकल कॉलेज जबलपुर में पोस्टमॉर्टम से खुलेगा मौत का राज

News in detail

मौत के बाद उठे सवाल, भाई ने जताया हत्या का शक

जबलपुर में गयासुद्दीन कुरैशी की मौत के बाद मामला शांत हो गया था, लेकिन उनके भाई कासिमुद्दीन कुरैशी को शुरुआत से ही इस मौत पर संदेह था। उनका आरोप था कि यह सामान्य मौत नहीं, बल्कि एक सुनियोजित हत्या है। उन्होंने अपने संदेह का आधार अस्पताल की डिस्चार्ज समरी को बताया, जिसमें मृतक के सीने पर चोट के निशान का जिक्र था।



पारिवारिक विवाद ने केस को उलझाया

इस पूरे मामले में एक बड़ा मोड़ तब आया जब मृतक की पत्नी ने ही कासिमुद्दीन कुरैशी के खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी। पत्नी ने अपने देवर पर ही पति की मौत के लिए जिम्मेदार होने का आरोप लगाया। दोनों पक्षों के बीच साल 2015 से चल रहे विवाद ने इस मामले को और जटिल बना दिया, जिससे जांच (Investigation)की दिशा भी प्रभावित होती रही।



सिंगल बेंच ने खारिज की थी याचिका

मामले को लेकर कासिमुद्दीन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर शव को कब्र से निकालकर पोस्टमॉर्टम कराने की मांग की थी। 22 जनवरी 2026 को कोर्ट की सिंगल बेंच ने इस मांग को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि कब्र से शव निकालना एक असाधारण प्रक्रिया है, जिसे केवल ठोस सबूतों और गंभीर परिस्थितियों में ही अपनाया जा सकता है।



डिवीजन बेंच ने बदला फैसला, दिया सख्त आदेश

सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ अपील में डिवीजन बेंच ने नया रुख अपनाया। 7 अप्रैल 2026 को सुनवाई करते हुए कोर्ट ने प्रशासन को शव निकालने और पोस्टमॉर्टम कराने का निर्देश दिया। साथ ही याचिकाकर्ता को एसडीएम अधारताल के सामने उपस्थित होने के आदेश दिए गए और पूरी प्रक्रिया के लिए समय सीमा भी तय की गई।



"तस्बीह" की कसम खिलाकर कब्र की पहचान की कोशिश

इस दौरान कब्र की पहचान करने को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई। कब्रस्तान की देखरेख करने वाले व्यक्ति ने जिस कब्र को गयासुद्दीन का बताया, उसे पर मृतक के भाई को शक था। बात यहां तक पहुंच गई कि मुस्लिम धर्म में उपासना के लिए इस्तेमाल की जाने वाली माला "तस्बीह" को हाथ में देकर कब्र की पुष्टि के लिए कसम खिलाई गई। हालांकि उसके बाद भी प्रशासन को कब्र खोदने से पहले स्वतंत्र गवाहों का इंतजार करना पड़ा।



प्रशासन की मौजूदगी में खोदी गई कब्र

हाईकोर्ट के आदेश (High Court order) के पालन में 8 अप्रैल 2026 को अधारताल एसडीएम और पुलिस की मौजूदगी में कब्र को खोदा गया। करीब एक साल बाद शव को बाहर निकाला गया और तत्काल पोस्टमार्टम (Postmortem) के लिए मेडिकल कॉलेज जबलपुर भेजा जाएगा। इस दौरान पूरे घटनाक्रम पर प्रशासन की कड़ी निगरानी रही।



पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से खुलेगा मौत का रहस्य

अब इस पूरे मामले की सच्चाई पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर टिकी हुई है। यदि हत्या की पुष्टि होती है तो यह मामला बड़ा आपराधिक केस बन सकता है, वहीं यदि मौत प्राकृतिक पाई जाती है तो आरोपों की दिशा बदल सकती है। फिलहाल एक साल बाद कब्र से निकला शव कई अनसुलझे सवालों के जवाब देने की स्थिति में है।



ये खबरें भी पढ़ें...

बड़वानी के मोहिपुरा में 3.4 तीव्रता का भूकंप, लोग दहशत में



एमपी में श्रीराम वन गमन पथ का होगा विस्तार, जुड़ेंगे 10 नए ऐतिहासिक स्थल



एमपी की बिजली कंपनी में चयनित सहायक ग्रेड को ज्वाइनिंग नहीं, उधर स्टाफ की कमी बताकर रिटायर्ड को ले रहे



ईरान-इजरायल युद्ध का असर, एमपी में महंगी हो सकती हैं दवाइयां, BP-शुगर के मरीजों पर सबसे ज्यादा असर



Tags:
  • जबलपुर
  • हाईकोर्ट
  • High Court order
  • Investigation
  • Postmortem
  • कब्र