ईरान-इजरायल युद्ध का असर, एमपी में महंगी हो सकती हैं दवाइयां, BP-शुगर के मरीजों पर सबसे ज्यादा असर
Aman Vaishnav | Apr 08, 2026, 08:23 IST
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ईरान-इजरायल युद्ध के कारण चीन से आने वाला दवाओं का कच्चा माल यानी API 166% तक महंगा हो गया है। शिपिंग लागत भी दोगुनी हो गई है। अगले 15 से 20 दिनों में बाजार में दवाइयों की कीमतें 25 से 30 फीसदी तक बढ़ सकती हैं।
News In Short
- ईरान-इजरायल युद्ध से ग्लोबल सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है।
- दवाओं का कच्चा माल एपीआई चीन से 166% तक महंगा हो गया है।
- शंघाई से मुंबई तक शिपिंग में अब 80 से 90 दिन लग रहे हैं।
- अगले 15 से 20 दिनों में दवाइयां 30% तक महंगी हो सकती हैं।
- बीपी, शुगर और अस्थमा के मरीजों पर सबसे ज्यादा बोझ पड़ेगा।
News In detail
युद्ध की आग का आपकी दवा पर असर
दवाइयां बनाने में जो कच्चा माल लगता है उसे एपीआई (Active Pharmaceutical Ingredient) कहते हैं। यह ज्यादातर चीन से आता है। युद्ध की वजह से समुद्री रास्ते बदलने पड़ रहे हैं। इससे यह कच्चा माल 166% तक महंगा हो गया है।
कच्चा माल कितना महंगा हुआ?
पेनकिलर दवाओं में लगने वाला आइट्रप्रेड 600 से बढ़कर 900 रुपए हो गया है। एंटीबायोटिक सिफाक्सिम का कच्चा माल आठ हजार 500 से 11 हजार रुपए पर पहुंच गया है।
इंफेक्शन में काम आने वाले एजोथाइमैसिन में भी 32% की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। ये आंकड़े बेसिक ड्रग डीलर्स एसोसिएशन मध्यप्रदेश के हैं।
शिपिंग लागत क्यों बढ़ी?
मध्य प्रदेश में 200 से ज्यादा छोटी-बड़ी फार्मा कंपनियां कच्चे माल के लिए चीन पर निर्भर हैं। जब कच्चा माल ही इतना महंगा हो तो दवा की कीमत (मध्यप्रदेश में दवाई महंगी) भी बढ़नी तय है।
20 दिन में दिखेगा असर
बेसिक ड्रग डीलर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष जेपी मूलचंदानी कहते हैं कि, कच्चे माल की कमी और बढ़ते माल भाड़े ने दवा उद्योग को बैकफुट पर ला दिया है। केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र धाकड़ के मुताबिक देशभर में इसकी तैयारी शुरू हो चुकी है और अगले 15 से 20 दिनों में असर साफ दिखेगा।
मरीजों की जेब पर कितना बोझ?
सरकारी अस्पताल भी खतरे में?
अभी क्या करें मरीज?
युद्ध रुका नहीं तो क्या होगा?
यह खबर क्यों जरूरी है?
FAQ
- दवाइयां कितनी महंगी होंगी और कब से?
दवा बाजार के जानकारों के मुताबिक अगले 15 से 20 दिनों में बाजार में दवाइयों की कीमतें 25 से 30 फीसदी तक बढ़ सकती हैं। अभी जेनेरिक दवाओं पर मिलने वाली 10 से 20 फीसदी छूट बंद हो गई है और वे एमआरपी पर बिक रही हैं। ब्रांडेड दवाइयों और सर्जिकल सामान की कीमतें भी बढ़ने की तैयारी है। इसकी मुख्य वजह यह है कि चीन से आने वाला कच्चा माल यानी एपीआई 166% तक महंगा हो गया है और शिपिंग लागत भी ढाई गुना बढ़ी है। - क्या सरकारी अस्पतालों में मुफ्त दवाइयां भी प्रभावित होंगी?
हां, इसका असर सरकारी अस्पतालों पर भी पड़ सकता है। छोटी फार्मा कंपनियां सरकारी टेंडर के तहत सस्ती दवाइयां सप्लाई करती हैं। जब कच्चा माल महंगा हो जाता है तो इन कंपनियों के लिए टेंडर रेट पर सप्लाई करना घाटे का सौदा बन जाता है। ऐसे में वे सप्लाई से हाथ खींच सकती हैं। इससे सरकारी अस्पतालों में गरीब मरीजों को मिलने वाली मुफ्त दवाइयों की कमी हो सकती है।
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