उम्रकैद का फैसला सुनाने वाली जज को धमकी; HC ने ACS और DGP से सुरक्षा पर मांगा जवाब

Amresh Kushwaha | Jul 02, 2026, 14:41 IST
उम्रकैद का फैसला सुनाने वाली जज को धमकी
गौहत्या मामले में उम्रकैद सुनाने वाली महिला जज को धमकियां मिल रही हैं। जबलपुर हाईकोर्ट ने इस पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने गृह विभाग के ACS और DGP से सुरक्षा को लेकर हलफनामा मांगा है। अगली सुनवाई 9 जुलाई को होगी।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • गौहत्या मामले में उम्रकैद सुनाने वाली महिला जज को धमकियां मिलीं रही है।
  • जबलपुर हाईकोर्ट ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाया है।
  • कोर्ट ने ACS गृह और DGP से हलफनामा मांगा है।
  • सोशल मीडिया पर जज के खिलाफ अभियान चलाया गया था।
  • मामले की अगली सुनवाई 09 जुलाई को तय हुई है।

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक बड़े मामले में सख्त रुख अपनाया है। सिवनी मालवा की महिला जज को जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। यह धमकियां एक बहुचर्चित गौहत्या मामले में फैसला सुनाने के बाद शुरू हुईं है। हाईकोर्ट ने अब राज्य सरकार से जवाब मांगा है।



क्या था पूरा गौहत्या मामला

यह घटना अगस्त 2022 की है। महाराष्ट्र के अमरावती जा रहे एक ट्रक को सिवनी मालवा के बराखड़ गांव के पास रोका गया था। ट्रक में करीब 30 मवेशी लदे थे। इसके बाद ग्रामीणों और गो-रक्षकों की भीड़ जमा हो गई। भीड़ ने ट्रक में सवार तीन लोगों की लाठी-डंडों से पिटाई कर दी। इस हमले में नाजिर अहमद नाम के व्यक्ति की मौत हो गई थी। यह मामला उस समय काफी चर्चा में रहा था।



अदालत ने सुनाई थी उम्रकैद की सजा

इस मामले की सुनवाई सिवनी मालवा की अदालत में चली थी। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश तबस्सुम खान ने 12 जून को बड़ा फैसला सुनाया था। उन्होंने 14 आरोपियों को दोषी करार दिया था। सभी को आजीवन कारावास की सजा दी गई। सजा सुनाए जाने के बाद अदालत परिसर में हंगामा भी हुआ था। पुलिस जब दोषियों को जेल ले जा रही थी, तब यह हंगामा हुआ।



सोशल मीडिया पर शुरू हुआ अभियान

फैसले के बाद सोशल मीडिया पर जज के खिलाफ एक अभियान शुरू हो गया। कई आपत्तिजनक पोस्ट डाली गईं। कुछ लोगों ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। इसी दौरान जज को जान से मारने की धमकियां भी मिलने लगीं। पुलिस ने इस मामले में दो फेसबुक यूजर के खिलाफ FIR (First Information Report) दर्ज की है। मामले की जांच अभी जारी है।



हाईकोर्ट ने खुद लिया संज्ञान

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा से जुड़ी एक जनहित याचिका पहले से चल रही थी। यह याचिका साल 2016 से लंबित है। इस पर सुनवाई कर रही डिवीजन बेंच ने अब इस पूरे मामले का खुद संज्ञान लिया। बेंच में जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह शामिल हैं। दोनों जजों ने महिला अधिकारी को मिल रही धमकियों को गंभीरता से लिया है।



सरकार ने कोर्ट को दी जानकारी

सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से भी जवाब आया। महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी कोर्ट में मौजूद थे। उन्होंने बताया कि महिला जज को 1-5 श्रेणी की सशस्त्र सुरक्षा दी जा चुकी है। साथ ही सोशल मीडिया की आपत्तिजनक पोस्ट हटाने का काम भी शुरू हो गया है। हालांकि हाईकोर्ट इससे पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिखा।



अब हलफनामा देना होगा जरूरी

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को साफ निर्देश दिए हैं। गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव यानी ACS (Additional Chief Secretary) को हलफनामा दाखिल करना होगा। इसी तरह पुलिस महानिदेशक यानी DGP (Director General Of Police) को भी जवाब देना होगा। दोनों अधिकारियों को बताना होगा कि सुरक्षा के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा में कोई समझौता नहीं होगा। यह टिप्पणी काफी सख्त मानी जा रही है।



अब 9 जुलाई को होगी सुनवाई

इस मामले की अगली सुनवाई अब 09 जुलाई को तय की गई है। उस दिन सरकार को अपना हलफनामा पेश करना होगा। हाईकोर्ट यह देखेगा कि सुरक्षा व्यवस्था कितनी असरदार है। साथ ही सोशल मीडिया पर चल रहे अभियान पर भी नजर रहेगी। यह मामला न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के लिए एक अहम नजीर बन सकता है।



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