जबलपुर हाईकोर्ट ने IG रिपोर्ट पर जताई नाराजगी, एक साल तक सीलबंद रहेगी रिपोर्ट

Neel Tiwari | Feb 28, 2026, 23:13 IST
Madan Mahal Police Station
मदन महल थाना पर फर्जी NDPS कार्रवाई के आरोप लगे थे। इस मामले में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। जबलपुर हाईकोर्ट ने IG द्वारा पेश जांच रिपोर्ट पर असंतोष जताया।

News in short

  • जस्टिस संदीप एन भट्ट ने IG रिपोर्ट को बताया अधूरा।
  • महत्वपूर्ण तथ्य गायब मिलने पर कोर्ट ने जताई नाराजगी।
  • रिपोर्ट को रजिस्ट्रार (न्यायिक) के पास सीलबंद रखने के आदेश।
  • हाईकोर्ट ने IG रिपोर्ट पर जताया असंतोष।

News in Detail

जबलपुर हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने NDPS मामले की सुनवाई के दौरान आईजी की जांच रिपोर्ट पर असंतोष जताया है। जस्टिस संदीप एन. भट्ट ने कहा कि रिपोर्ट में महत्वपूर्ण पहलू शामिल नहीं हैं। कोर्ट ने माना कि रिकॉर्ड में कुछ जरूरी तथ्य गायब हैं। इसी कारण पहले आवेदन का निपटारा गलती से हुआ था।



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क्या था पूरा मामला

यह मामला खुशी कौर बनाम मध्य प्रदेश राज्य (MCRC No. 4158/2026) से जुड़ा है। मदन महल थाना पुलिस ने खुशी कौर को NDPS एक्ट की धारा 8/20 के तहत 11 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया था। बचाव पक्ष का आरोप था कि ट्रेन यात्रा के दौरान पुलिसकर्मियों ने अभद्र व्यवहार किया। विरोध करने पर उन्हें जबरन थाने ले जाकर मादक पदार्थ रखने का फर्जी मामला दर्ज किया गया। मोबाइल फोन और बैग गायब करने के आरोप भी लगाए गए थे।



सुनवाई के दौरान CCTV फुटेज को लेकर भी विवाद सामने आया था। आरोप था कि थाने का पूरा फुटेज उपलब्ध नहीं कराया गया। वहीं, सरकारी पक्ष ने रायपुर के एक होटल में गलत पहचान से ठहरने की जानकारी देकर आवेदिका के आचरण को संदिग्ध बताया था। इन विरोधाभासों के चलते हाईकोर्ट ने पहले IG को निष्पक्ष जांच के आदेश दिए थे।



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रायपुर से जबलपुर यात्रा पर अधूरी जानकारी

ताजा सुनवाई में कोर्ट ने खासतौर पर इस बात पर नाराजगी जताई कि रिपोर्ट में रायपुर से जबलपुर तक की यात्रा का विवरण तो दिया गया। लेकिन उसमें पर्याप्त और स्पष्ट जानकारी नहीं है। अदालत ने कहा कि निचली अदालत में ट्रायल लंबित है। इसलिए इस स्तर पर विस्तृत टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। हालांकि, रिपोर्ट में भौतिक और तथ्यात्मक पहलुओं की कमी चिंताजनक है।



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एक साल तक सीलबंद रहेगी रिपोर्ट

हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए निर्देश दिया कि IG द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट को रजिस्ट्रार (न्यायिक) के समक्ष सीलबंद लिफाफे में सुरक्षित रखा जाए। इसे कम से कम एक वर्ष तक अभिरक्षा में रखा जाएगा, ताकि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर इस पर विचार किया जा सके। रिपोर्ट पर फिलहाल कोई विस्तृत आदेश पारित नहीं किया गया है।



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ट्रायल कोर्ट में मिलेगा सील बंद जांच का फायदा

मामले में आवेदिका की ओर से अधिवक्ता विकास कुमार संतु ने पक्ष रखा, जबकि राज्य की ओर से शासकीय अधिवक्ता ए.एस. बघेल ने पैरवी की। रिपोर्ट पेश होने के बाद कोर्ट ने इस चरण की कार्यवाही को फिलहाल समाप्त कर दिया है। लेकिन ऐसा सील बंद रिपोर्ट का फायदा कथित आरोपियों को ट्रायल कोर्ट में जरूर मिलेगा।



पहले जमानत खारिज कर उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए गए थे। अब उसी रिपोर्ट पर असंतोष जताए जाने से मामला फिर चर्चा में आ गया है। मदन महल थाना पहले भी जांच प्रक्रियाओं पर सवालों के घेरे में रहा है। अब यह पूरा प्रकरण न्यायिक निगरानी में है।





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