जबलपुर का मास्टरप्लान 2021 में खत्म, 2026 में भी इंतजार, हाईकोर्ट पहुंचा क्रेडाई जबलपुर
News in Short
- जबलपुर का मास्टर प्लान 2008 से लागू था, 2021 में हो चुका समाप्त है।
- नया मास्टर प्लान अब तक पब्लिश नहीं, विकास कार्य प्रभावित।
- CREDAI जबलपुर ने हाईकोर्ट में दायर की याचिका।
- 31 जनवरी 2026 को ड्राफ्ट पब्लिकेशन के लिए भेजा गया।
- हाईकोर्ट ने 8 सप्ताह में अभ्यावेदन निराकरण के दिए निर्देश।
News in detail
जबलपुर का मास्टर प्लान वर्ष 2008 से प्रभावशील था, जिसकी वैधता 2021 में समाप्त हो चुकी है। इसके बाद से अब तक नया मास्टर प्लान प्रकाशित नहीं किया गया है, जिससे शहर का नियोजित विकास पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। मास्टर प्लान के अभाव में निर्माण गतिविधियां अनियंत्रित हो रही हैं और शहरी विस्तार बिना योजना के बढ़ रहा है।
अवैध कॉलोनियों का फैलाव
याचिका में बताया गया कि नए मास्टर प्लान के अभाव में बिल्डर्स के वैध प्रोजेक्ट्स को स्वीकृति नहीं मिल पा रही है। वहीं दूसरी ओर अवैध कॉलोनियों का तेजी से विस्तार हो रहा है। इससे न केवल शहर की संरचना बिगड़ रही है बल्कि शासन को भी राजस्व के रूप में लाखों रुपए का नुकसान हो रहा है।
125 गांव जुड़े, फिर भी नहीं बना प्लान
साल 2014 में जबलपुर नगर सीमा में 125 गांवों को शामिल किया गया था। लेकिन इन क्षेत्रों के लिए भी अब तक कोई स्पष्ट मास्टर प्लान तैयार नहीं किया गया। इससे इन क्षेत्रों में विकास कार्य असंगठित हो गए हैं। बुनियादी सुविधाओं की योजना भी प्रभावित हो रही है।
हाईकोर्ट पहुंचा CREDAI
क्रेडाई (CREDAI ) जबलपुर के दीपक अग्रवाल ने याचिका दायर की। अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने बताया कि अभ्यावेदन के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। बिल्डर एसोसिएशन को मजबूर होकर न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
ड्राफ्ट तैयार, फिर भी पब्लिकेशन में देरी
नगर तथा ग्राम निवेश विभाग के डायरेक्टर ने 31 जनवरी 2026 को मास्टर प्लान का ड्राफ्ट पब्लिकेशन के लिए भेजा। इसके बावजूद 2 महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन इसे अब तक प्रकाशित नहीं किया गया। यह प्रशासनिक सुस्ती को दर्शाता है।
हाईकोर्ट का आदेश, 8 हफ्ते में फैसला करें
मामले की सुनवाई के दौरान गवर्नमेंट एडवोकेट कनक गहरवार ने इसे विचाराधीन बताया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद जस्टिस संदीप एन भट्ट की एकलपीठ ने बिना गुण-दोष पर टिप्पणी किए निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन का निराकरण 8 सप्ताह में किया जाए। इसके बाद याचिका का निराकरण कर दिया गया।
अब नजर मास्टरप्लान पब्लिकेशन पर
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब निगाहें शासन और नगर तथा ग्राम निवेश विभाग पर टिकी हैं। यदि तय समयसीमा में मास्टर प्लान प्रकाशित होता है, तो जबलपुर के विकास को नई दिशा मिल सकती है। अन्यथा अव्यवस्था और विवाद बढ़ने की आशंका बनी रहेगी।
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