नाबालिग चोर गैंग का भंडाफोड़, सरगना यूट्यूब से लेता था ट्रेनिंग के नए-नए आइडिए
समझें क्या है पूरा मामला...
- यूट्यूब से सीखा, नाबालिगों से कराता था चोरी।
- जबलपुर में नाबालिग गैंग का मास्टरमाइंड गिरफ्तार।
- 70 बच्चों को चोरी सिखाता था आरोपी नीतेश।
- ट्रेनों में लूट कराने वाला गैंग बेनकाब।
- RPF ने पकड़ा नाबालिग चोर गैंग का सरगना।
जबलपुर में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक व्यक्ति नाबालिग बच्चों का गैंग चलाता था। वह बच्चों से ट्रेनों में चोरी करवाता था। आरोपी का नाम नीतेश कुमार उर्फ नीतू है। उसने यह तरीका यूट्यूब से सीखा था। आरपीएफ ने उसे 17 अगस्त को गिरफ्तार कर लिया।
रेलवे स्टेशन और ट्रेनों में हो रही चोरी की घटनाओं के पीछे यह बड़ा गैंग सक्रिय था। आरपीएफ की जांच में पता चला कि इस गैंग में करीब 70 नाबालिग बच्चे शामिल थे। यह मामला जबलपुर में लंबे समय से चल रहा था।
कौन है मास्टरमाइंड नीतेश
आरोपी नीतेश कुमार बेलबाग इलाके का रहने वाला है। उसकी उम्र करीब 40 साल है। वह 12 से 16 साल तक के बच्चों को अपने गैंग में शामिल करता था। वह खुद भी लंबे समय तक ट्रेन में चोरी और लूट करता रहा है।
करीब दो साल पहले उसका पैर खराब हो गया। इसके बाद उसने खुद चोरी करना छोड़ दिया। उसने बच्चों को अपराध में इस्तेमाल करने का रास्ता चुन लिया।
यूट्यूब से सीखा तरीका
नीतेश ने गैंग बनाने और बच्चों को ट्रेनिंग देने का आइडिया यूट्यूब से लिया था। वह ऑनलाइन वीडियो देखकर चोरी के नए तरीके सीखता था। इसके बाद वह इन तरीकों को बच्चों को सिखाता था।
वह बच्चों को करीब दो महीने तक ट्रेनिंग देता था। इस दौरान वह उन्हें चोरी करने और पकड़े जाने से बचने के तरीके सिखाता था। ट्रेनिंग के बाद बच्चों को ट्रेन, प्लेटफॉर्म और वेटिंग रूम में भेजा जाता था।
भीख मांगने से गैंग बनाने तक
आरपीएफ थाना प्रभारी राजीव खरब के मुताबिक नीतेश पर पहले से कई मामले दर्ज हैं। उस पर 8 चोरी के मामले हैं। इसके अलावा उस पर 3 लूट और 3 आर्म्स एक्ट के मामले भी दर्ज हैं।
वह पहले चलती ट्रेन से यात्रियों का सामान चुराता था। आउटर पर ट्रेन रुकते ही वह मोबाइल और अन्य सामान लेकर भाग जाता था। आरपीएफ ने उसे कई बार पकड़ा। लेकिन जमानत मिलने के बाद वह फिर चोरी में जुट जाता था।
पैर खराब होने के बाद उसने कुछ समय तक स्टेशन के आसपास भीख मांगी। इसके बाद उसने बच्चों को अपराध में लगाने का तरीका अपनाया।
गरीब बस्तियों से चुनता था बच्चे
आरपीएफ के मुताबिक नीतेश जबलपुर की गरीब बस्तियों से बच्चों को चुनता था। इनमें हनुमानताल, मदार टेकरी और सिद्धबाबा की पहाड़ी शामिल हैं। वह रेलवे स्टेशन के आसपास रहने वाले परिवारों के बच्चों को भी निशाना बनाता था।
कचरा बीनने वाले और सिग्नल के पास घूमने वाले बच्चे भी उसके निशाने पर रहते थे। वह बच्चों को पैसे कमाने का लालच देता था। इसके बाद वह उन्हें चोरी की ट्रेनिंग के लिए साथ ले जाता था।
नीतेश ने करीब 10 साल तक रेलवे स्टेशन पर वेंडर का काम किया था। इस वजह से उसे प्लेटफॉर्म और ट्रेनों की अच्छी जानकारी थी। पैर खराब होने के बाद उसने इसी अनुभव का इस्तेमाल बच्चों को ट्रेनिंग देने में किया।
18 साल होते ही गैंग से बाहर
नीतेश के गैंग में सिर्फ नाबालिग लड़के ही शामिल रहते थे। कोई भी लड़का जैसे ही 18 साल का हो जाता, उसे गैंग से निकाल दिया जाता था। आरपीएफ के मुताबिक गैंग से निकाले गए कुछ लड़कों ने बाद में अपना अलग गैंग बना लिया।
इन्हीं में से एक हर्ष सिंह कुछ दिन पहले पकड़ा गया था। पूछताछ में उसने बताया कि उसे चोरी की ट्रेनिंग नीतेश ने ही दी थी। हर्ष पर 18 से ज्यादा चोरी के मामले दर्ज हैं।
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