एक के बाद एक खुल रहे गेहूं खरीदी में घोटाले, अब तक 1.35 करोड़ का घोटाला

Neel Tiwari | Jun 05, 2026, 19:07 IST
wheat fraud
जबलपुर जिले के मझौली में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी में 1.35 करोड़ रुपए से अधिक का घोटाला पकड़ा गया। जांच में 5 हजार 168 क्विंटल गेहूं गायब पाया गया। फर्जी किसानों के नाम पर खरीदी और अवैध वसूली सामने आई।

5 पॉइंट्स में समझें पूरा मामला

  • गेहूं खरीदी केंद्र में 5 हजार 168.70 क्विंटल गेहूं कम मिला है।
  • घोटाले की कुल राशि 1.35 करोड़ रुपए से अधिक आंकी गई।
  • 4 हजार 444 बारदानों की फर्जी एंट्री कर फर्जी खरीदी दिखाने का आरोप।
  • किसानों से अवैध वसूली और अतिरिक्त गेहूं लेने की शिकायतें भी सामने आईं।
  • केंद्र प्रभारी, सर्वेयर, नोडल अधिकारियों समेत 10 लोगों पर FIR दर्ज।

जांच में खुली करोड़ों के घोटाले की परतें

जबलपुर जिले के मझौली क्षेत्र में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के नाम पर बड़ा खेल सामने आया है। प्रशासनिक जांच में पता चला कि खरीदी केंद्र भूमि ग्राम संगठन हटौली में रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच भारी अंतर है। जांच अधिकारियों ने जब वेयरहाउस का भौतिक सत्यापन किया तो हजारों क्विंटल गेहूं गायब मिला। इस खुलासे के बाद पूरे जिले में हड़कंप मच गया है।



पोर्टल पर कुछ और, गोदाम में कुछ और

जांच रिपोर्ट के अनुसार ई-खरीदी पोर्टल में केंद्र पर 48 हजार 347 क्विंटल से ज्यादा गेहूं खरीदे जाने की जानकारी दर्ज थी। लेकिन जब वेयरहाउस, एफसीआई को भेजे गए स्टॉक और मौके पर रखे गेहूं की गिनती की गई तो केवल 43 हजार 179 क्विंटल गेहूं ही मिला। यानी 5 हजार 168 क्विंटल से ज्यादा गेहूं का कोई हिसाब नहीं मिला। न्यूनतम समर्थन मूल्य के आधार पर इसकी कीमत 1 करोड़ 35 लाख 67 हजार रुपए से अधिक आंकी गई है।



फर्जी किसानों के नाम पर खरीदी

जांच दल को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब बारदानों का रिकॉर्ड खंगाला गया। पता चला कि केंद्र को जितने बारदाने मिले थे, उससे हजारों ज्यादा बारदानों की ऑनलाइन एंट्री कर दी गई।



आरोप है कि इन्हीं फर्जी बारदानों के सहारे ऐसे किसानों के नाम पर गेहूं खरीदी दिखाई गई जो वास्तव में केंद्र पर पहुंचे ही नहीं थे। इससे सरकारी रिकॉर्ड में खरीदी बढ़ाकर दिखाने और गेहूं की हेराफेरी करने का रास्ता तैयार किया गया।



बाहरी लोगों के हाथ में था पूरा संचालन

रिपोर्ट के अनुसार महिला संगठन को केंद्र संचालन की जिम्मेदारी मिली थी, लेकिन नियमों को दरकिनार कर पूरा काम बाहरी लोगों के हवाले कर दिया गया। जांच में सामने आया कि अमन पांडेय और आकाश पांडेय नाम के व्यक्तियों ने केंद्र का संचालन संभाल रखा था।



आरोप है कि किसानों की तुलाई, पर्चियां और रिकॉर्ड तैयार करने का पूरा काम इन्हीं के जरिए किया जा रहा था। मामला खुलने के बाद मुख्य आरोपी बताए जा रहे अमन पांडेय के दस्तावेज लेकर गायब होने की बात भी सामने आई है।



किसानों से भी की गई अवैध वसूली

घोटाले के दौरान किसानों के साथ भी मनमानी किए जाने के आरोप लगे हैं। जांच में कुछ किसानों ने बताया कि उनसे तुलाई, सिलाई और भराई के नाम पर पैसे लिए गए। एक किसान से तो खरीदी गई मात्रा से अतिरिक्त गेहूं तौल लेने और लेबर भुगतान के नाम पर रकम वसूलने की शिकायत भी सामने आई। इससे यह मामला सिर्फ सरकारी नुकसान तक सीमित नहीं रह गया बल्कि किसानों के शोषण का मामला भी बन गया।



सर्वेयर पर रिश्वत लेकर गेहूं पास करने का आरोप

जांच रिपोर्ट में खरीदी सर्वेयर की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि किसानों की उपज को ऐप पर पास करने के बदले उनसे पैसे लिए जाते थे। छोटे किसानों से 500 रुपये और बड़े किसानों से 1000 रुपये तक की मांग की जाती थी। इतना ही नहीं, ऐसे किसानों की उपज भी सिस्टम में पास दिखाई गई जो केंद्र पर पहुंचे ही नहीं थे।



अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में

मामले में केवल केंद्र संचालकों पर ही नहीं बल्कि कई जिम्मेदार अधिकारियों पर भी लापरवाही और मिलीभगत के आरोप लगे हैं। जांच में पाया गया कि निगरानी और निरीक्षण की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारियों ने समय पर अनियमितताओं पर ध्यान नहीं दिया। आरोप है कि यदि नियमित निगरानी होती तो करोड़ों रुपये के इस घोटाले को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सकता था।



10 लोगों के खिलाफ दर्ज हुई FIR

जांच प्रतिवेदन और शिकायत के आधार पर मझौली थाना पुलिस ने केंद्र प्रभारी, संगठन अध्यक्ष, कंप्यूटर ऑपरेटर, सर्वेयर, नोडल अधिकारियों और अन्य सहयोगियों समेत कुल 10 लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस अब दस्तावेजों, खरीदी रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है।



जांच अभी जारी, और भी खुलासों की संभावना

पुलिस और प्रशासन का कहना है कि यह जांच अभी शुरुआती चरण में है। वेयरहाउस में लगे सीसीटीवी का बैकअप खंगाला जा रहा है और खरीदी डेटा का तकनीकी विश्लेषण भी किया जा रहा है। अधिकारियों को आशंका है कि जांच आगे बढ़ने पर इस पूरे नेटवर्क से जुड़े कुछ और नाम और नई अनियमितताएं सामने आ सकती हैं। फिलहाल यह मामला जिले के सबसे बड़े खरीदी घोटालों में से एक माना जा रहा है।



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