एमपी में सरकारी गेहूं खरीदी का रिकॉर्ड, देश में नंबर-1 बना मध्य प्रदेश
Sanjay Dhiman | May 26, 2026, 12:44 IST
Photograph: (the sootr)
मध्य प्रदेश में इस साल 13 लाख से अधिक किसानों से रिकॉर्ड 102 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदकर सरकार ने इतिहास रच दिया है। पिछले 10 सालों की इस सबसे बड़ी खरीद के बदले किसानों के खातों में 22 हजार 165 करोड़ भेजे गए हैं। इसकी अंतिम तारीख बढ़ाकर 28 मई कर दी गई है।
ऐसे समझें पूरा मामला
- एमपी MSP गेहूं खरीदी में देशभर में नंबर-1 बना।
- 13 लाख 27 हजार किसानों से गेहूं खरीदा गया।
- अब तक 102 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदी हुई।
- किसानों के खातों में 22,165 करोड़ रुपए ट्रांसफर हुए।
- गेहूं खरीदी की अंतिम तारीख अब 28 मई हुई।
राज्य ने MSP पर गेहूं खरीदी में पूरे देश में पहला स्थान हासिल किया। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक यह पिछले दस वर्षों की सबसे बड़ी खरीदी मानी जा रही। इस बार रिकॉर्ड खरीदी होने से किसानों में भी खास उत्साह दिखाई दे रहा। गांवों की मंडियों और उपार्जन केंद्रों पर लगातार किसानों की भीड़ पहुंच रही।
सरकार का दावा है कि किसानों को समय पर भुगतान किया जा रहा। इससे ग्रामीण बाजारों में नकदी बढ़ी और आर्थिक गतिविधियां तेज हुई हैं। राजनीतिक रूप से भी यह मुद्दा अब काफी चर्चा में बना हुआ है। सरकार इसे किसान हितैषी फैसलों का बड़ा परिणाम बताकर प्रचार कर रही।
13 लाख से ज्यादा किसानों ने बेचा गेहूं
पिछले चार वर्षों की तुलना में यह आंकड़ा काफी ज्यादा बताया जा रहा। कृषि विभाग इसे बेहतर उत्पादन और मजबूत खरीद व्यवस्था का परिणाम मान रहा। प्रदेश के कई जिलों में इस बार गेहूं उत्पादन भी काफी अच्छा रहा। सीहोर, विदिशा, होशंगाबाद और उज्जैन जैसे जिलों में भारी आवक देखने मिली। किसानों का कहना है कि इस बार मौसम ने भी काफी साथ दिया। सिंचाई और उत्पादन तकनीकों से फसल की गुणवत्ता बेहतर बनी रही।
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किसानों के खातों में पहुंचे 22 हजार करोड़ से ज्यादा
सीधे भुगतान व्यवस्था से किसानों को बिचौलियों से राहत मिलने का दावा हुआ। गांवों में नकदी बढ़ने से छोटे व्यापारियों और दुकानदारों को भी फायदा मिला। आर्थिक जानकार मानते हैं कि इतनी बड़ी राशि ग्रामीण बाजारों को मजबूती देती। इससे खेती आधारित अर्थव्यवस्था में नया भरोसा और स्थिरता आती दिखाई देती।
सरकार ने बढ़ाई गेहूं खरीदी की अंतिम तारीख
प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि समय रहते उपज बेच दें। जिन किसानों का स्लॉट बाकी है, वे केंद्र पहुंचकर गेहूं बेच सकते हैं। कई जिलों में अभी भी उपार्जन केंद्रों पर लंबी लाइनें दिखाई दे रही हैं। सरकार अतिरिक्त कर्मचारियों और संसाधनों की मदद से व्यवस्था संभाल रही है।
MSP नीति से किसानों को कितना फायदा मिला?
मध्य प्रदेश लंबे समय से देश के बड़े गेहूं उत्पादक राज्यों में शामिल रहा। अब रिकॉर्ड खरीदी ने प्रदेश की स्थिति और मजबूत बना दी है। राजनीतिक स्तर पर भी सरकार इसे बड़ी उपलब्धि मानकर प्रचारित कर रही। विपक्ष हालांकि खरीद केंद्रों पर अव्यवस्था और देरी के आरोप लगा रहा है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में दिख रहा बड़ा असर
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