जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत मिट्टी परिवहन पर विवाद: दो मंत्री आपस में भिड़े
समझें क्या है पूरा मामला...
मध्य प्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान चल रहा है।
इस अभियान के तहत राज्य के तालाबों का गहरीकरण किया जा रहा है।
गहरीकरण में निकली मिट्टी के परिवहन पर दो मंत्री भिड़ गए हैं।
जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट और राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा आमने-सामने आए।
कैबिनेट बैठक में यह मामला गर्म रहा, पंचायत मंत्री ने भी दखल दिया है।
दो मंत्रियों में क्यों हुई तकरार
मध्य प्रदेश में 25 से 30 जून तक जल गंगा संवर्धन अभियान चल रहा है। इस अभियान की बैठक में जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट और राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा आमने-सामने आ गए हैं।
राजस्व मंत्री वर्मा ने बैठक में साफ कहा कि तालाब गहरीकरण के लिए मिट्टी नहीं निकालने दी जा रही और उसका परिवहन भी रोका जा रहा है।
राजस्व मंत्री वर्मा का क्या कहना है
राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा का तर्क है कि तालाब से जब पूरी मिट्टी निकाल ली जाएगी, तो पानी रुकेगा कैसे? उनके मुताबिक सिंचाई विभाग इस काम में आपत्ति उठा रहा है। उन्होंने कहा कि तालाब गहरीकरण के नाम पर पूरी काली मिट्टी निकाली जा रही है। तालाब के नीचे की पीली मिट्टी दिखने लगती है। यदि ऐसे काम होते रहे तो तालाब में पानी ठहरेगा ही नहीं।
मंत्री तुलसी सिलावट ने दिया जवाब
जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि तालाब गहरीकरण एक मापदंड के अनुसार होता है। उनके मुताबिक इंदौर जिले की एक तालाब से काली मिट्टी निकाली गई। तीन-चार जगहों पर ऐसा हुआ है। मंत्री सिलावट ने कहा कि यह काम मापदंडों के हिसाब से होना चाहिए और कोई भी इसे रोक नहीं रहा।
पंचायत मंत्री ने भी की एंट्री
सूत्रों के मुताबिक पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रह्लाद पटेल ने कहा कि जनपद और ग्राम पंचायतों में भी यही स्थिति है। इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी कहा था कि तालाबों से मिट्टी निकाली जाए। उन्होंने कहा कि मापदंड का पूरा ध्यान रखा जाए। तीनों मंत्रियों के बीच यह मामला बढ़ता देख कहा गया कि तीनों विभागों की संयुक्त समिति बनाकर इसका सही रास्ता निकाला जाए।
क्या है जल गंगा संवर्धन अभियान
यह अभियान 30 मार्च 2025 को क्षिप्रा नदी के तट से शुरू हुआ था। इसका मुख्य मकसद प्रदेश के जल स्रोतों जैसे नदी, तालाब, कुएं और बावड़ियों को बचाना और फिर से जीवित करना है। अभियान में गंदे पानी के नालों को स्वच्छ भारत मिशन (Swachh Bharat Mission) 2.0 के तहत शोधित करने की भी योजना है।
पानी चौपाल बनी अभियान की पहचान
इस अभियान के तहत उद्यानिकी विभाग गांव-गांव में पानी चौपाल लगा रहा है। इसमें किसानों को जल संरक्षण, कम पानी में उगने वाली फसलों और नई तकनीकों की जानकारी दी जा रही है। इसी चौपाल में किसान फलोद्यान, ड्रिप लाइन, प्लास्टिक मलचिंग और सब्जी-मसाला-पुष्प क्षेत्र विस्तार योजनाओं के लिए ऑनलाइन पंजीकरण भी करा सकते हैं।
महिलाओं की भागीदारी भी जरूरी
अभियान में खास तौर पर महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है। नगरीय निकायों के जरिए नागरिकों को इससे जोड़ा जा रहा है। जल संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने की मंशा इस पूरे अभियान में साफ दिखती है।
2.12 लाख संरचनाएं, बड़ा लक्ष्य
मध्यप्रदेश सरकार के मुताबिक जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत अब तक दो लाख 12 हजार से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण या पुनर्जीवन हो चुका है। सरकार ने इस संख्या को तीन लाख 66 हजार तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
FAQ
- जल गंगा संवर्धन अभियान क्या है?
यह अभियान 30 मार्च 2025 को क्षिप्रा नदी के तट से शुरू हुआ था। इसका मुख्य मकसद प्रदेश के जल स्रोतों जैसे नदी, तालाब, कुएं और बावड़ियों को बचाना और फिर से जीवित करना है।
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