सरकारी खर्चों में कटौती को लेकर जीतू पटवारी ने लिखा सीएम मोहन यादव को पत्र
News in short
- जीतू पटवारी ने सरकारी खर्चों पर कटौती की मांग की।
- MSP पर केंद्र और राज्य सरकारों पर हमला बोला।
- पटवारी ने बड़े सरकारी आयोजनों पर एक साल तक रोक की मांग की।
- विदेशी दौरों और वेतन-भत्तों में कटौती का सुझाव दिया।
- मुख्यमंत्री से ठोस वित्तीय कदम उठाने की अपील की।
News in detail
मध्य प्रदेश की राजनीति में वित्तीय अनुशासन और सरकारी खर्चों को लेकर नया विवाद सामने आया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखा। पत्र में पटवारी ने राज्य में बड़े सरकारी आयोजनों पर एक साल तक रोक लगाने और खर्चों में कटौती की मांग की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मितव्ययिता और ईंधन बचत की अपील का हवाला देते हुए कहा कि जब सरकार जनता से खर्चों में कमी की उम्मीद करती है, तो सरकार और जनप्रतिनिधियों को भी सादगी का पालन करना चाहिए।
वेतन-भत्तों में कटौती का सुझाव
जीतू पटवारी ने विधायकों, मंत्रियों और अन्य जनप्रतिनिधियों के वेतन-भत्तों और अन्य सुविधाओं में कटौती की भी मांग की। उनका कहना था कि कम से कम एक साल के लिए जनप्रतिनिधि अपनी सुविधाओं में कमी करें, ताकि जनता को यह महसूस हो सके कि सरकार उनके साथ खड़ी है। यह कदम आर्थिक अनुशासन का एक मजबूत संदेश दे सकता है।
MSP पर सवाल
जीतू पटवारी ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार कागजों में MSP बढ़ाने का दावा कर रही है। लेकिन जमीनी स्तर पर किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। प्रदेश की मंडियों में किसान MSP से कम कीमत पर अपनी फसल बेचने को मजबूर हैं। पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को चुनौती दी। उन्होंने कहा, यदि वाकई MSP पर खरीदी हो रही है, तो वे किसानों के बीच जाएं और हकीकत दिखाएं।
सरकारी आयोजनों पर रोक की मांग
पटवारी ने पत्र में मांग की कि राज्य में अगले एक साल तक सभी बड़े सरकारी आयोजनों पर प्रतिबंध लगा दिया जाए। उन्होंने तर्क दिया कि यह खर्च जनता की समस्याओं के प्रति असंवेदनशीलता को दर्शाता है। वर्तमान में किसान आत्महत्याएं कर रहे हैं। बेरोजगारी बढ़ रही है। आदिवासी क्षेत्रों में कुपोषण बढ़ रहा है। ऐसे समय में भव्य सरकारी आयोजनों का खर्च उचित नहीं है। पटवारी ने कहा कि यह खर्च जनता के घावों पर नमक छिड़कने जैसा है।
सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग
पटवारी ने आरोप लगाया कि प्रदेश में सरकारी मशीनरी का उपयोग राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के लिए हो रहा है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के सिद्धांतों के खिलाफ बताया। पटवारी ने कहा कि इस तरह के कार्यों पर सख्ती से रोक लगनी चाहिए।
डिजिटल माध्यम अपनाने पर जोर
पटवारी ने सुझाव दिया कि सरकार को बड़े कार्यक्रमों की जगह डिजिटल संवाद को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब शिक्षा और न्याय व्यवस्था ऑनलाइन हो सकती है, तो सरकारी प्रचार और संवाद भी डिजिटल माध्यम से किए जा सकते हैं। इससे न केवल खर्चों में कमी आएगी, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रिया भी ज्यादा पारदर्शी हो सकती है।
विदेशी दौरों पर रोक की मांग
पत्र में पटवारी ने मंत्रियों और अधिकारियों के विदेशी दौरों और बड़े प्रतिनिधिमंडलों पर भी तत्काल रोक लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि राज्य की आर्थिक स्थिति को देखते हुए ऐसे खर्चों पर नियंत्रण जरूरी है, जिससे सरकारी खजाने पर दबाव कम हो सके।
सरकार से ठोस कदम उठाने की अपील
पटवारी ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वे मध्यप्रदेश में वास्तविक वित्तीय अनुशासन लागू करने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाएं। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति और जनता के हितों से जुड़ा अहम विषय है।
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