एमपी के हजारों गांवों की चमकेगी किस्मत: सरकार ने जी राम जी योजना का बढ़ाया बजट

Amresh Kushwaha | Jul 09, 2026, 10:38 IST
जी राम जी से चमकेगी एमपी के गांवों की किस्मत
मध्य प्रदेश में मनरेगा की जगह नई जी राम जी योजना लागू हुई है। इसमें रोजगार गारंटी 100 से बढ़ाकर 125 दिन की गई है। ग्रामीण रोजगार पर बजट 70 प्रतिशत तक बढ़ गया है। डेयरी, मत्स्य पालन जैसे नए काम भी जोड़े गए हैं।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मनरेगा की जगह अब जी राम जी योजना लागू की गई है।
  • मध्य प्रदेश में इस योजना का बजट 70 फीसदी बढ़ गया है।
  • रोजगार गारंटी अब 100 की जगह 125 दिन होगी।
  • डेयरी, मत्स्य पालन जैसे नए काम भी जोड़े गए हैं।
  • राज्यों की वित्तीय और प्रशासनिक जिम्मेदारी भी बढ़ जाएगी।

ग्रामीण रोजगार के लिए देश की सबसे बड़ी योजना मनरेगा (महात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट) की जगह अब नई व्यवस्था लागू हो गई है। इसका नाम वीबी-जी राम जी रखा गया है। इस बदलाव का सीधा असर मध्य प्रदेश में साफ दिखाई दे रहा है। गांवों में रोजगार की गारंटी बढ़ने के साथ राज्य की वित्तीय जिम्मेदारी भी बढ़ गई है।



बजट में बड़ा उछाल

पिछले पांच साल के आंकड़े देखें तो मनरेगा पर हर साल औसतन छह हजार 147 करोड़ रुपए खर्च होते थे। नई व्यवस्था के तहत वित्त वर्ष 2026-27 में 10 हजार 428 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। यानी ग्रामीण रोजगार पर खर्च करीब 70 प्रतिशत तक बढ़ गया है। आंकड़ों के मुताबिक 2020-21 में मनरेगा पर छह हजार 405 करोड़ रुपए खर्च हुए थे।



वहीं 2021-22 में यह खर्च बढ़कर आठ हजार 35 करोड़ रुपए हो गया। इसके बाद के वर्षों में खर्च में थोड़ा उतार-चढ़ाव भी देखा गया। पांच साल में कुल मिलाकर 30 हजार 736 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। इसमें से 21 हजार 053 करोड़ रुपए सीधे मजदूरी पर खर्च हुए। बाकी नौ हजार 683 करोड़ रुपए सामग्री, श्रमिक और प्रशासनिक कामों पर खर्च हुए।



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125 दिन की गारंटी

नई योजना में रोजगार गारंटी को भी बढ़ाया गया है। पहले यह गारंटी 100 दिन की थी, जिसे अब बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। साथ ही मजदूरी की राष्ट्रीय न्यूनतम दर भी बढ़ाई गई है। इससे मजदूरों को पहले से ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है। योजना के संचालन और निगरानी में भी राज्यों की भूमिका पहले से बड़ी होगी। वित्तीय भागीदारी में भी राज्यों को अधिक जिम्मेदारी उठानी होगी।



मनरेगा और नई योजना में अंतर

मनरेगा का मुख्य मकसद सिर्फ रोजगार देना था। इसके तहत तालाब, कुएं और खेत समतलीकरण जैसे काम होते थे। सड़क और नाला निर्माण के काम भी इसमें शामिल थे। जल संरक्षण और पौधरोपण जैसे काम भी मनरेगा में आते थे। ये सभी काम मुख्यतः अकुशल मजदूरी पर आधारित थे।



जी राम जी योजना का लक्ष्य इससे अलग है। इसका मकसद रोजगार के साथ स्थायी आय देना भी है। इसमें मनरेगा वाले सभी पुराने काम शामिल रहेंगे। इसके अलावा डेयरी और मत्स्य पालन जैसे नए काम भी जोड़े गए हैं। बागवानी और पशुपालन को भी योजना में शामिल किया गया है। ग्रामीण भंडारण और खाद्य प्रसंस्करण जैसे काम भी अब इसमें आएंगे। कृषि आधारित ढांचे और आजीविका परियोजनाएं भी योजना का हिस्सा होंगी।



जवाबदेही भी बढ़ेगी

नई व्यवस्था में सिर्फ काम नहीं, बल्कि जवाबदेही भी बढ़ाई गई है। राज्यों को छह महीने के अंदर कार्यान्वयन योजना तैयार करनी होगी। गांवों के विकास कार्य विकसित ग्राम पंचायत प्लान के तहत तय होंगे। इन योजनाओं को पीएम गति शक्ति (PM Gati Shakti) से भी जोड़ा जाएगा। इसके अलावा राष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेटफॉर्म से भी जोड़ने की योजना है। यानी योजना का ढांचा गांव स्तर पर बनेगा। लेकिन इसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।



एक्सपर्ट की राय

स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स के विभागाध्यक्ष प्रो. कन्हैया आहूजा ने अपनी राय दी है। उनका कहना है कि नई व्यवस्था में राज्यों की जिम्मेदारी बढ़ने से छोटे राज्यों पर ज्यादा वित्तीय दबाव पड़ेगा। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश भौगोलिक रूप से एक बड़ा राज्य है। यहां मजदूर काम की तलाश में औसतन 50 किलोमीटर तक का सफर तय करते हैं। ऐसे में अगर दूरस्थ जगहों पर रोजगार दिया जाता है, तो परिवहन भत्ते पर खर्च भी बढ़ जाएगा। प्रो। आहूजा के मुताबिक इस खर्च का इंतजाम भी राज्य सरकार को ही करना होगा।



पंचायत विभाग का बजट भी बढ़ा

आंकड़ों के अनुसार 2026-27 के बजट में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के लिए 40 हजार 62 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। रोजगार गारंटी योजना के लिए इसमें से 10 हजार 428 करोड़ रुपए तय किए गए हैं। यह रकम पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के कुल बजट का करीब 26 प्रतिशत है। यह आंकड़ा साफ दिखाता है कि सरकार ग्रामीण रोजगार को कितनी प्राथमिकता दे रही है।



इस बदलाव से आने वाले समय में गांवों की तस्वीर बदलने की उम्मीद है। रोजगार के साथ स्थायी आय के मौके भी बढ़ेंगे। हालांकि राज्य सरकार के सामने वित्तीय चुनौतियां भी बढ़ेंगी। आने वाले महीनों में योजना का असर धरातल पर दिखना शुरू होगा।



FAQ

  1. जी राम जी योजना में क्या नया है?
    जी राम जी योजना में रोजगार गारंटी 100 से बढ़ाकर 125 दिन की गई है। इसमें डेयरी, मत्स्य पालन, बागवानी और पशुपालन जैसे नए काम भी जोड़े गए हैं। योजना का मकसद सिर्फ रोजगार नहीं, बल्कि स्थायी आय देना भी है।
  2. मध्य प्रदेश में जी राम जी योजना का बजट कितना बढ़ा है?
    पहले मनरेगा पर औसतन 6,147 करोड़ रुपए सालाना खर्च होते थे। वित्त वर्ष 2026-27 में इस योजना के लिए 10,428 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। यानी बजट में करीब 70 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

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