प्रभार पर चल रहे किशोर न्याय बोर्ड: दूसरे जिलों के भरोसे अटके बाल अपराध के मामले
ऐसे समझें पूरा मामला...
- अनूपपुर, भिंड, मंदसौर, श्योपुर में बोर्ड के सदस्य के एक-एक पद खाली।
- 10 जिलों में सीडब्ल्यूसी में भी कोरम की कमी से बार-बार टल रही सुनवाई।
- ज्यादातर जिलों में 6 से 10 महीने से बोर्ड में नहीं हो पाई है सदस्यों की नियुक्ति।
- जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत एमपी के 27 जिलों में ही किशोर न्याय बोर्ड पूरा।
- बाल अपराध के 200, गोद लेने के 150 और बच्चों की कस्टडी के 300 केस लंबित।
किशोर न्याय अधिनियम 2015 की धारा 4 के तहत बोर्ड में 1 मजिस्ट्रेट और 2 सामाजिक कार्यकर्ता का सदस्य होना अनिवार्य है। वहीं धारा 27 के तहत बाल कल्याण समिति में 1 अध्यक्ष और चार सदस्य जरूरी हैं।
MP में 52 जिलों में से सिर्फ 27 में पूर्ण बोर्ड हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग का इश्तेहार 13 जिलों में बोर्ड सदस्य और 10 जिलों में CWC सदस्यों की कमी की पुष्टि करता है। इंदौर जैसे बड़े जिले में CWC सदस्य का पद महीनों से खाली है।
कमी बढ़ा रही बच्चों की मुश्किल
सदस्यों की कमी से कोरम पूरा नहीं होता, इसलिए सुनवाई नहीं हो पाती। नतीजा, नाबालिग अपचारियों को बाल सुधार गृह में महीनों रहना पड़ रहा है।
बेसहारा बच्चों को शेल्टर होम से परिवार या गोद लेने वाली संस्था तक पहुंचाने की प्रक्रिया रुक गई है। विभाग ने अब सदस्यों की कमी को देखते हुए इन्हें भरने की सुध ली है। इसके लिए समिति और बोर्ड में नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
जिलों में बोर्ड-समिति की स्थिति
महिला एवं बाल विकास विभाग के अनुसार अनुपूर, भिंड में बोर्ड के एक- एक सदस्य का पद खाली है। मंदसौर, श्योपुर में दो- दो सदस्यों की कमी है। इस वजह से इन जिलों में बोर्ड की सुनवाई अकसर अटक जाती है।
इंदौर CWC के साथ ही मुरैना, खरगोन, दमोह जिलों में सदस्यों के एक-एक पद खाली हैं। जबकि हरदा, सीहोर में दो- दो सदस्यों की कमी है। वहीं शहडोल, बुरहानपुर, अशोकनगर में अध्यक्ष पद ही रिक्त है। अध्यक्ष की मौजूदगी के बिना इन जिलों में समिति कोई आदेश ही नहीं दे पा रही है।
अध्यक्ष-सदस्यों की कमी का असर
JJ Act के तहत बोर्ड में 2 सदस्य और मजिस्ट्रेट का कोरम जरूरी है। सदस्य न होने से बाल अपराध के केस में जमानत, चार्जशीट, अंतिम निर्णय सब रुक जाते हैं।
मुरैना में चोरी के आरोप में पकड़े गए 16 साल के बच्चे की फाइल 7 महीने से लंबित है। CWC सदस्य न होने से 0-18 साल के रेस्क्यू किए बच्चों को चाइल्ड केयर संस्थान में रखना पड़ता है।
गोद लेने के इच्छुक 80 परिवारों को सीहोर-हरदा में 8 महीने से इंतजार है। विभाग दूसरे जिले के बोर्ड से संबद्धता कर रहा है, पर वह हफ्ते में 1 दिन ही केस सुन पाते हैं।
FAQ
- किशोर न्याय बोर्ड क्या करता है?
किशोर न्याय बोर्ड 16-18 साल के बच्चों द्वारा किए गए अपराध के मामलों की सुनवाई करता है। इसका मकसद बच्चे को सजा नहीं, सुधार का मौका देना है। बोर्ड में 1 मजिस्ट्रेट और 2 सामाजिक कार्यकर्ता होते हैं। कोरम पूरा न हो तो सुनवाई नहीं हो सकती। - बाल कल्याण समिति CWC का काम क्या है?
CWC देखरेख और संरक्षण की जरूरत वाले 0-18 साल के बच्चों के मामले देखती है। बेसहारा, शोषित, तस्करी से बचाए गए बच्चों को शेल्टर, काउंसिलिंग, शिक्षा, गोद देना या परिवार तक पहुंचाना CWC के आदेश से होता है। 1 अध्यक्ष + 4 सदस्य जरूरी हैं। - MP में कितने जिलों में बोर्ड-CWC अधूरे हैं?
18 मई 2026 की विज्ञप्ति के अनुसार 4 जिलों में बोर्ड के सदस्य और 10 जिलों में CWC के सदस्य/अध्यक्ष पद खाली हैं। कुल 13 जिले प्रभावित हैं। JJ Act के तहत 27 जिलों में ही पूर्ण बोर्ड हैं।
ये खबरें भी पढ़ें...
स्वास्थ्य विभाग की आशंका को दरकिनार कर बैठ रहे NHM के लापरवाह अधिकारी
एमपी मंत्रियों की संपत्ति पर 13 साल से परदा, चुनाव में दिखाई जायदाद, मंत्री बनते ही भूल गए
बीजेपी विधायक टी राजा की भोपाल में धर्मसभा मामले का मामला हाईकोर्ट में, सुनवाई टली
एमपी सरकार वैष्णो देवी मॉडल से सीखेगी भीड़ नियंत्रण, महाकाल में होगा आधुनिक विकास