50 रुपए का पीतल बैज बना खजाना! झांसी कनेक्शन से बदली किस्मत

Sandeep Kumar | Jun 18, 2026, 16:45 IST
50 रुपए का पीतल बैज बना खजाना
मध्य प्रदेश के दतिया जिले में एक ऐतिहासिक खोज ने सबको चौंका दिया है। पुजारी राधावल्लभ मिश्रा के घर से 1840 का झांसी साम्राज्य पीतल बैज मिला है। इसके साथ ही विक्टोरिया और 12 भारतीय राजाओं की दुर्लभ तस्वीर भी सामने आई है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • दतिया में पुजारी के घर ऐतिहासिक वस्तुएं मिलीं।
  • 1840 का झांसी साम्राज्य का पीतल बैज मिला।
  • विक्टोरिया और 12 राजाओं का दुर्लभ चित्र भी मिला।
  • बैज को शासन का पहला आधिकारिक प्रमाण माना गया।
  • खोज ज्ञान भारतम मिशन के तहत की गई।

कबाड़ से निकला इतिहास का खजाना

मध्य प्रदेश की धरती पर इतिहास के कई राज दबे पड़े हैं। अब एक ऐसा राज सामने आया है जिसने पुरातत्व विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है। दतिया जिले में रहने वाले पुजारी राधावल्लभ मिश्रा के घर से एक पीतल का बैज बरामद हुआ है।



यह बैज उन्होंने करीब 30 साल पहले एक पुरानी बर्तन की दुकान से सिर्फ 50 रुपए में खरीदा था। उस वक्त किसी को अंदाजा नहीं था कि यह धातु का छोटा-सा टुकड़ा इतिहास का इतना बड़ा गवाह है।



बैज पर लिखा है 184 साल पुराना संदेश

यह बैज अंडाकार आकार का है और पीतल से बना है। इस पर लिखा है, 'चपरास श्री महाराजाधिराज झांसी संवत 1896'। संवत 1896 का अर्थ है सन 1840 ईस्वी। पुरातत्व विभाग के वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. वसीम खान ने इस बैज की पहचान की।



उनके मुताबिक यह झांसी के राजमहल के चपरासी की वर्दी पर लगाया जाने वाला आधिकारिक बैज था। यह रानी लक्ष्मीबाई और राजा गंगाधर राव के विवाह से भी पहले का है। इसलिए यह राजा गंगाधर राव के प्रशासनिक तंत्र का अब तक का पहला ज्ञात आधिकारिक सबूत बन गया है।



पुजारी के पास ये भी मिला

सिर्फ यही नहीं, राधावल्लभ मिश्रा के संग्रह में एक और अनमोल चीज मिली। यह एक दुर्लभ सामूहिक चित्र है जिसे 'विक्टोरिया ग्रुप' कहा जा रहा है। इस ऐतिहासिक तस्वीर में ब्रिटिश महारानी विक्टोरिया के चारों तरफ भारत के 12 बड़े शासकों को देखा जा सकता है।



इनमें बड़ौदा, मैसूर, इंदौर, ग्वालियर, जयपुर, त्रावणकोर और नागपुर के महाराजा शामिल हैं। हैदराबाद के निजाम और उनके प्रधानमंत्री नवाब आसमान जाह भी इसमें नजर आते हैं। यह चित्र लगभग 150 से 200 साल पुराना है। इसे पूना फोटोग्राफिक कंपनी ने तैयार किया था।



दुर्भाग्य से समय की मार ने तस्वीर के निचले हिस्से को नुकसान पहुंचाया है। इससे दो राजाओं की पहचान हमेशा के लिए अज्ञात हो गई है। पुजारी राधावल्लभ ने यह तस्वीर करीब 50 साल पहले एक फोटो फ्रेम की दुकान से उठाई थी। जब कोई इसे लेने नहीं आया तो उन्होंने इसे संभाल लिया।



ज्ञान भारतम मिशन से जुड़ी हैं उम्मीदें

यह खोज राज्य सरकार के ज्ञान भारतम मिशन के तहत हुई है। इस मिशन में पुरातत्वविदों की टीम घर-घर जाकर ऐतिहासिक वस्तुओं का सर्वेक्षण कर रही है। पुरातत्व आयुक्त मदन कुमार नागरगोजे ने बताया कि इस मिशन के जरिए लोग खुद अपनी धरोहरें सामने ला रहे हैं। उनके अनुसार ये पुरखों की भूली-बिसरी यादें हमारी साझी विरासत को सहेजने में मील का पत्थर साबित होंगी।



ज्ञान भारतम मिशन क्या है?

ज्ञान भारतम मिशन मध्य प्रदेश सरकार की एक पहल है। इसके तहत पुरातत्वविदों की टीम घर-घर जाकर ऐतिहासिक वस्तुओं का सर्वेक्षण करती है। इसका उद्देश्य आम लोगों के पास छुपी ऐतिहासिक धरोहरों को सामने लाना है।



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