कैलारस शक्कर कारखाना आंदोलन स्थगित, पंकज उपाध्याय का अनशन खत्म

Ratan Kumar Mishra | Aug 22, 2026, 17:53 IST
Photograph: (thesootr)
कैलारस शक्कर कारखाना फिर शुरू करने की प्रक्रिया शुरू हुई। इसके बाद विधायक पंकज उपाध्याय ने अनशन खत्म किया और संघर्ष समिति ने आंदोलन स्थगित कर दिया।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • कैलारस में आंदोलन की बड़ी जीत, मिल फिर से चलेगी।
  • आठ दिन बाद स्थगित हुआ शक्कर कारखाना आंदोलन।
  • विधायक पंकज उपाध्याय ने खत्म किया आमरण अनशन।
  • सरकार ने शुरू की मिल को लीज पर देने की प्रक्रिया।
  • किसानों को फिर मिलेगा कारखाने से रोजगार का सहारा।

कैलारस शक्कर कारखाना लंबे समय से बंद पड़ा है। इसे दोबारा शुरू कराने के लिए आंदोलन चल रहा था। जौरा कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय 15 अगस्त से अनशन पर थे। सरकार ने अब मिल को लीज पर देने की प्रक्रिया शुरू की। इसके बाद संघर्ष समिति ने आंदोलन को स्थगित कर दिया।



कैलारस शक्कर कारखाने को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। लंबे समय से बंद इस मिल को फिर चलाने की तैयारी शुरू हुई है। इसी के साथ आठ दिन से चल रहा आंदोलन भी थम गया है।



मिल फिर से चलेगी

एमएसएमई विभाग ने मिल को लीज पर देने की प्रक्रिया शुरू की है। इच्छुक कंपनियों से प्रस्ताव मांगे गए हैं। मिल को तीस साल की लीज पर देने की योजना है। अगर काम संतोषजनक रहा तो लीज आगे भी बढ़ सकती है।



प्रस्ताव जमा करने की अंतिम तारीख 15 सितंबर तय की गई है। इसके बाद प्रक्रिया अगले चरण में जाएगी। इस फैसले ने आंदोलनकारियों को बड़ा हौसला दिया है।



आठ दिन बाद आंदोलन स्थगित

कैलारस में संघर्ष समिति का आंदोलन आठ दिन तक चला। सरकार के फैसले के बाद समिति ने आंदोलन को कुछ समय के लिए रोक दिया। समिति ने इसे बड़ी सफलता बताया है।



हालांकि समिति ने इसे अंतिम जीत नहीं माना है। जरूरत पड़ने पर आंदोलन फिर शुरू करने की बात कही गई है। समिति अब सरकार के अगले कदम पर नजर रखेगी।



अनशन हुआ खत्म

आंदोलन के दौरान विधायक पंकज उपाध्याय आमरण अनशन पर बैठे थे। उन्होंने 15 अगस्त को कारखाना परिसर में अनशन शुरू किया था। लगातार अनशन के कारण उनकी तबीयत भी बिगड़ी थी।



स्वास्थ्य को लेकर समर्थकों और नेताओं ने चिंता जताई थी। अब आंदोलन स्थगित होने के साथ अनशन भी खत्म हुआ। पूर्व मंत्री गोविंद सिंह ने उन्हें जूस पिलाकर अनशन खत्म कराया। इस दौरान कई नेता और सामाजिक संगठनों के लोग मौजूद रहे।



समिति की प्रमुख मांगें

समिति ने सरकार के फैसले का स्वागत किया है। लेकिन समिति ने कुछ मांगें आगे भी रखी हैं। सबसे पहली मांग कारखाना सहकारी तरीके से चलाने की है।



किसानों और कर्मचारियों का बकाया पैसा देने की मांग है। एमएसएमई (MSME – Micro, Small and Medium Enterprises) को जमीन देने की कार्रवाई रोकने की मांग भी है।



समिति ने जमीन को किसी दूसरे काम में न लगाने की मांग की है। इन मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा गया है। मुरैना कलेक्टर को भी ज्ञापन सौंपा गया है।



आंदोलन की जीत का दावा

संघर्ष समिति ने सरकार के फैसले को आंदोलन की जीत बताया है। समिति के नेताओं ने इसके लिए लोगों को बधाई दी। कारखाना परिसर में इस मौके पर सभा भी हुई।



सभा में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। कई नेताओं ने आंदोलन को आगे भी मजबूत करने की बात कही। पूर्व मंत्री गोविंद सिंह ने भी सभा को संबोधित किया। उन्होंने संघर्ष की तैयारी जारी रखने की बात कही। उनके अनुसार जरूरत पड़ने पर आंदोलन फिर तेज होगा।



कई नेताओं ने दिया साथ

आंदोलन को अलग-अलग दलों और संगठनों का समर्थन मिला। सभा में विधायक दिनेश गुर्जर भी मौजूद रहे। पूर्व विधायक बैजनाथ कुशवाहा ने भी समर्थन दिया।



कांग्रेस जिला अध्यक्ष मधु राज तोमर भी सभा में पहुंचे। माकपा नेता ओमप्रकाश श्रीवास ने भी अपनी बात रखी। राजवीर धाकड़ और ओमप्रकाश शर्मा भी मौजूद रहे। हरेंद्र सिंह जादौन और शम्मा कुरैशी भी सभा में शामिल हुए। सभी नेताओं ने आंदोलनकारियों को बधाई दी।



अब आगे क्या होगा

सरकार की प्रक्रिया अब टेंडर के अगले चरण में जाएगी। इच्छुक कंपनियां तय समय में अपने प्रस्ताव जमा कर सकेंगी। इसके बाद सरकार प्रस्तावों की जांच करेगी।



फिर कारखाना चलाने वाली कंपनी का चयन होगा। यही प्रक्रिया आंदोलन की अगली दिशा भी तय करेगी। समिति अब सरकार के काम पर नजर रखेगी। मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन फिर शुरू हो सकता है।



किसानों को बड़ी उम्मीद

कैलारस शक्कर कारखाना क्षेत्र के किसानों से जुड़ा बड़ा मुद्दा है। कारखाना शुरू होने से गन्ना किसानों को बाजार मिल सकता है। स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ने की उम्मीद भी है।



इससे कारखाने से जुड़े कारोबार को भी फायदा हो सकता है। इसी वजह से आंदोलन को स्थानीय समर्थन मिला था। अब लोगों की नजर कारखाना शुरू होने की अगली तारीख पर टिकी है।



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