कैलाश विजयवर्गीय 10 दिन के अवकाश पर, गोपनीय बैठक से पहले संघ दफ्तर भी पहुंचे थे
INDORE. नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय 20 से 30 जनवरी तक छुट्टी पर हैं। यह अवकाश उन्होंने परिवार के एक करीबी सदस्य के निधन के कारण लिया है। हालांकि, इसी दौरान सोमवार 26 जनवरी की दोपहर उन्होंने गोपनीय तरीके से रेसीडेंसी में एक बैठक की। बता दें कि बैठक के एक दिन पहले वह भोपाल में संघ कार्यालय समिधा भी पहुंचे थे। इस सक्रियता के बावजूद 23 जनवरी को भोजशाला मामले और 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस आयोजन से दूरी ने कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
10 दिन के अवकाश की ऐसे दी थी सूचना
जब 21 जनवरी को यह सूचना जारी हुई कि गणतंत्र दिवस पर सभी जिलों में कौन-सा मंत्री कहां झंडा फहराएगा, तब उस सूची में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का नाम शामिल नहीं था।
सूची जारी होने के तुरंत बाद मंत्री विजयवर्गीय के कार्यालय की ओर से 20 जनवरी को एक प्रेस सूचना जारी की गई। यह सूचना उनके निज सचिव अभिमन्यु सिंह चौहान के हस्ताक्षर से जारी हुई थी।
इसमें बताया गया था कि मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के एक निकट पारिवारिक सदस्य का 20 जनवरी को निधन हो गया है। इसी कारण वे आगामी कुछ दिनों तक किसी भी आधिकारिक, सार्वजनिक अथवा सामाजिक कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो पाएंगे।
इधर, रेसीडेंसी में की एक घंटे बैठक
रेसीडेंसी कोठी में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय सोमवार, 26 जनवरी को दोपहर करीब साढ़े तीन बजे अचानक पहुंचे। वहां अलग वीआईपी लाउंज में एक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में निगमायुक्त क्षितिज सिंघल के साथ एक और अधिकारी थे।
मंत्री विजयवर्गीय के साथ उनकी यह बैठक करीब एक घंटे तक चली। इस दौरान किसी को भी वहां जाने की इजाजत नहीं थी। अवकाश के दिनों में इस मीटिंग ने सियासी हलचल मचा दी है।
एक दिन पहले संघ के दफ्तर गए थे मंत्री
इसके पहले 25 जनवरी को भोपाल में उन्होंने संघ के समिधा कार्यालय में दीपक विस्पुते से मुलाकात की थी। अचानक इंदौर से भोपाल जाकर संघ दफ्तर जाने से भी भारी हलचल हुई थी। बताया जा रहा है कि इस दौरान उनके जरिए 10 दिन की छुट्टी लेने की वजह और सियासी मामलों को लेकर लंबी चर्चा हुई थी।
इसके पहले दिल्ली और भोपाल की यह बैठक अहम थी
भागीरथपुरा कांड के दौरान उनके एक शब्द को लेकर मीडिया से विवाद हो गया था। विवाद के बाद वह अचानक 3 जनवरी को दिल्ली गए थे। वहां से लौटने के बाद उन्होंने मीडिया में बयान देने से दूरी बना ली थी। फिर वह 8 जनवरी को भोपाल बीजेपी दफ्तर गए थे। यहां उन्होंने सुरक्षा घेरे के बीच निजता बनाए रखते हुए संगठन मंत्री हितानंद शर्मा के साथ लंबी बातचीत की थी।
वहीं हितानंद शर्मा इसके पहले भागीरथपुरा कांड पर डैमेज कंट्रोल के लिए 3 जनवरी को बीजेपी दफ्तर इंदौर आए थे। यहां महापौर पुष्यमित्र भार्गव, नगराध्यक्ष सुमित मिश्रा, एमआईसी मेंबर बबलू शर्मा और पार्षद कमल वाघेला के साथ बंद कमरे में बैठक ली थी। इसमें नसीहत यही थी कि शांति रखो और कोई भी बयानबाजी न की जाए। इसके बाद ही सभी नेता बयान देने में सतर्क हो गए हैं।
मंत्री पुत्र का यह ट्वीट भी आया था चर्चा में
इसी दौरान मंत्री पुत्र और पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय का एक ट्वीट (X) भी खासा चर्चा में रहा था। इसे 10 जनवरी को ट्वीट किया गया था। इसमें उन्होंने एक तरह से विरोधियों को चेतावनी दी थी।
इसमें कहा गया था कि एक बात साफ करना चाहता हूं। मैदान में खड़े हैं। सेवा में लगे हैं। इसका मतलब यह कतई नहीं कि दोषी हैं। बुरे वक्त में साथ देने की पुरानी आदत है। एक बार स्थिति सामान्य हो जाए, फिर इस पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
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