मैंने भी संघ की चड्डी पहनी है... अफसरों पर कैलाश विजयवर्गीय का तंज

Ramanand Tiwari | Jun 27, 2026, 21:09 IST
Photograph: (THESOOTR)
BHOPAL. नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि सरकार बनने के बाद कई अधिकारी खुद को संघ से जुड़ा बताने लगे। उनके बयान से सत्ता, संगठन और नौकरशाही पर नई बहस छिड़ गई।

ऐसे समझें क्या है पूरा मामला...

  • सरकार बनने के बाद अफसरों के रवैये पर विजयवर्गीय का तंज।
  • कई अधिकारी खुद को संघ से जुड़ा बताते हैं।
  • संघ में बढ़ती भीड़ पर जताई चिंता।
  • अच्छे और संस्कारित कार्यकर्ताओं की कमी बताई।
  • बयान से सत्ता और नौकरशाही पर बहस तेज।

क्या सत्ता में अब नेताओं से ज्यादा अफसरों का प्रभाव बढ़ रहा है? क्या संगठन का नाम लेकर अधिकारी अपनी पकड़ मजबूत दिखा रहे हैं? इसी सवाल को हवा देने वाला बयान नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का सामने आया है।



कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि सरकार बनने के बाद कई अधिकारी खुद को संघ से जुड़ा बताने लगे और यहां तक कहने लगे कि "मैंने भी संघ की चड्डी पहनी है।" उनका यह बयान अब राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।



मुख्य बातें...

  • सरकार बनने के बाद अफसरों के रवैये पर कैलाश विजयवर्गीय का बड़ा बयान।
  • दावा- कई अधिकारी खुद को संघ से जुड़ा बताने लगे।
  • कहा- "मैंने भी संघ की चड्डी पहनी है", ऐसा कहकर अधिकारी पहचान जताते हैं।
  • संघ में बढ़ती भीड़ और अच्छे कार्यकर्ताओं की कमी पर भी जताई चिंता।
  • बयान के बाद सोशल मीडिया पर राजनीतिक बहस तेज।

आखिर कैलाश विजयवर्गीय ने ऐसा क्यों कहा?

कैलाश विजयवर्गीय का बयान केवल एक टिप्पणी नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे सत्ता और नौकरशाही ( Bureaucracy ) के बदलते रिश्तों पर बड़ा संकेत भी माना जा रहा है।



सवाल यह उठ रहा है कि क्या कुछ अधिकारी संगठन से नजदीकी दिखाकर अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश करते हैं? या फिर नेताओं को भी यह महसूस होने लगा है कि प्रशासनिक तंत्र का असर पहले से ज्यादा मजबूत हो गया है? यही वजह है कि उनका बयान अब सिर्फ संघ तक सीमित नहीं, बल्कि सत्ता में अफसरों की भूमिका और बढ़ते प्रभाव पर भी चर्चा छेड़ रहा है।



सरकार आते ही सब अधिकारी संघ के हो गए

शालिग्राम तोमर स्मृति कार्यक्रम में बोलते हुए विजयवर्गीय ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि अब संघ में बहुत भीड़ हो गई है। उन्होंने कहा कि सरकार बनने के बाद जो भी अधिकारी मिलता है, वह कहता है कि "मैंने भी संघ की चड्डी पहनी है।" उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा लगता है जैसे सरकार बनने के बाद सभी अधिकारी खुद को संघ का कार्यकर्ता बताने लगे हैं।



एक अधिकारी ने पिता का भी दिया हवाला

विजयवर्गीय ने कहा कि एक अधिकारी ने उनसे यहां तक कहा कि उसके पिता भी संघ में अध्यक्ष रह चुके हैं। उनके मुताबिक, अब संघ से जुड़ाव बताने वालों की संख्या तो बढ़ रही है, लेकिन समर्पित और अच्छे लोगों की कमी महसूस होने लगी है।



संख्या बढ़ी, लेकिन अच्छे लोग कम हो रहे

उन्होंने कहा कि संगठन और विचारधारा दोनों का विस्तार होना अच्छी बात है, लेकिन यदि अच्छे और संस्कारित लोग नहीं होंगे तो विचारधारा का महत्व भी कमजोर पड़ जाएगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आत्ममंथन और चिंतन करने की जरूरत बताई।



मुख्यमंत्री मोहन यादव ने क्या कहा?

इसी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शालिग्राम तोमर को याद करते हुए कहा कि उन्होंने जीवनभर कार्यकर्ताओं को तैयार किया और उनमें अनुशासन विकसित किया।



मुख्यमंत्री ने भावुक अंदाज में कहा कि "मेरी शादी भी शालिग्रामजी ने ही कराई थी।" उन्होंने पुराने कार्यकर्ताओं को संगठन की सबसे बड़ी ताकत बताया।



राजनीतिक मायने क्या हैं?

कैलाश विजयवर्गीय का बयान ऐसे समय आया है, जब सत्ता, संगठन और नौकरशाही के रिश्तों को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। उनके शब्दों को कई लोग प्रशासनिक व्यवस्था पर व्यंग्य मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे संगठन के भीतर आत्ममंथन का संदेश भी बता रहे हैं। आने वाले दिनों में यह बयान राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन सकता है।



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